


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज पृथ्वी भवन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित दो जियोपोर्टल, ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड के लिए ‘भुवन पंचायत (संस्करण 4.0)’ पोर्टल और “आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0)” लॉन्च किए।
ये नवीनतम भू-स्थानिक उपकरण पूरे देश में विभिन्न स्थानों के लिए 1:10K स्केल की उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली उपग्रह इमेजरी प्रदान करने के लिए विज़ुअलाइज़ेशन और योजना बनाने के लिए हैं।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "इन पोर्टलों का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से पिछले एक दशक में शुरू किए गए सुधारों की अगली कड़ी है।" 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पदभार संभालने के तुरंत बाद शुरू हुई यात्रा को याद करते हुए, 2015-16 की शुरुआत में बुनियादी ढांचे के विकास, नियोजन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, कृषि विकास के लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श सत्र में चर्चा की गई।
मंत्री महोदय ने जियोपोर्टल्स के लॉन्च पर इसरो की टीम को बधाई देते हुए कहा, "हमने न केवल रॉकेट लॉन्च किए हैं और आकाश तक पहुंचे हैं, बल्कि हम आकाश से पृथ्वी का मैपिंग भी कर रहे हैं।" विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा, "अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी वस्तुतः हर घर में प्रवेश कर चुकी है। हमने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के हमारे संस्थापक श्री विक्रम साराभाई के दृष्टिकोण को सही मायने में आगे बढ़ाया है, जो मानते थे कि अंतरिक्ष में विकास का आम नागरिकों के जीवन पर बहुआयामी प्रभाव पड़ेगा, चाहे वह टेलीमेडिसिन हो, डिजिटल इंडिया हो, मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग की पहचान हो।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता विभिन्न सेवाओं को एकीकृत करना और आम नागरिकों को इसका लाभ उठाने की सुविधा देना है। उन्होंने उल्लेख किया कि मोदी सरकार के तहत पिछले कुछ वर्षों में नीतिगत निर्णयों के परिणामस्वरूप अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव 2022 में एक स्टार्टअप से 2024 में 200 से अधिक स्टार्टअप तक हो सकता है। डॉ. सिंह ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह सरकार ही थी जिसने चंद्रयान के प्रक्षेपण के दौरान श्रीहरिकोटा के द्वार आम जनता के लिए खोले ताकि वे आकर अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता को देख सकें। उन्होंने यह भी साझा किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में लगभग 1000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आया है।
“विकेंद्रीकृत नियोजन के लिए स्थान आधारित सूचना समर्थन (एसआईएसडीपी)” का समर्थन करने और पंचायतों में जमीनी स्तर पर नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए ‘भुवन पंचायत पोर्टल’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि यह जमीनी स्तर पर नागरिकों को सशक्त बनाने और उन्हें इन सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति देने, भूमि रिकॉर्ड के लिए स्थानीय प्रशासन पर निर्भरता को कम करके जीवन को आसान बनाने और डिजिटलीकरण और भूमि राजस्व प्रबंधन द्वारा भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाने के हमारे प्रयासों को जारी रखता है। ये उपकरण नागरिकों के सुझावों पर वास्तविक समय डेटा प्रदान करेंगे और जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को कम करेंगे।
आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0) के लाभों पर बोलते हुए, जो प्राकृतिक आपदाओं पर अंतरिक्ष-आधारित इनपुट प्रदान करेगा और भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में आपदा जोखिम को कम करने में सहायता करेगा। नागरिकों को प्रकृति की अनिश्चितताओं से बचाने और एक प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए ताकि प्रशासन सक्रिय रूप से आपदाओं को रोक सके और हमें भूमि उपयोग भूमि परिवर्तन (एलयूएलसी) के बारे में सूचित कर सके।

उन्होंने यह भी बताया कि स्थिति की निरंतर निगरानी करने और मूल्यवान इनपुट प्रदान करने के लिए एक कमांड सेंटर स्थापित किया गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये पोर्टल बहुत उपयोगी साबित होंगे क्योंकि स्वामित्व पोर्टल भूमि रिकॉर्ड और भूमि राजस्व प्रबंधन के मामले में कई देशों के लिए रोल मॉडल के रूप में कार्य करता है।
