Friday, June 7, 2024

आभा (एबीएचए) की स्कैन और शेयर सेवा ने देशभर में 3 करोड़ बाह्य रोगी विभाग पंजीकरण की सुविधा प्रदान की

 



राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आभा-आधारित स्कैन और शेयर सेवा के माध्यम से 3 करोड़ बाह्य रोगी विभाग टोकन उत्पन्न करके एक प्रमुख उपलब्धि प्राप्त की

उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर डिजिटल बाह्य रोगी विभाग पंजीकरण सेवा को अपनाने में अग्रणी हैं

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आभा-आधारित स्कैन और शेयर सेवा के माध्यम से बाह्य-रोगी विभाग (ओपीडी) पंजीकरण के लिए 3 करोड़ से अधिक टोकन तैयार करके स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में अपने मिशन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

अक्टूबर 2022 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अंतर्गत शुरू की गई इस अभिनव पेपरलेस सेवा ने रोगियों के अनुभव में क्रांति ला दी है, विशेष रूप से कमज़ोर समूहों जैसे कि बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाओं और आवागमन संबंधी चुनौतियों वाले लोगों को इससे लाभ मिला है, क्योंकि इससे अपॉइंटमेंट के लिए लंबी कतारों में प्रतीक्षा करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

आभा-आधारित स्कैन और शेयर सेवा मरीज़ों को बाह्य-रोगी विभाग (ओपीडी) पंजीकरण काउंटर पर प्रदर्शित क्यूआर कोड को स्कैन करके बाह्य-रोगी विभाग (ओपीडी) अपॉइंटमेंट के लिए आसानी से पंजीकरण करने में सक्षम बनाती है, जिससे पंजीकरण के लिए उनकी एबीएचए प्रोफ़ाइल तुरंत साझा हो जाती है।

स्कैन और शेयर सेवा वर्तमान में भारत के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 546 जिलों में फैले 5435 से अधिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जारी है। उल्लेखनीय रूप से, औसतन 1.3 लाख व्यक्ति प्रतिदिन स्कैन और शेयर सेवा का लाभ उठाते हैं, जो नागरिकों के बीच इसकी उपयोगिता और लोकप्रियता को प्रदर्शित करता है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्कैन और शेयर पहल को व्यापक रूप से अपनाया जाना बाह्य-रोगी विभाग (ओपीडी) काउंटरों पर रोगी पंजीकरण प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से सुव्यवस्थित कर रहा है और रोगियों को दी जाने वाली सेवा दक्षता को बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर इस प्रक्रिया में सबसे आगे हैं, जहाँ प्रभावशाली आँकड़े दर्शाते हैं कि वे नागरिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक 92.7 लाख टोकन बनाए हैं, उसके बाद आंध्र प्रदेश ने 53.7 लाख, कर्नाटक ने 39.9 लाख और जम्मू-कश्मीर ने 37.1 लाख टोकन बनाए हैं।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) पब्लिक डैशबोर्ड (https://dashboard.abdm.gov.in/abdm/) सेवा के उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जिसमें दिल्ली, भोपाल, रायपुर और भुवनेश्वर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) में उल्लेखनीय उपयोग दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय रूप से, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सोलह अस्पताल एबीएचए-आधारित स्कैन और शेयर सेवा का उपयोग करके उत्पन्न बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) टोकन की कुल संख्या के लिए शीर्ष प्रदर्शन करने वाली सुविधाओं में प्रमुखता से शामिल हैं, जो स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और दक्षता बढ़ाने के लिए उनके समर्पण का उदाहरण है।

14.9 लाख टोकन के साथ नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) और भोपाल, प्रयागराज और रायपुर के सरकारी अस्पतालों ने क्रमशः 6.7 लाख, 5.1 लाख और 4.9 लाख टोकन के साथ स्कैन और शेयर सेवा के माध्यम से बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) पंजीकरण को कुशलतापूर्वक सुविधाजनक बनाकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर चर्चा करते हुए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सीईओ ने कहा, “स्कैन और शेयर सेवा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत एक अभिनव सुविधा है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और दक्षता में बदलाव लाना है। यह डिजिटल सेवा मानवी कागजी कार्रवाई की आवश्यकता को समाप्त करती है और प्रतीक्षा समय को काफी कम करती है, जिससे अस्पताल में जाना अधिक सुव्यवस्थित और कुशल हो जाता है। त्वरित और सुरक्षित सूचना विनिमय की सुविधा प्रदान करके, स्कैन और शेयर प्रतिदिन लगभग 1,30,000 रोगियों को लाभान्वित करता है, जिसमें कमजोर समूहों और तत्काल स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता वाले लोगों की सहायता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह तकनीकी उन्नति सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए डिजिटल समाधानों का लाभ उठाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

