Tuesday, July 16, 2024

उत्तर प्रदेश में सितंबर से शुरू होगी 21 वीं पशुगणना, अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू

 



2019 की पशु गणना के अनुसार प्रदेश में 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी है

पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्य और जिला नोडल अधिकारियों को सॉफ्टवेयर और नस्लों के बारे में अवगत कराने के लिए 21वीं पशुधन-गणना का क्षेत्रीय प्रशिक्षण आयोजित किया

प्रशिक्षण के दौरान नस्ल की सटीक पहचान के महत्व पर बल दिया गया


आज दिनांक 16 जुलाई को प० दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान (SIRD) बक्शी का तालाब, लखनऊ में 21 वीं पशुगणना की तैयारी अंतर्गत देश के तीन राज्यों यथा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश एवं उत्तराखंड के राज्य / जनपदीय नोडल ऑफिसर्स को संयुक्त रूप से प्रशिक्षण प्रदान कर मास्टर्स ट्रेनर तैयार किया जाने हेतु इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के कुल 175 पशुचिकित्साविदों, संख्याधिकारियों, नोडल अधिकारियों द्वारा भारत सरकार, मत्स्य, पशुपालन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया। उक्त कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री, मा० धर्मपाल सिंह जी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि पशुगणना के उपरान्त प्राप्त आकडों के विश्लेषण एवं तार्किक उपयोग से भविष्य की योजनाओं विभागीय नीतियों को बनाने एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में एवं पशुपालकों के हित में नई योजनाओ तथा पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूरे देश का सर्वाधिक पशुधन है। 2019 की पशु गणना के अनुसार प्रदेश में 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी एवं 4.09 लाख सूकर है। देश मे प्रत्येक 5 वर्ष के उपरान्त पशुगणना किये जाने है। वर्तमान में 21वीं पशुगणना की तैयारी चल रही है।

उक्त अवसर पर श्री रविन्द्र, प्रमुख सचिव, पशुधन, उ०प्र० शासन, श्री देवेन्द्र पाण्डेय, विशेष सचिव, उ०प्र० शासन, श्री जगत हजारिका, सलाहकार (साख्यकीय) भारत सरकार, श्री वी०पी० सिंह, निदेशक, पशुपालन साख्यकीय, भारत सरकार, डा० आर०एन० सिंह, निदेशक प्रशासन एवं विकास तथा डा० पी०एन० सिंह, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र, उ०प्र० एवं तीन प्रदेशों के प्रतिभागी उपस्थित थे। निदेशक प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग द्वारा अपने स्वागत भाषण में समस्त उपस्थित गणमान्यों का स्वगत करते हुए प्रतिभागियों का भी स्वागत किया गया। उनके द्वारा प्रतिभागियों से इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति संवेदनशील मानते हुए सही रूप में जानकारी प्राप्त कर पशुधन की गणना का आह्वान किया गया ताकि सही आंकड़ों पर भविष्य की योजनाओं के सृजन में सहयोग मिल सके। भारत सरकार से आये अधिकारियों द्वारा पशुगणना प्रत्येक पाँच वर्षों के अन्तराल पर की जाती है। पशुगणना में प्रत्येक घर, उद्यम एवं संस्थानों में पशुओं की प्रजाति वार गणना की जाती है। देश में प्रथमवार पशुगणना वर्ष 1919 में की गयी। इस कड़ी में अब तक कुल 20 पशुगणनायें आयोजित की जा चुकी है। 20वीं पशुगणना वर्ष 2019 में आयोजित की गयी। उक्त पशुगणना में प्रथमबार टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन की गयी जिसमें गणनकर्ताओं द्वारा भारत सरकार द्वारा विकसित किये गये ऐप पर पशुओं की गणना की गयी, आंकड़े सीधे भारत सरकार के सर्वर पर अपलोड हुए थे। प्रमुख सचिव, पशुधन द्वारा अवगत कराया गया कि 20वीं पशुगणना की भांति इस बार भी पशुगणना NDLM (National Digital Livestock Mission) द्वरा विकसित एंड्राइड एप पर कराई जानी है, जिसके अंतर्गत NBAGR (National Bureau of Animal Genetic Resources) द्वारा पंजीकृत Breed के अनुसार नस्लवार पशुगणना की जाएगी।