इसरो के अध्यक्ष श्री एस सोमनाथ, अंतरिक्ष विभाग के सचिव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति उनके निरंतर मार्गदर्शन और नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज; पृथ्वी विज्ञान के सचिव श्री रवि चंद्रन; गृह मंत्रालय के अपर सचिव श्री एस के जिंदल; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राजेश एस.; जीएसआई खनन मंत्रालय के उपमहानिदेशक मनीष के, और एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान भी शुभारंभ समारोह में उपस्थित थे।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) ने 14 मार्च, 2024 को दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम, 2024 जारी किए, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो जाएँगे।
इन संशोधन विनियमों का उद्देश्य बेईमान तत्वों द्वारा धोखाधड़ी वाले सिम स्वैप/प्रतिस्थापन के माध्यम से मोबाइल नंबरों की पोर्टिंग पर अंकुश लगाना है। इन संशोधन विनियमों के माध्यम से, एक विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के आवंटन के अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए एक अतिरिक्त मानदंड प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से, यदि सिम स्वैप/प्रतिस्थापन की तारीख से सात दिनों की समाप्ति से पहले विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के लिए अनुरोध किया गया है, तो विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) आवंटित नहीं किया जाएगा।
किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए श्री अखिलेश कुमार त्रिवेदी, सलाहकार (नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग), भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) से टेलीफोन नंबर +91-11-20907758 पर संपर्क किया जा सकता है।

ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 10वीं बैठक 28 जून, 2024 को रूसी संघ की अध्यक्षता में हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की गई थी और इसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने वर्चुअल रूप से भाग लिया था। पांच नए सदस्यों, यानी मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शामिल होने के बाद यह ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की पहली बैठक थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब एक व्यापक और बड़ा ब्रिक्स पर्यावरण चुनौतियों से निपटने के लिए एजेंडा, प्राथमिकताएं और आगे का रास्ता तय कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के तहत पहल संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और उसकी एजेंसियों के सिद्धांतों और लक्ष्यों द्वारा दृढ़ता से निर्देशित हैं और ब्रिक्स देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपलब्ध कार्बन स्पेस का उपयोग विकासशील देशों द्वारा किया जाए।

श्री यादव ने वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में टिकाऊ जीवन शैली के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से छठी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में अपनाए गए टिकाऊ जीवन शैली पर प्रस्ताव के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

श्री यादव ने बल देकर कहा कि विकासशील देशों को समान अवसर की आवश्यकता है और उन्होंने विकसित देशों से कार्यान्वयन, जिसमें यूएनएफसीसीसी सीओपी और सीबीडी सीओपी में वादा किए गए वित्त शामिल हैं, के साधनों के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने की अपील की। श्री यादव ने आगाह किया कि जलवायु वित्त को निवेश के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा की गई ठोस कार्रवाइयों को रेखांकित किया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से विश्व पर्यावरण दिवस, 2024 पर हमारे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए एक पेड़ मां के नाम अभियान में शामिल होने और भारत द्वारा संचालित वैश्विक पहलों जैसे मिशन लाइफ, आईबीसीए, सीडीआरआई, लीडआईटी, ग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिव, आरई एंड सीई-आईसी और जीआईआर-जीआईपी का भी समर्थन करने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और सहभागिता को मजबूत करने और उसे व्यापक बनाने, बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग जारी रखने की आवश्यकता रेखांकित की तथा समानता और सीबीडीआर-आरसी के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एक साथ खड़े होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बैठक में 28 जून, 2024 को रूस के निज़नी नोवगोरोड में आयोजित 10वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का वक्तव्य भी अपनाया गया।