सभी टोकन में से, लगभग 75 प्रतिशत पहली बार उपयोगकर्ता होते हैं, जबकि 25 प्रतिशत लोग आगामी विजिट के लिए स्कैन और शेयर सेवा का उपयोग करते हैं, जो इसके व्यापक रूप से अपनाए जाने और उपयोगिता को उजागर करता है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रौद्योगिकी प्रदान करने वाले अस्पतालों और डिजिटल समाधान कंपनियों (डीएससी) के बीच स्कैन और शेयर सेवा को और अधिक अपनाने के लिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (डीएचआईएस) के माध्यम से 'स्कैन और शेयर' लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है। डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (डीएचआईएस) के बारे में अधिक जानकारी https://abdm.gov.in/DHIS पर उपलब्ध है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) स्वास्थ्य सेवाओं तक रोगियों की पहुँच बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहा है। 'स्कैन और शेयर' सेवा अब सार्वजनिक अस्पतालों के फ़ार्मेसी काउंटरों पर भी लागू की जा रही है और इसे प्रयोगशाला सेटिंग्स में विस्तारित करने की योजनाएँ चल रही हैं। इसके अतिरिक्त, क्यू आर कोड के साथ नागरिकों की सुविधा का लाभ उठाते हुए 'स्कैन और भेजें' और 'स्कैन और भुगतान' जैसी आगामी सेवाएँ शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। 'स्कैन और भुगतान' सेवा रोगियों को सीधे उनके ऐप के माध्यम से उनके लिए निर्धारित जांच या दवाओं के लिए भुगतान करने में सक्षम बनाएगी, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर भुगतान के लिए लाइनों में प्रतीक्षा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इसी तरह, ‘स्कैन और भेजें’ सेवा शीघ्र ही रोगियों को किसी सुविधा (अस्पताल या फार्मेसी) में सुविधाजनक रूप से क्यूआर कोड स्कैन करने और अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (पर्चे या लैब रिपोर्ट सहित) भेजने की सुविधा प्रदान करेगी।

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विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खडूड़ी भूषण ने निबुचौड स्थित अपने आवास पर कोटद्वार विधासभा के विकास कार्य को लेकर व वर्षा ऋतु से पूर्व सभी विभागीय अधिकारियों को तैयारी दुरुस्त करने के निर्देश दिए ।



*7 जून 2024 कोटद्वार*





विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विभागों की बैठक बुला कर जिसमें हर विभाग को उनकी नैतिक जिम्मेदारी देकर उन पर कार्य करने के लिए निर्देशित किया , जिसमें वन विभाग को जंगलों में लग रही आग व बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए निर्देशित किया । विधानसभा अध्यक्ष ने पेयजल की समस्या को दुरुस्त करने के लिए पेयजल विभाग को ग्राउंड जीरो पर कार्य करने के लिए कहा , उन्होंने बताया जहां भी ट्यूबवेल की मोटर खराब हो रही है उसे जल्द से जल्द सही किया जाए ताकि लोगो को पानी की समस्या ना झेलनी पड़े । विधानसभा अध्यक्ष ने नगर निगम कोटद्वार को शहर में सफाई व मार्ग पर घूम रहे आवारा पशु के लिए गौशाला सुचारू रूप से चलाई जाए । उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग को कोटद्वार चिल्लरखाल मुख्य मार्ग को जल्द से जल्द बनने के लिए कहा व भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते है उचित जगह पर ह्यूम पाइप , नालियां बनाने के लिए निर्देशित किया ।


विधानसभा अध्यक्ष ने विद्युत विभाग को बिजली कटौती पर ध्यान देने के लिए कहा और जहां हाई टेंशन लाइन जो घरों को छू रही है उन्हे उचित दूरी पर करने के लिए कहा । सिंचाई विभाग को चैनलाइज , सुरक्षा दिवस व कृषि के लिए नहरों के काम में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया ।


इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन , नगर आयुक्त कोटद्वार , अधिशासी अभियंता सिंचाई , अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग , अधिशासी अभियंता विद्युत ,जल संस्थान  आदि लोग उपास्थि रहे ।

बस्तीवासियों के लिए कानून लाने के मांग के साथ गैर कानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर शहरी विकास मन्त्री से भेंटकर हस्तक्षेप की मांग की

 