भारत सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पूर्ण देश में एक साथ माह सितम्बर से दिसंबर 2024 के मध्य पशुगणना का कार्य किया जाना है। 21वीं पशुगणनासे प्राप्त होने वाले विस्तृत एवं विश्वास परक आंकड़े की नीव पर नीति निर्धारण से आने वाले समय में पशुपालन विभाग प्रगति के नए आयाम को प्राप्त करेगा। 21 वी पशुगणना हेतु भारत सरकार द्वारा पाँच राज्यों कर्नाटक, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, गुजरात व अरूणाचल प्रदेश को पायलट सर्वे हेतु चयनित किया गया है। मुख्य अतिथि द्वारा अपने संबोधन में पशुपालन को अजिविका का मुख्य स्त्रोत मानते हुए गुणवत्तायुक्त पशुधन उत्पादों की चर्चा के साथ वास्तविक पशुधन के आंकड़ों पर बल दिया गया। पशुधन विकास के चार प्रमुख आयाम उन्नत पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य, पशु प्रबन्धन एवं पशु पोषण के क्षेत्र में समग्र प्रयास पशुधन के चहुँमुखी विकास का प्रमुख आधार सही गणना पर ही आधारित है अतः प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता तथा सारथकता पर प्रकाश डाला। उक्त के साथ ही साथ गोवंश के समग्र विकास एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु नवीन तकनीकी के समावेश पर बल दिया गय एवं सफल प्रशिक्षण हेतु आर्शिवचन से सिंचित किया गया। निदेशक, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र द्वारा समस्त गणमान्य व्यक्तियों, विभिन्न प्रदेशों से आये प्रतिभागियों के साथ-साथ इस कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने हेतु प० दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के अधिकारियों/कर्मचारियों, पशुपालन विभाग, उ०प्र० के अधिकारियों/कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशुपालन विभाग, उ०प्र० के विभिन्न अधिकारियों डा० अरविन्द कुमार सिंह अपर निदेशक, गोधन, डा० जयकेश पाण्डेय, अपर निदेशक, नियोजन, डा० ए०के० वर्मा, अपर निदेशक, लघु पशु, डा० एम०आई० खान, संयुक्त निदेशक, सांख्यकीय, डा० संजीव शर्मा उप निदेशक, सांख्यकीय, डा० नीलम बाला, उप निदेशक / रजिस्ट्रार त्था निदेशालय पशुपालन विभाग, उ०प्र० लखनऊ के विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन के तहत एशिया की पहली स्वास्थ्य अनुसंधान से संबंधित "प्री-क्लिनिकल नेटवर्क सुविधा" का उद्घाटन किया

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन के तहत एशिया की पहली स्वास्थ्य अनुसंधान से संबंधित "प्री-क्लिनिकल नेटवर्क सुविधा" का उद्घाटन किया


डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योगों को अनुसंधान एवं विकास के लिए माइक्रोबियल कल्चर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक भंडार के रूप में कार्य करने के लिए आनुवंशिक रूप से परिभाषित मानव संबद्ध माइक्रोबियल कल्चर संग्रहण (जी-ह्यूमिक) सुविधा का उद्घाटन किया

डॉ. जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वैक्सीन विकास के लिए निजी क्षेत्र के साथ एक दर्जन से अधिक अनुबंधों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए

प्रविष्टि तिथि: 16 JUL 2024 4:10PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज फरीदाबाद स्थित "ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट" (टीएचएसटीआई) के तत्वावधान में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्रीय केंद्र में महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन (सीईपीआई) के तहत एशिया की पहली स्वास्थ्य अनुसंधान से संबंधित "प्री-क्लीनिकल नेटवर्क सुविधा" का उद्घाटन किया।

महामारी तैयारी नवाचारों के लिए गठबंधन (सीईपीआईने बीएसएलरोगजनकों को संभालने के लिए अपनी क्षमता के आधार पर बीआरआईसी-टीएचएसटीआई को प्री-क्लीनिकल नेटवर्क प्रयोगशाला के रूप में चुना है। यह विश्व में 9वीं ऐसी नेटवर्क प्रयोगशाला होगी जो पूरे एशिया में इस तरह की पहली प्रयोगशाला है। इस तरह की अन्य प्रयोगशालाएं अमेरिकायूरोप और ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं। प्रायोगिक पशु सुविधा देश की सबसे बड़ी छोटी पशु सुविधाओं में से एक है, जिसमें प्रतिरक्षा समझौता करने वाले चूहोंखरगोशहैम्स्टरगिनी सूअर आदि की प्रजातियों सहित लगभग 75,000 चूहों को रखने की क्षमता है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रधानमंत्री कार्यालयपरमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिकलोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान एवं विकास के लिए अनुसंधान संस्थानोंविश्वविद्यालयों और उद्योगों को माइक्रोबियल कल्चर प्रदान करने के उद्देश्य से एक "भंडार" के रूप में कार्य करने के लिए "आनुवंशिक रूप से परिभाषित मानव संबद्ध माइक्रोबियल संस्कृति संग्रह (जी-ह्यूमिक) सुविधा" का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा एक नोडल संसाधन केंद्र के रूप में काम करेगी। इससे शैक्षणिक संस्थानोंअस्पतालों और उद्योग के बीच राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के शोधकर्ताओं के उपयोग के लिए आनुवंशिक रूप से विशेषता वाले विशिष्ट रोगज़नक़-मुक्त जानवरों (क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण और शुक्राणु सहित) के भंडार के रूप में भी काम करेगा।

ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआईविज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग के जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (बीआरआईसीका एक संस्थान हैजिसने निपाह वायरसइन्फ्लूएंजा और अन्य श्वसन रोगों में वैक्सीन के विकास और अनुसंधान के लिए निजी क्षेत्रों के साथ एक दर्जन से अधिक समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने में सहायता प्रदान की है। यह देश में नवाचारी और अत्याधुनिक मौलिक अनुसंधान की सुविधा भी प्रदान करेगाजिससे दवा और वैक्सीन का परीक्षण करने के लिए ट्रांसलेशनल अनुसंधान में मदद करेगा। यह रोग की प्रगति/समाधान के बायोमार्कर की पहचान करेगा तथा उद्योग और शिक्षाविदों से संपर्क के साथ-साथ विभिन्न विषयों और व्यवसायों में अनुसंधान सहयोग को भी बढ़ावा देगा।

टीएचएसटीआई के 14वें स्थापना दिवस पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने टीएचएसटीआई की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा का विवरण दिया। उन्होंने यह सुविधा शुरू करने में डॉ. एमके भान और उनके प्रयासों का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि  "14 वर्षों की एक सीमित अवधि मेंसंस्थान ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं और कोविड महामारी के दौरान इसका सफलता ग्राफ ऊपर की ओर ही रहा है। इन कारणों से इस संस्थान के महत्व और इसके द्वारा किए प्रयासों को मान्यता मिली है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी बहुत पुराना नहीं है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसाधनों की कमी के बावजूद डीबीटी की निरंतर प्रगति की सराहना की। उन्होंने कार्यालय के बुनियादी ढांचे आदि से संबंधित विभाग की जरूरतों पर जोर देते हुए अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कोविड महामारी और वैक्सीन विकास में इस संस्थान द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख कियाजिसे भारत में आपातकालीन उपयोग प्राधिकार प्रदान किया गया था। उन्होंने कहा कि निवारक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत को एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने डीबीटी में वैक्सीन विकास और अनुसंधान पर जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समकालीन स्वास्थ्य मुद्दों की कुछ चुनौतियों के बारे में भी बताया। वे स्वयं एक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हैं और उन्होंने भारतीय आबादी में व्याप्त जीवनशैली से जुड़ी मैटाबालिज्म संबंधी बीमारियों के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के टीबी मुक्त भारत के विज़न का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हम सभी को उनके प्रयासों में शामिल होना चाहिए।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने निपाह मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करने में टीएचएसटीआई की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने तत्काल कंगारू-मदरकेयर के अभी हाल के उदाहरण को रेखांकित करते हुए कहा कि अब यह शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित प्रक्रिया है। डीबीटी के सचिव डॉ. राजेश गोखलेपब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी और टीएचएसटीआई के निदेशक डॉ. कथिकेयन भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

Monday, July 15, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों की शिकायतों और समस्याओं को सुना।

 



केन्द्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर एवं मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राज्य की ऊर्जा एवं नगर विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।

 



स्टार्ट-अप्स को अपनी स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत उद्योग प्रबंधन संपर्क आवश्यक हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

 



केंद्रीय मंत्री ने कहा- भारत की आकांक्षी पीढ़ी मोदी सरकार में बेहतर दौर से गुजर रही है

प्रधानमंत्री मोदी की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और ‘नए भारत’ के उनके वीजन ने आईआईएम जैसे विश्व स्तरीय संस्थानों को बनाने में प्रेरित किया है: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रौद्योगिकी ने एक समान अवसर दिया है और इसकी क्षमता का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाना चाहिएः डॉ. सिंह