देहरादून 27 जून 024,
राज्य सचिवालय पर विभिन्न मजदूर संगठनों , राजनैतिक एवं सामाजिक जिनमें सीटू ,सीपीएम,चेतना आन्दोलन ,एटक,सपा, ,सीपीआई,किसान सभा,महिला समिति ,भीम आर्मी ,महिला मंच, सर्वोदय मण्डल ,एस एफ आई ,उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी ,बसपा ,बीजीवीएस से जुड़े सैकड़ो कार्यकर्ता शामिल थे । आन्दोलन को कांग्रेस ने अपना समर्थन दिया । इस विशाल प्रदर्शन के माध्यम से जनसंगठन एवं राजनैतिक दलों के वक्ताओं ने कहा सरकार ने वायदा किया था कि व पंचायत ,चाय बगानों तथा बस्तियों में बसी आबादी को मालिकाना हक देगी जिसके लिये सरकार ने बर्ष 2016 में जन आन्दोलन के बाद 2018 में बस्तियों की सुरक्षा के लिए कानून लाई जो कि अक्टूबर 2024 तक प्रभावी है,बावजूद अनेक बहाना बनाकर सरकार बस्तियों को उजाड़ने के लिए आमदा है । वक्ताओं ने कहा है कि हाल में चूना भट्टा ,दीपनगर ,बारीघाट तथा काठबंगला इसका ज्वलंत उदाहरण हैं, जहाँ सैकड़ों गरीबों को बिना पुनर्वास एवं मुआवजा दिये बेघरबार किया गया जबकि अभियान में रिस्पना के इर्दगिर्द बड़े लोगों ,सरकारी कब्जों को छोड़ा गया ।
वक्ताओं ने कहा है कि सरकार की प्रस्तावित एलिवेटेड रोड़ जिसे रिस्पना तथा बिन्दाल से गुजरना है आने वाले दिनों में हजारों हजार परिवारों के बेघरबार होने का कारण बनेगी। इस योजना में पिछले 40 से पुरानी बसी आबादी को अतिक्रमणकारी कहा गया ,इसका सीधा मतलब है कि भाजपा सरकार सीधेतौर पर प्रभावितों के पुर्नवास एवं मुआवजा की जिम्मेदारी से बच रही है ।
वक्ताओं ने कहा है किश्र राज्य के प्रगतिशील वामपंथी राजनैतिक एवं सामाजिक संगठन पिछले लम्बे समय से इन तमाम मुद्दों पर आन्दोलित हैं तथा प्रभावितोंं से हजारों हजार हस्ताक्षर करवाकर आपको भेज चुके हैं,अभी भी हजारों हस्ताक्षर मौजूद हैं ।
प्रमुख मांगें :-
(1)सरकार सभी गैर क़ानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर तुरन्त रोक लगाये - कोई भी बेदखली की प्रक्रिया कानून के अनुसार हो ।
(2) तमाम गरीब व भूमिहीन लोगों की पुनर्वास की ब्यवस्था करने के बाद ही यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित स्थान से विस्थापित किया जाये। देश की आजादी के बाद हर देशवासी को, आवास ,शिक्षा व रोजगार पाने का हक है, और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का काम अपने दायित्वों का निर्वहन कर इसे पूरा करने का है।
(3)जिन परिवारों के घरों को बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए तोड़े गए हैं, उनको मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाये और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये। काठबंगला में अभियान के दौरान मृतका सोनम गब्बर सिंह बस्ती रिस्पना कै परिजनों को समुचित मुआवजा दिया जाऐ -।
(4)हाल के बर्षो में ग्राम पंचायत स नगरनिगम में जुड़े लोंगों कै नोटिस निरस्त हों ।
(5) सरकार अपने वायदे के अनुरूप सभी बस्तियों कै मालिकाना हक कै लिऐ कानून बनाये ।
(6) एलिवेटेड रोड़ की आढ़ में गरीबों को उजाड़ने की साजिश बन्द करो ।इस योजना में पुर्नवास एवं मुआवजे का प्रावधान हो ।
(7) रेहड़ी , पटरी ,फैरी ,फुटपाथ व्यवसायियों का सभी प्रकार का उत्पीड़न रोको तथा वैन्डरजोन बनने तक इन्हें यथावत रोजगार करने दिया ।
(8)राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के 13.05.2024 के आदेश (पैराग्राफ 20) के अनुसार नगर आयुक्त देहरादून ने प्राधिकरण के समक्ष बेदखली को कानून के अनुसार कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। लेकिन बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए लोगों को बेदखल किया जा रहा है। अनधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है। प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।
(8) इस अभियान के दौरान कुछ लोग जो निश्चित रूप से 2016 से पहले रह रहे थे, उनकी सम्पतियों को भी नुक्सान पहुंचना ।सरकार सभी गैर क़ानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर तुरन्त रोक लगाये - कोई भी बेदखली की प्रक्रिया कानून के अनुसार हो ।
(2) तमाम गरीब व भूमिहीन लोगों की पुनर्वास की ब्यवस्था करने के बाद ही यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित स्थान से विस्थापित किया जाये। देश की आजादी के बाद हर देशवासी को, आवास ,शिक्षा व रोजगार पाने का हक है, और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का काम अपने दायित्वों का निर्वहन कर इसे पूरा करने का है।