 *बस्तीवासियों के लिए कानून लाने के मांग के साथ गैर कानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर शहरी विकास मन्त्री से भेंटकर हस्तक्षेप की मांग की ।*

देहरादून 7 जून 024

आज देहरादून में हो रहा लोगों को बेघर करने का गैर कानूनी अभियान और बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए कानून लाने के मांग को लेकर आज शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल से राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से सीपीआई(एम) , कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीटू चेतना आंदोलन और इंटक  के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने शहरी विकास मंत्री से निवेदन किया कि ध्वस्तीकरण अभियान कानून के अनुसार नहीं चल रहा है और जिस दंग से अनाधिकृत अधिकारियों द्वारा नाजायज और मनमानी तरीकों से कार्यवाही की जा रही है, उस पर तुरन्त रोक लगाया जाए। उन्होंने यह भी मांग उठाया कि 2018 का कानून के प्रावधानों के अनुसार सरकार को बस्तियों का नियमितीकरण और पुनर्वास करना था, लेकिन सरकार ने इस काम को किया नहीं, जिसकी वजह से ऐसी स्थिति बन गई। तो इसलिए तुरंत अध्यादेश लाने की जरूरत है ताकि बिना पुनर्वास कर किसी को बेघर न किया जाए। दोनों बिंदुओं पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि सकारात्मक कदम उठाया जाएगा और ध्वस्तिकरण अभियान पर कदम उठाया जायेगा ताकि अभियान कानून के अनुसार ही चले। 

  प्रतिनिधि मंडल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डाक्टर एस एन सचान, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह विष्ट, सीआईटीयू के प्रान्तीय सचिव लेखराज, सिपिआई देहरादून के  सचिव अनन्त आकाश, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल और इन्टक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार शामिल रहे। मन्त्री जी ने आश्वासन दिया कि वे  कानून एवं आधार को मद्देनजर रखते हुये प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास को कहेंगे ।

पिछले एक महीने से भी अधिक समय से बस्तियों के मुद्दे पर चेतना आन्दोलन , सीआईटीयू ,एटक ,इन्टक ,सीपी एम,सपा ,एस एफ आई ,महिला समिति ,महिला मंच ,आयूपी आदि संगठनों एवं राजनीतिक दल आन्दोलित हैं ।


 ज्ञापन जो मन्त्री जी को दिया :-


सेवा में

माननीय श्री प्रेंमचन्द अग्रवाल जी

शहरी विकास मन्त्री

उत्तराखंड सरकार


बिषय :- बस्तियों को उजाड़ने से रोकने तथा किसी को बेघर न किया जाये और सभी बस्तियों के नियमितीकरण या पुनर्वास के लिये सरकार तत्काल कानून लाये ।


मान्यवर ,

जन संगठनों एवं राजनीतिक दलों द्वारा उपरोक्त सन्दर्भ में पिछले काफी दिनों से आपसे समय देने का अनुरोध किया किन्तु समय न मिलने के कारण आज आपके निवास पर प्रभावितों की अति आवश्यक समस्याओं एवं बस्तियों के नियमतीकरण के लिये तत्काल कानून लाने के लिए प्रदर्शन के माध्यम से आपको ज्ञापन देना पड़ रहा है ताकि सरकार अपने वादे के अनुसार कार्यवाही कर सके ।


मान्यवर ,हाल में देहरादून में प्रशासन /नगरनिगम /एमडीडीए अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक ध्वस्तीकरण अभियान चला रहा है।  इस अभियान में कानून के प्रावधानों और संविधान के मूल्यों का घोर उल्लंघन हो रहा है। इस संदर्भ में हम आपके संज्ञान में कुछ बिंदुओं को लाना चाह रहे हैं :--

(1)  मज़दूरों को न कोई कोठी मिलने वाला है और न ही कोई फ्लैट। 2016 में ही बस्तियों का नियमितीकरण और पुनर्वास के लिए कानून बना था। 2022 तक हर परिवार को घर मिलेगा, यह प्रधानमंत्री जी का आश्वासन था, और 2021 तक सारे बस्तियों का नियमितीकरण या पुनर्वास होगा, यह उत्तराखंड सरकार का क़ानूनी वादा था।  दोनों पर बेहद कम काम हुआ है जिसकी वजह से यह स्थिति आज बनी है। तो इस स्थिति के लिए सरकार पूरी तरह से ज़िम्मेदार है।

