Sunday, April 5, 2026

उत्तराखंड का आंचलिक सिनेमा: कैमरे चमक रहे हैं, कलाकार अंधेरे में

 

 

उत्तराखंड का आंचलिक सिनेमा: कैमरे चमक रहे हैं, कलाकार अंधेरे में

उत्तराखंड आज फिल्म शूटिंग का हॉटस्पॉट है। बर्फ़ से ढके पहाड़, शांत घाटियाँ और सरकार की सब्सिडीसब कुछ मौजूद है। लेकिन सवाल यह है कि
जिस धरती की तस्वीरों पर सिनेमा पल रहा है, उसी धरती के कलाकार, तकनीशियन और संगीतकार आज भी हाशिये पर क्यों हैं?

यह विडंबना नहीं, नीतिगत असफलता है।

फिल्म नीति: उद्योग के नाम पर पर्यटन योजना

राज्य की फिल्म नीति का ढोल ज़ोर-शोर से पीटा गया। कहा गया

  • रोज़गार मिलेगा
  • स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे
  • आंचलिक सिनेमा मजबूत होगा

हकीकत यह है कि यह नीति आंचलिक सिनेमा नहीं, बाहरी प्रोडक्शन को आकर्षित करने की योजना बनकर रह गई।

बड़े बैनर आए, शूटिंग हुई, होटल भरे, टैक्स छूट मिली
लेकिन स्थानीय फिल्म निर्माता आज भी फंड के लिए दर-दर भटक रहा है।

मेकर्स: सपनों के साथ कर्ज़ में डूबे

गढ़वाली-कुमाऊँनी सिनेमा के निर्माता आज भी

  • निजी कर्ज़
  • सीमित दर्शक
  • और सरकारी फाइलों की भूलभुलैया
    के बीच फंसे हैं।

सब्सिडी की शर्तें इतनी जटिल हैं कि छोटा निर्माता शुरुआत में ही बाहर हो जाता है
यह नीति बड़े बजट के लिए है, लोक-सिनेमा के लिए नहीं।

कलाकार: चेहरा पहाड़ी, मेहनताना मैदानी

उत्तराखंड के कलाकारों को बड़े प्रोजेक्ट्स में

  • भीड़ का हिस्सा बनाया जाता है
  • संवाद कम, पहचान शून्य

आंचलिक फिल्मों में मेहनताना इतना कम है कि अभिनय आज भी शौकबना हुआ है, पेशा नहीं।
जिस राज्य में कलाकार पेट नहीं पाल सकता, वहाँ सिनेमा कैसे फलेगा?

तकनीशियन: प्रतिभा है, प्लेटफॉर्म नहीं

कैमरा, साउंड, एडिटिंगहर क्षेत्र में उत्तराखंड के युवा हैं,
लेकिन राज्य में

  • न फिल्म स्कूल
  • न प्रशिक्षण संस्थान
  • न स्थायी स्टूडियो

नतीजाप्रतिभा पहाड़ में जन्म लेती है,
लेकिन रोज़गार के लिए मैदानी शहरों में खप जाती है।

लोक संगीत: इस्तेमाल बहुत, सम्मान शून्य

फिल्मों और विज्ञापनों में लोकधुनें बज रही हैं,
लेकिन असली लोक कलाकार

  • न रॉयल्टी पाते हैं
  • न पहचान
  • न मंच

लोक संगीत को सजावट बना दिया गया है,
संस्कृति को उद्योग नहीं, सामग्री समझा जा रहा है।

सरकार से सवाल

  • क्या उत्तराखंड की फिल्म नीति सिर्फ़ लोकेशन बेचने के लिए है?
  • क्या गढ़वाली-कुमाऊँनी सिनेमा सिर्फ़ लोक कार्यक्रमभर है?
  • क्या स्थानीय कलाकार नीति के केंद्र में कभी आएँगे?

अगर जवाब नहींहै,
तो यह नीति सिनेमा नीति नहीं, इवेंट मैनेजमेंट दस्तावेज़ है।

 

अब भी समय है

उत्तराखंड को शूटिंग स्टेट नहीं, सृजन राज्य बनाना होगा।

 

  • आंचलिक फिल्मों के लिए अलग कोष
  • फिल्म डेवलपमेंट बोर्ड लेटेस्ट कैमरा और टेक्निकल इक्विपमेंट खरीद कर प्रोदुसर्स को कम रेंटल पर दे सकती है,साथ मैं पोस्ट प्रोडक्शन स्टूडियो एस्ताब्लिशेद करे
  • स्थानीय कलाकार व तकनीशियन की अनिवार्य भागीदारी
  • फिल्म स्कूल और लोक-संगीत अकादमी
  • आंचलिक फिल्मों के लिए ओटीटी और सिनेमाघर समर्थन
  • फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सभी कामगारों की डायरेक्टरी

वरना पहाड़ पर कैमरे चलते रहेंगे,
और पहाड़ का सिनेमा
हमेशा संघर्ष की रील में कैद रहेगा।

 

 

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