(3)जिन परिवारों के घरों को बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए तोड़े गए हैं, उनको मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाये और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये। काठबंगला में अभियान के दौरान मृतका सोनम गब्बर सिंह बस्ती रिस्पना कै परिजनों को समुचित मुआवजा दिया जाऐ -।
(4)हाल के बर्षो में ग्राम पंचायत स नगरनिगम में जुड़े लोंगों कै नोटिस निरस्त हों ।
(5) सरकार अपने वायदे के अनुरूप सभी बस्तियों कै मालिकाना हक कै लिऐ कानून बनाये ।
(6) एलिवेटेड रोड़ की आढ़ में गरीबों को उजाड़ने की साजिश बन्द करो ।इस योजना में पुर्नवास एवं मुआवजे का प्रावधान हो ।
(7) रेहड़ी , पटरी ,फैरी ,फुटपाथ व्यवसायियों का सभी प्रकार का उत्पीड़न रोको तथा वैन्डरजोन बनने तक इन्हें यथावत रोजगार करने दिया ।
(8)राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के 13.05.2024 के आदेश (पैराग्राफ 20) के अनुसार नगर आयुक्त देहरादून ने प्राधिकरण के समक्ष बेदखली को कानून के अनुसार कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। लेकिन बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए लोगों को बेदखल किया जा रहा है। अनधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है। प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।
(8) इस अभियान के दौरान कुछ लोग जो निश्चित रूप से 2016 से पहले रह रहे थे, उनकी सम्पतियों को भी नुक्सान पहुंचाना कानून कै खिलाफ है ।बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है, जो उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रेमिसेस (एविक्शन ऑफ़ अनअथॉराइज़्ड ऑक्यूपेशन) अधिनियम में अंकित है। लेकिन इस कानून को ताक पर रखा गया है।
(10) इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण का आदेश केवल मामले से सम्बन्धित पक्षकारों पर ही लागू होता है और ऐसे लोगों को मनमाने तरीके से उजाडा जा रहा है, जो इस मामले में पक्षकार नहीं हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का प्राधिकरण में कोई मौका ही नहीं दिया गया है।
(11) बिना क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाये किसी की सम्पति को नुक़सान पहुँचाना क़ानूनी अपराध है। प्रभावित लोगों में से कई परिवार हैं जो अनुसूचित जाति के हैं और उनको गैर क़ानूनी तरीकों से बेदखल करना SC / ST (Prevention of Atrocities) Act के अंतर्गत भी अपराध है।
(12) हमारे संविधान के अनुसार आश्रय का अधिकार मौलिक अधिकार है। उच्चतम न्यायलय के अनेक फैसलों में इस सिद्धांत को दोहराया गया है (Olga Tellis & Ors v. Bombay Municipal Cor-poration, 1986 AIR 180, 1985 SCR Supl. (2) 51 (1985) , Shantistar Builders v. Narayan Khimalal Totame, AIR 1990 SC 630 (1990) , इत्यादि)। इसलिए बिना पुनर्वास की व्यवस्था कर मज़दूर परिवारों को बेघर करना संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है।
(13) देहरादून की नदियों एवं नालियों में होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट और अनेक अन्य निजी संस्थानों द्वारा और सरकारी विभागों द्वारा भी अतिक्रमण हुए हैं। हरित प्राधिकरण के आदेश में कोई ज़िक्र नहीं है कि कार्यवाही सिर्फ मज़दूर बस्तियों के खिलाफ करना है, लेकिन किसी भी अन्य अतिक्रमणकारी को नोटिस तक नहीं गया है। इसलिए यह अभियान न केवल गैर क़ानूनी है बल्कि भेदभावपूर्ण भी है।
(14) गांधी पार्क कै निजीकरण कै फैसले को वापस लिया जाये ।
(15) चन्द्र शेखर आजाद नगर (भट्टा) भूमि का अवैध स्थानान्तरण रोका जाऐ तथा भूमि कब्जेदार कै नाम किया जाऐ ।
(16) उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों का चिन्हित किया जाये ।
(17) रेहड़ी पटरी फुटपाथ व्यवसायियों के लिऐ वैन्डरजोन घोषित किया जाये तथा पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाओ ।
(18) भवन एवं अन्य सनिर्माण श्रमिकों की योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर रोक लगाओ |
(19) आंगनबाड़ी ,भोजनमाताओं,आशाओं ,ई रिक्शा की समस्याओं का समाधान हो ।
ज्ञापन सचिवालय के समक्ष मुख्यमंत्री एवं मुख्यसचिव के नाम नगर मजिस्ट्रेट श्री प्रत्युषसिंह को दिया ।