(2) बड़ा जन आंदोलन होने के बाद 2018 में अध्यादेश ला कर सरकार ने अध्यादेश में ही धारा लिख दिया कि तीन साल के अंदर बस्तियों का नियमितीकरण या पुनर्वास होगा। वह कानून 2024 में खत्तम होने वाला है।  लेकिन आज तक किसी भी बस्ती में मालिकाना हक़ नहीं मिला है। वह कानून खत्म होने के बाद किसी भी बस्ती को उजाड़ा जा सकता है चाहे वे कभी भी बसे।

(3) बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है, लेकिन वर्त्तमान अभियान में कानून को ताक पर रख कर मनमानी तरीकों से अनाधिकृत रुप सेअधिकारी लोगों को बेदखल कर रहे हैं।  यह क़ानूनी अपराध है।

(4) देहरादून की नदियों एवं नालियों में होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट और अनेक अन्य निजी संस्थानों द्वारा और सरकारी विभागों द्वारा भी  अतिक्रमण हुए हैं।  हरित प्राधिकरण के आदेश में कोई ज़िक्र नहीं है कि कार्यवाही सिर्फ मज़दूर बस्तियों के खिलाफ करना है, लेकिन किसी भी अन्य अतिक्रमणकारी को नोटिस तक नहीं गया है।  इसलिए  यह अभियान न केवल गैर क़ानूनी है बल्कि भेदभावपूर्ण भी है।


सरकार की लापरवाही की वजह से लोग बेघर हो जाये, इससे ज्यादा कोई जन विरोधी नीति नहीं हो सकती है। लेकिन बार बार सरकार कोर्ट के आदेशों का बहाना बना कर लोगों को उजाड़ने की कोशिश कर रही है।  आपकी सरकार आने के बाद यह तीसरी बार हो रही है।


अतः इसलिए आपसे हमारा निवेदन है कि इस गैर क़ानूनी अभियान पर तुरंत रोक लगाया जाये और सरकार अध्यादेश द्वारा तत्काल कानून बना  दे कि बिना पुनर्वास किसी को बेघर नहीं किया जायेगा।  अपने ही वादों के अनुसार सरकार युद्धस्तर पर नियमितीकरण की प्रक्रिया को शुरू कर दे और सभी परिवारों एवं मज़दूरों के लिए किफायती घरों का व्यवस्था पर काम करे।


आशा है कि आप जनहित में उपरोक्त बिन्दुओं एवं मांगों पर प्रभावि कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे ।


हम आपके सदैव आभारी रहेंगे ।


         धन्यवाद सहित


जारीकर्ता


(अनन्त आकाश)

सचिव सीपीआई (एम)देहरादून

Wednesday, June 5, 2024

यूनेस्को तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर राष्ट्रीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया

 संयुक्त राष्ट्र शैक्षिकवैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग सेनई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में सुरक्षितविश्वसनीय और नैतिक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर राष्ट्रीय हितधारक कार्यशाला आयोजित की।

भारत सरकार द्वारा हाल ही में इंडिया एआई मिशन को स्वीकृति प्रदान किए जाने के बाद यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित किया गया। इस मिशन के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैंजो भारत के आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यशाला ने राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीतियों और कार्यक्रमों में सुरक्षितविश्वसनीय और नैतिक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) विचारों को एकीकृत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिएयह सुनिश्चित करते हुए कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों का उपयोग सार्वजनिक कल्याण के साथ सम्मिलित होता है और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों का पालन करती हैएक मंच प्रदान किया।

इस कार्यशाला में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयोंराज्य सरकारोंनीति आयोग और नैसकॉम जैसे उद्योग भागीदारों के वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों ने भाग लियाजिससे दृष्टिकोणों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ। सुरक्षित और विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की अवधारणाइसके नैतिक निहितार्थ और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों के सामाजिक प्रभाव पर व्यापक बातचीत पैनल चर्चाओं के माध्यम से की गईजिसमें भारत द्वारा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक कार्यान्वयन पर विस्तृत समूह सत्रों के साथ चर्चा की गई।

इस उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूदइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री अभिषेक सिंहयूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक श्री टिम कर्टिस तथा सामाजिक और मानव विज्ञान के लिए यूनेस्को की सहायक महानिदेशक सुश्री गैब्रिएला रामोस जैसे प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस कार्यशाला में नैसकॉम की अध्यक्ष सुश्री देबजानी घोषवाधवानी सेंटर फॉर गवर्नमेंट डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रकाश कुमारयूनेस्को मुख्यालय में जैव नैतिकता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नैतिकता अनुभाग के कार्यक्रम विशेषज्ञ श्री जेम्स राइटबैंकॉक में यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय में संचार और सूचना के क्षेत्रीय सलाहकार श्री जो हिरोनकायूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय में शिक्षा के कार्यक्रम विशेषज्ञ श्री जियान शी टेंग और यूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यक्रम विशेषज्ञ सुश्री यूनसॉन्ग किम भी शामिल हुए।