अलग-अलग काम करने का युग बीत गया है; तालमेल और सहयोग का युग आ गया है: डॉ. सिंह


केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि स्टार्ट-अप्स को अपनी स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत उद्योग प्रबंधन संपर्क (लिंकेज) आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इसमें आईआईएम जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू शहर के बाहरी इलाके जगती में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के एमबीए छात्रों के नए बैच के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कहा कि अधिकतर सफल स्टार्ट-अप कहानियां मजबूत उद्योग संपर्क के कारण संभव हुई हैं। उन्होंने कहा- "उदाहरण के लिए, अरोमा मिशन में, सरकार लैवेंडर में कृषि स्टार्ट-अप में लगे लोगों की क्षमता सृजन सुनिश्चित करके और लैवेंडर से बने परफ्यूम और अन्य उत्पादों जैसे हिमालयी उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार पहुंच की सुविधा प्रदान करके एक सक्षमकर्ता बन गई है।"

मंत्री महोदय ने कहा कि हिमालय के जैव संसाधनों और तटीय क्षेत्रों में अनछुए खनिजों का दोहन भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा मूल्यवर्धन कर सकता है और ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा- भारत के तटीय राज्य और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश देश के भविष्य की अर्थव्यवस्था को बहुत कुछ दे सकते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने महत्वाकांक्षी पीढ़ी के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेहतर समय चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, प्रौद्योगिकी महान समतलीकरण रही है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र के सभी व्यक्ति को अवसर मिला है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं को प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए, जिसने सामाजिक भलाई के लिए समान अवसर तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रौद्योगिकी कुछ लोगों का विशेषाधिकार थी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों से 2047 के भारत का नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 2027 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी पूरी करेगा, तब युवा ही विकसित भारत के निर्माता होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी युवा पीढ़ी को नए कौशल और प्रशिक्षण तथा विश्व स्तरीय शिक्षा से लैस करने के लिए अथक प्रयास कर रही है, ताकि उन्हें विकसित भारत का निर्माता बनाया जा सके। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा लाई गई राष्ट्रीय शिक्षक नीति 2020 इस लक्ष्य में योगदान देगी।

पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईआईएम-जम्मू की प्रगति के बारे में कहा कि अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों में यह देश में उच्च शिक्षा के ऐसे नए प्रमुख संस्थानों में से एक बन गया है। मंत्री महोदय ने कहा, प्रारंभिक अवस्था से ही, जब हमें फैकल्टी खोजने में भी कठिनाई हो रही थी, इसने अपनी छोटी सी यात्रा में एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने कहा, ‘‘आईआईएम जम्मू की स्थापना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और ऐसे नेताओं को तैयार करने के उनके सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्र को अभूतपूर्व विकास की ओर ले जाएंगे।’’

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों के अधिक लाभ के लिए संस्थानों के बीच सहयोग और तालमेल पर बल दिया। मंत्री महोदय ने कहा, अलग-अलग काम करने का युग समाप्त हो गया है; सहयोग का युग आ गया है। उन्होंने आईआईएम-जम्मू, एम्स-जम्मू, आईआईटी-जम्मू और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय को अनुसंधान एवं विकास तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके साझेदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

इससे पहले डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आईआईएम-जम्मू के अत्याधुनिक परिसर का दौरा किया। उनके साथ निदेशक प्रो. बी.एस. सहाय और एम्स, जम्मू के निदेशक डॉ. शक्ति कुमार गुप्ता भी उपस्थित थे। उन्होंने इस अवसर पर एक पौधा लगाया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे पी नड्डा ने एफएसएसएआई द्वारा की गई विभिन्न पहलों की समीक्षा की; खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में “उल्लेखनीय प्रगति” की सराहना की

 



स्वास्थ्य मंत्री ने नागरिकों के कल्याण में खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया

श्री नड्डा ने खाद्य सुरक्षा विषयों पर साक्ष्य आधारित जानकारी के साथ उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित किया

एफएसएसएआई के लिए न केवल नियामक मुद्दों पर बल्कि स्वस्थ खान-पान की आदतों के लिए व्यवहार परिवर्तन पर उपभोक्ताओं, उद्योग और

हितधारकों को संवेदनशील बनाना महत्वपूर्ण है: श्री जे पी नड्डा

 “आइए, हम सक्रिय नेतृत्व करें और उद्योग एवं हितधारकों के साथ संवाद करें तथा उन्हें हमारे स्वस्थ खान-पान की पहल और प्रयासों में अपना भागीदार बनाएं”