इस अवसर पर संचालन सीटू महामंत्री लेखराज ने किया । इस अवसर पर कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दशोनी ,सीपीआई के समर भण्डारी ,सपा के राष्ट्रीय महासचिव एस एन सचान,सीपीएम नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण ,किसान सभा महामंत्री गंगा धर नौटियाल , चेतना आन्दोलन के शंकर गोपाल , महिला समिति की इंदु नौढियाल , एटक के प्रांतीय महामन्त्री अशोक शर्मा , रास्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के नवनीत गुसाई , आंदोलनकारी परिषद के चिन्तन सकलानी , सर्वोदय मण्डल के हरबीर कुशवाहा ,भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार ,उपाध्यक्ष उमेंश कुमार, आजम खान, बसपा के दिग्विजय सिंह ,पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली ,कर्मचारी नेता एस एस नेगी ,बस्ती बचाओ आन्दोलन के संयोजक नरेंद्र सिंह ,सीपीएम जिला सचिव राजेन्द्र पुरोहित ,देहरादून सचिव अनन्त आकाश ,अध्यक्ष किशन गुनियाल ,माला गुरूंग, प्रेमा , किरन ,बिरजू, रघुवीर ,विनोद बडोनी , सुनीता पप्पू ,अशोक कुमार,संजय ,देवेन्द्र ,अनवर , भगवन्तं पयाल ,रामसिंह भण्डारी ,हरीश कुमार , नुरेशा अंसारी , शबनम ,सुरेशी नेगी ,जानकी भट्ट ,आंगनवाडी से सुनीता , लक्ष्मी पन्त रजनी गुलेरिया , इन्द्रैश नौटियाल ,शैलेन्द्र परमार ,एजाज ,सुधा देवली , गुरुप्रसाद , मामचंद ,शम्भु मंगाई , याकूब आली,अभिषेक भंडारी , पंकज कुमार , गगन गर्ग , प्रभा देवी , ओमवती , ईश्वरी देवी , आदी बड़ी संख्या में लोग शामिल थे ।
समापन किसान सभा के महामंत्री कमरूद्दीन ने की ।
प्रदर्शन गांधी पार्क से शुरू होकर घण्टाघर राजपुर रोड़ परेड ग्राउण्ड से होता हुआ सचिवालय पहुँचा व प्रदर्शनकारी वही सड़क पर बैठ गए व सभा की ।
जारीकर्ता
अनन्त आकाश
सचिव सीपीआई(एम)
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से भेंट
इस दौरान मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके लिए वन विभाग की 87.0815 हे0 भूमि का हस्तान्तरण किया जाना है। उन्होंने कहा कि जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण हेतु जौलीग्रान्ट के आस-पास के क्षेत्रों की कुल 96.2182 हे० भूमि में से 87.0815 हे0 भूमि वन विभाग की भी अधिग्रहण की जानी है।
उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में मा० उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार/वन विभाग के पक्ष में निर्णय पारित किया जा चुका है। मा० न्यायालय के उक्त निर्णय के उपरान्त जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट के विस्तारण हेतु वन विभाग की उक्त 87.0815 हे० भूमि नागरिक विभाग को हस्तान्तरण करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट से काठमाण्डू (नेपाल) के लिए वायुयान सेवा संचालित किए जाने के लिए निविदा की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। जिसके दृष्टिगत जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट को अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का दर्जा देने की कार्यवाही को गति देने की नितान्त आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड के विशिष्ठ भौगोलिक, सामरिक महत्व तथा पर्वतीय क्षेत्र में आम जनमानस को मूलभूत सुविधा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से भारत सरकार के उपक्रमों द्वारा कराए जा रहे गैर वानिकी परियोजना हेतु पूर्व की भांति राज्य में उपलब्ध ‘अधिसूचित अवनत वन भूमि’ में क्षतिपूरक वृक्षारोपण कराए जाने तथा इन सभी प्रयोजन के लिए गतिमान वन भूमि हस्तान्तरण प्रस्तावों पर अनुमोदन प्रदान किया जाए।
इस दौरान ने मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री से जनपद रुद्रप्रयाग के विधानसभा क्षेत्र केदारनाथ के अंतर्गत चोपता (तल्लानागपुर) में राजकीय पॉलीटेक्निक चोपता की स्थापना हेतु पूर्व में राजस्व ग्राम कुंडा दानकोट में चयनित 2 हेक्टेयर वन भूमि को हस्तांतरण करने का अनुरोध किया।

आज एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई), भारतीय सेना और सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटी वाई) के अंतर्गत एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला ने ‘भारतीय सेना के लिए भविष्य में वायरलेस प्रौद्योगिकियों’ में सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर कमांडेंट एमसीटीई एवं कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल लेफ्टिनेंट जनरल के. एच. गवास, और सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) के महानिदेशक, डॉ. पी. एच. राव, ने हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम का आयोजन एमईआईटी वाई के समूह समन्वयक, श्री एस. के. मारवाह, एवीएसएम, वीएसएम, सेना डिजाइन ब्यूरो, भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल सी. एस. मान की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जो देश की रक्षा और प्रौद्योगिकीय छवि के लिए इस रणनीतिक पहल के महत्व को दर्शाता है।