अपने उद्घाटन भाषण मेंभारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा, "चूंकि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को लेकर नैतिकता और इसके सामाजिक निहितार्थों संबंधी चिंताएं हैइसलिए भारत का लक्ष्य आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है। भारत ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के विकास और उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए भारत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मिशन सहित कई पहल शुरू की हैं। वैश्विक स्तर परयूनेस्को ने दुनिया भर में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता को बढ़ावा देने में एक सराहनीय भूमिका निभाई है और यूनेस्को के सदस्य देशों से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिश का समर्थन प्राप्त करना एक उत्कृष्ट उदाहरण है।"

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री अभिषेक सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा, "जब नैतिकता शब्द के उपयोग की बात आती हैतो हम इसे एक सुरक्षित और विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के निर्माण के संदर्भ में परिभाषित करना पसंद करते हैंजिससे उपयोगकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगाजिसके परिणामस्वरूप एक ऐसा ढांचा सुनिश्चित होगा जो नवाचार को प्रोत्साहन देगा और जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से संबंधित खतरों को सीमित करेगा।"

स्वास्थ्य सेवावित्तीय सेवाओं और दूरसंचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति से प्रेरित होकरवर्ष 2025 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के लगभग 500 बिलियन डॉलर जुड़ने की संभावना है। इस दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिएइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इंडियाएआई मिशन का नेतृत्व करने का दायित्व सौंपा गया है। यह मिशन अपने प्रमुख घटकोंजैसे इंडियाएआई कंप्यूट क्षमताइंडियाएआई इनोवेशन सेंटर (आईएआईसी)इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्मइंडियाएआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिवइंडियाएआई फ्यूचरस्किल्सइंडियाएआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सुरक्षित व विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पूरे देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को और प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है।

इस कार्यशाला के व्यापक एजेंडे में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी बातोंआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक आयामआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नैतिकता में यूनेस्को की भूमिका और भारत में वर्तमान आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नीति परिदृश्यआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों और अवसरों के लिए सामूहिक रूप से समझ को बढ़ाना और तैयारी करने से जुड़े सत्र शामिल थे। इस कार्यशाला का उद्देश्य सूचित नीति विकास के लिए एक आधार स्थापित करना था जो देश भर में न्यायसंगत और टिकाऊ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस अपनाने को प्रोत्साहन देता है।

भारत में यूनेस्को के प्रतिनिधि और यूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक श्री टिम कर्टिस ने अपनी टिप्पणी में कहा, “आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में योगदान प्रदान करने की अपार क्षमता हैइससे नैतिक विकास और उपयोग सुनिश्चित करने वाले उचित ढांचे के बिना उपयोग होने पर महत्वपूर्ण नैतिक और व्यावहारिक खतरा भी पैदा हो सकता है। यूनेस्को का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस रणनीतियों व कार्यक्रमों में नैतिक विचारों को एकीकृत करने में भारत सरकार का समर्थन करना हैयह सुनिश्चित करना कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिश में उल्लिखित अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।”

भारत में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस: नीति और व्यवहार पर चर्चा में एक पैनलिस्ट के रूप मेंनैसकॉम की अध्यक्षसुश्री देबजानी घोष ने कहा, "सबसे पहलेमनुष्यों को नैतिक मानकों का पालन करने की आवश्यकता हैऔर फिर उन सिद्धांतों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस तक विस्तारित करना होगा। नैतिकता समानता और समावेश के बारे में हैहम एक सीमित प्रणाली को बर्दाश्त नहीं कर सकतेजहां केवल कुछ कंपनियां ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित करती हैं।"

'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर सिफारिशको नवंबर 2021 में सभी 193 यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया था, यह मुख्य रूप से पारदर्शिता और निष्पक्षता जैसे बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है और साथ ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रणाली की निगरानी बनाए रखने में मानवीय देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करता है।

यूनेस्को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा हैताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वैश्विक अनुशंसा के प्रमुख मूल्यों और सिद्धांतों को डेटा प्रशासनपर्यावरण और इकोसिस्टमलैंगिकशिक्षा और अनुसंधानस्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण तथा कई अन्य क्षेत्रों के संबंध में ठोस नीतिगत कार्रवाई में परिवर्तित किया जा सके

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न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...