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि साक्ष्य आधारित जानकारी के माध्यम से विभिन्न खाद्य सुरक्षा विषयों पर उपभोक्ताओं और नागरिकों को सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तभी हमारा काम समग्रता में पूरा होगा। श्री जगत प्रकाश नड्डा आज भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) मुख्यालय में समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने नागरिकों के कल्याण में खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, इसके महत्व पर प्रकाश डाला और एफएसएसएआई से उपभोक्ताओंउद्योग और हितधारकों को न केवल नियामक मुद्दों पर बल्कि स्वस्थ खान-पान की आदतों को विकसित करने के लिए व्यवहार परिवर्तन पर भी संवेदनशील बनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि नियामक विषय एफएसएसएआई का एक महत्वपूर्ण दायित्व हैंलेकिन खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर उपभोक्ताओं के साथ संवाद और संवेदनशीलता के साथ ही पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे बड़े देश में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग आहार संबंधी आदतें और प्राथमिकताएं हैं। आइए हम उनके व्यवहारों के बारे में अपनी समझ को व्यापक बनाएं। इससे हमें इन विविधताओं के अनुरूप अपनी नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एफएसएसएआई के सीईओ श्री जी कमला वर्धन राव ने एफएसएसएआई द्वारा प्रारंभ की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी। श्री नड्डा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 2016 में एफएसएसएआई की मेरी पिछली यात्रा के बाद से मैंने देखा है कि एफएसएसएआई ने सभी पहलुओं में एक बड़ी प्रगति की है। उन्होंने इस समग्र विकास और खाद्य सुरक्षा इको-सिस्टम को मजबूत बनाने, व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने तथा सभी हितधारकों को संवेदनशील बनाने में उल्लेखनीय प्रगति दिखाने के लिए एफएसएसएआई को बधाई दी। श्री जे पी नड्डा ने मोटे अनाज और कोडेक्स मानकों जैसे क्षेत्रों में एफएसएसएआई के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने स्ट्रीट वेंडरों को प्रशिक्षित और सुसज्जित करने की उनकी पहल की सराहना की और इस बात पर बल दिया कि उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा का मुद्दा एफएसएसएआई पर एक बड़ा दायित्व है। आइए हम इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनें। उन्होंने मोटे अनाज, जिसे श्री-अन्न के रूप में भी जाना जाता हैके बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए भी उनकी सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक मानकों को विकसित करनेएक मजबूत परीक्षण अवसंरचना की स्थापना करने और ईट राइट इंडिया अभियान जैसी पहल शुरू करने में एफएसएसएआई के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उभरते खाद्य सुरक्षा रुझानों पर ध्यान देनेटिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर उद्योग और हितधारकों के साथ सक्रिय संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने एफएसएसएआई से आग्रह किया, "आइए हम सक्रिय नेतृत्व करें और उद्योग और हितधारकों के साथ संवाद करें तथा उन्हें हमारे स्वस्थ भोजन पहल और प्रयासों में अपना भागीदार बनाएं।"

श्री नड्डा ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी राज्य अखिल भारतीय मानकों के एक मंच पर आ जाएंउनकी शक्तिसीमाओं और चुनौतियों का आकलन करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें उनके व्यक्तिगत विषयों को समझना चाहिए ताकि हम उनका समर्थन कर सकें और उनके प्रयासों को मजबूत कर सकें।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एफएसएसएआई परिसर में एक आम का पौधा भी लगाया।

इस कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण पहल की गई। इसमें मैनुअल ऑन मैथड्स ऑफ एनालिसिस- माइक्रोबायोलॉजिकल एक्जामिनेशन ऑफ फूड एंड वाटर का विमोचन शामिल हैजो माइक्रोबायोलॉजिकल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। इसके अतिरिक्तकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा गाइड फॉर फूड एनालिसिस- ओपिनियन ऑन टेस्ट रिपोर्ट्स ऐज पर एफएसएसएआई एक्ट-2006 रूल्स एंड रेगुलेशंस मेड देयरअंडर” भी लॉन्च की गई। खाद्य सुरक्षा प्रथाओं के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स की विशेषता वाले आकर्षक वीडियो की एक श्रृंखला 'फूड सेफ्टी बाइट्सलॉन्च की गई। इसके अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में अधिकारियों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए 'मैनुअल फॉर फूड सेफ्टी ऑफिसर्स” का भी स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अनावरण किया गया।

इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय और एफएसएसएआई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय और शाखा कार्यालयों के 1000 से अधिक अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।


योग गठिया के रोगियों को राहत पहुंचा सकता है

 



अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)नई दिल्ली के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि योगाभ्यास से गठिया (रूमेटाइड अर्थराइटिस-आरए) के रोगियों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आ सकता है।

आरए एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है जो जोड़ों में सूजन का कारण बनती है। यह जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है और इस रोग में दर्द होता है। इसके कारण फेफड़ेहृदय और मस्तिष्क जैसे अन्य अंग प्रणालियां भी प्रभावित हो सकती हैं। परंपरागत रूप सेयोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।

डीएसटी द्वारा समर्थितमोलेक्यूलर री-प्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स प्रयोगशालाएनाटॉमी विभाग और रुमेटोलॉजी विभाग एम्सनई दिल्ली द्वारा एक सहयोगी अध्ययन ने गठिया के रोगियों में सेलुलर और मोलेक्यूलर स्तर पर योग के प्रभावों की खोज की है। इससे पता चला है कि कैसे योग पीड़ा से राहत देकर गठिया के मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है।

पता चला है कि योग सेलुलर क्षति और ऑक्सीडेटिव तनाव (ओएस) को नियंत्रित करके सूजन को कम करता है। यह प्रो- और एंटी-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स को संतुलित करता हैएंडोर्फिन के स्तर को बढ़ाता हैकोर्टिसोल और सीआरपी के स्तर को कम करता है तथा मेलाटोनिन के स्तर को बनाए रखता है। इसके जरिये सूजन और अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली चक्र का विघटन रुक जाता है।

मोलेक्यूलर स्तर परटेलोमेरेज़ एंजाइम और डीएनए में सुधार तथा कोशिका चक्र विनियमन में शामिल जीन की गतिविधि को बढ़ाकरयह कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इसके अतिरिक्तयोग माइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन को बेहतर बनाता हैजो ऊर्जा चयापचय को बढ़ाकर और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके टेलोमेर एट्रिशन व डीएनए क्षति से बचाता है।

डीएसटी द्वारा समर्थितएम्स के एनाटॉमी विभाग के मोलेक्यूलर री-प्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स प्रयोगशाला में डॉ. रीमा दादा और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में दर्द में कमीजोड़ों की गतिशीलता में सुधार, चलने-फिरने की कठिनाई में कमी और योग करने वाले रोगियों के लिए जीवन की समग्र गुणवत्ता में वृद्धि दर्ज की गई। ये समस्त लाभ योग की प्रतिरक्षात्मक सहनशीलता और मोलेक्यूलर रेमिशन स्थापित करने की क्षमता में निहित हैं।

साइंटिफिक रिपोर्ट्स2023 में प्रकाशित अध्ययन https://www.nature.com/articles/s41598-023-42231-w से पता चलता है कि योग तनाव को कम करने में मदद कर सकता हैजो गठिया  के लक्षणों के लिए एक ज्ञात कारण है। कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन को कम करकेयोग अप्रत्यक्ष रूप से सूजन को कम कर सकता हैमाइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन में सुधार कर सकता हैजो ऊर्जा उत्पादन और सेलुलर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है और 𝛽-एंडोर्फिनमस्तिष्क-व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफ़िक कारक (बीडीएनएफ), डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन (डीएचईए), मेलाटोनिन और सिरटुइन-1 (एसआईआरटी-1) के बढ़े हुए स्तरों से को-मॉर्बिड डिप्रेशन की गंभीरता को कम कर सकता है। योग न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देता है और इस प्रकार रोग निवारण रणनीतियों में सहायता करता है तथा को-मॉर्बिड डिप्रेशन की गंभीरता को कम करता है।

इस शोध से गठिया रोगियों के लिए पूरक चिकित्सा के रूप में योग की क्षमता का प्रमाण मिलता है। योग न केवल दर्द और जकड़न जैसे लक्षणों को कम कर सकता हैबल्कि रोग नियंत्रण और जीवन की बेहतर गुणवत्ता में भी योगदान दे सकता है। दवाओं के विपरीतयोग के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं और यह गंभीर ऑटोइम्यून स्थितियों के प्रबंधन के लिए एक सस्ता व प्रभावी तथा स्वाभाविक विकल्प प्रदान करता है।

प्रकाशन लिंक: https://www.nature.com/articles/s41598-023-42231-w

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