यह पहल भारतीय सेना की प्रौद्योगिकीय क्षमताओं को बल प्रदान करने में एक प्रभावशाली मील का पत्थर है, जो सेना प्रमुख द्वारा वर्ष 2024 को ‘भारतीय सेना के लिए प्रौद्योगिकी अवशोषण का वर्ष’ के रूप में घोषित दृष्टिकोण के अनुरूप है।
आज किये गये समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से इस सहयोग को फिर से मजबूती से स्थापित होने की आशा है। साथ ही एमसीटीई में एक ‘उन्नत सैन्य अनुसंधान और ऊष्मायन केंद्र’ की स्थापना की योजना है। इस केंद्र का उद्देश्य भारतीय सेना के लिए उन्नत वायरलेस प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना है।
एसएएमईईआर और एमसीटीई के बीच साझेदारी एक समझौते से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और आधुनिक युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करते हुए नई तकनीकी सीमाओं की खोज में एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती है। वायरलेस प्रौद्योगिकियों में एसएएमईईआर की विशेषज्ञता और संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर संचालन में एमसीटीई के कौशल के साथ, यह सहयोग रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगतिकरण को दर्शाता है।
इस साझेदारी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
एसएएमईईआई और एमसीटीई के बीच सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी अवसंरचना को मजबूती प्रदान करना है, जिसके संभावित लाभ केवल सैन्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि इनका प्रभाव दूरगामी होगा। यह प्रगतिकरण दूरसंचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर एसएएमईईआई और एमसीटीई के बीच साझेदारी में एक महत्वपूर्ण समयकाल को चिह्नित करता है, जो नवाचार और सहयोगी सफलता से परिपूर्ण भविष्य का संकेत है। यह रणनीतिक गठबंधन सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक निकायों के बीच सहयोग के लिए नए मानक स्थापित करने के लिए पूर्णरूप से तैयार है, जो प्रौद्योगिकी के प्रगतिपथ की ओर अग्रसर होगी।
समझौता ज्ञापन के लिये आयोजित हस्ताक्षर समारोह के दौरान, एवीएसएम, वीएसएम, अतिरिक्त महानिदेशक, आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो मेजर जनरल सी. एस. मान ने विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के अवशोषण पर भारतीय सेना के विजन के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने सैन्य अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न उभरती हुई प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के विकास हेतु एक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए किये गये कार्यों के बारे में जानकारी दी।
एमईआईटी वाई के समूह समन्वयक श्री एस. के. मारवाहा, ने रक्षा और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए एमईआईटी वाई की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रणनीतिक और रक्षा क्षेत्रों में एसएएमईईआर और सीडीएसी के योगदान के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
एसएएमईईआर की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले डॉ. पी. एच. राव ने रक्षा क्षेत्र में एसएएमईईआर के कार्य के योगदान की झलकियाँ प्रस्तुत की और साथ ही भारतीय सेना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तैनाती योग्य समाधान विकसित करने हेतु समझौता ज्ञापन के लिए महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के बारे भी बताया।
पीवीएसएम, वीएसएम, कमांडेंट एमसीटीई और कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल्स लेफ्टिनेंट जनरल के. एच. गवास, ने एमओयू के महत्व और एमसीटीई की एमओयू से अपेक्षाओं को प्रस्तुत किया, ताकि सामरिक युद्ध क्षेत्र में फील्ड डिप्लॉयेबल समाधान विकसित किए जा सकें, जो एमसीटीई, एसएएमईईआर, शिक्षाविदों, उद्योग, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के सहयोगात्मक प्रयासों से प्राप्त हुआ है, जो पूरे देश के दृष्टिकोण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक मंच पर एकत्रित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी अभूतपूर्व उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी और सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक नये मानक स्थापित करेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राष्ट्रीय पहल में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करेगी।


✍️ संपादकीय विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा केवल कानू...