Monday, April 6, 2026

“डिजिटल साक्षरता ही डिजिटल सुरक्षा है”

 

संपादकीय

“डिजिटल साक्षरता ही डिजिटल सुरक्षा है”

भारत तेज़ी से डिजिटल समाज की ओर अग्रसर है। सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार—हर क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों का विस्तार हुआ है। Digital India ने इस परिवर्तन को नई गति दी है। लेकिन इस तेज़ी से बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच एक बुनियादी सवाल लगातार उभर रहा है—क्या हमारे नागरिक डिजिटल रूप से साक्षर और सुरक्षित हैं?


डिजिटल विस्तार बनाम डिजिटल समझ

आज स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच पहले से कहीं अधिक व्यापक है, लेकिन डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) का स्तर उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाया है। यही असंतुलन “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों को जन्म देता है।

हाल के समय में ठग स्वयं को Central Bureau of Investigation या Enforcement Directorate का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को “डिजिटल गिरफ्तारी” का भय दिखाते हैं।

सच यह है कि भारत में गिरफ्तारी केवल
Code of Criminal Procedure (CrPC) के तहत ही संभव है। फिर भी, डिजिटल जानकारी के अभाव में लोग भय और भ्रम का शिकार हो जाते हैं।


डिजिटल गैप: असमानता की जड़

डिजिटल सुरक्षा का सवाल केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल गैप (Digital Divide) से भी गहराई से जुड़ा है।

Uttarakhand जैसे राज्यों में, विशेषकर पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में, इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपकरणों की उपलब्धता और डिजिटल कौशल की कमी स्पष्ट दिखाई देती है।

परिणामस्वरूप:

  • लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते

  • ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रह जाते हैं

  • साइबर अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं

इस प्रकार, डिजिटल गैप केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का नया रूप बनता जा रहा है।


डिजिटल साक्षरता: सुरक्षा की पहली दीवार

डिजिटल सुरक्षा का सबसे प्रभावी और टिकाऊ समाधान है—डिजिटल साक्षरता

डिजिटल साक्षरता का अर्थ केवल मोबाइल चलाना नहीं, बल्कि:

  • ऑनलाइन जोखिमों की पहचान करना

  • फर्जी कॉल और संदेशों से बचना

  • डेटा और गोपनीयता की सुरक्षा करना

  • डिजिटल अधिकारों और कानूनों की जानकारी रखना

जब नागरिक जागरूक होंगे, तभी वे ठगी और धोखे से स्वयं को बचा पाएंगे।


नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता

डिजिटल साक्षरता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए संगठित और संस्थागत प्रयास आवश्यक हैं:

  1. स्कूल स्तर पर डिजिटल शिक्षा अनिवार्य हो

  2. ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं

  3. साइबर अपराधों के प्रति नियमित जन-जागरूकता अभियान हो

  4. प्रत्येक जिले में प्रभावी साइबर हेल्प सेंटर स्थापित किए जाएं


मीडिया और समाज की भूमिका

मीडिया, विशेषकर स्थानीय पत्रकारिता, इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • साइबर ठगी के मामलों को उजागर करना

  • लोगों को जागरूक करना

  • प्रशासन को जवाबदेह बनाना

साथ ही, नागरिक समाज और सामाजिक संगठनों को भी इस विषय को जन-आंदोलन का रूप देना होगा।


निष्कर्ष

डिजिटल भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक न केवल डिजिटल रूप से जुड़ा हो, बल्कि सुरक्षित और सशक्त भी हो

यदि डिजिटल साक्षरता को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो तकनीक विकास का साधन कम और शोषण का माध्यम अधिक बन सकती है।

इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि—

“डिजिटल साक्षरता ही डिजिटल सुरक्षा है”

और यही डिजिटल युग में सशक्त नागरिक और सुरक्षित समाज की सबसे मजबूत नींव है।

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