Saturday, June 22, 2024

धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक खत्म , महत्व पूर्ण फैसलों पर लगी मोहर।

 धामी कैबिनेट की बैठक में बड़े फैसलों पर लगी मुहर


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक सम्पन्न हो गयी है।लोकसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड सरकार की पहली कैबिनेट बैठक खत्म हो गई है। देहरादून स्थित सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की इस बैठक में धामी कैबिनेट ने कई बड़े फैसले लिए हैं।


धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक खत्म , महत्व पूर्ण फैसलों पर लगी मोहर।


ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा का ढांचा 80 नए पद स्वीकृत विधुत सुरक्षा विभाग का मामला पहले 65 पद थे


उत्तराखंड एकीकृत महानगर विधेयक 2024 स्टेट में विभिन्न परिवहन व्यवस्था को ठीक करने को लेकर नया प्राधिकरण बनेगा जो ट्रेफिक को देखते हुए विकास कार्यों को स्वीकृति देगा


आवास विभाग मे नियुक्ति में कार्मिक विभाग के ही नियम लागू होगे


वित्त सेवा के अधिकारियो की नियुक्ति के बाद भी अलग अलग प्रमोशन के दौरान भी ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी बाकी सवर्गों मेंभी ट्रेनिंग होती रहेगी


वित्त विभाग राज्य सरकार के कर्मचारियों को कॉरपोरेट बैंकिंग अकाउंट लागू करने का फैसला लिया गया हैं 13 बैंक के साथ बात हुई 4 बैंक तैयार हुए एक्सीडेंट मुआवजा समेत तमाम अन्य सुविधाएं जिसमे बच्चों की शादी, बीमारी के मामले में मदद को लेकर भी ये व्यवस्था लागू होगी


पर्यटन नीति 2018 की केटेगरी जिमसे जिले रखें गए थे कैपिटल सब्सिडी का 90 प्रतिशत SGST रिम्बर्समेन्ट 10 साल में किया जाएगा


सहकारिता की प्रबंध समिति में महिलाओ का 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी


देहरादून में खाद्य विश्लेषण साला के 13 पदों को मंजूरी इसके अलावा फ़ूड सेफ्टी ऑन व्हील के लिए 8 पद स्वीकृति


 हनोल मंदिर मास्टर प्लान बनाया जा रहा हैं की व्यवस्था जमीन हैं तो 10 लाख रूपए जमीन नहीं हैं तो सरकार अपनी जमीन में बसायेगी।


आवास विभाग मे नियुक्ति में कार्मिक विभाग के ही नियम लागू होंगे।

सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए। भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री ‘द गोल्डन थ्रेड’ को इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार प्रदान किया गया।

 







18वें मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव को शानदार विदाई, और भी सुंदर वापसी का वादा




फिल्म निर्माता हमारे देश के कोहिनूर हैं: महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार


मुंबई के आइकॉनिक स्‍काईलाइन की टिमटिमाती रोशनी में डॉक्‍यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्‍शन और एनीमेशन फिल्मों के लिए 18वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) का समापन हुआ। इसने सिनेमाई कलात्मकता की चमक के साथ सपनों के इस शहर को रोशन कर दिया और कभी न सोने वाला यह शहर कहानी सुनाने के अंदाज और रचनात्मकता की प्रतिध्‍वनि से गूंज उठा। महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार की मौजूदगी में आयोजित एक शानदार समापन समारोह के साथ यह महोत्‍सव अपने चरम पर पहुंच गया।


इस महोत्सव की शानदार सफलता और गैर-फीचर सिनेमा के करामाती जादू का जश्न मनाने के लिए फिल्म एवं मनोरंजन जगत की मशहूर हस्तियां, फिल्म निर्माता और कई दिग्गज एकत्र हुए। इनमें शेखर सुमन, शाजी एन. करुण, सुब्बैया नल्लामुथु, पूनम ढिल्लों, छाया कदम, एमी बरुआ, अक्षय ओबेरॉय और विशाल आदि शामिल थे।




(फोटो में: महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार समापन समारोह में मुख्य वक्‍तव्‍य देते हुए)


 


महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि हमारे फिल्म निर्माता हमारे देश के कोहिनूर हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम आगे बढ़ेंगे, तो हमारी विरासत और हमारी फिल्मों से संबंधित हर मामला आगे बढ़ेगा। यहां बैठे लोगों की क्षमता ऐसी है कि वे अपनी कला के जरिये हमारी आत्मा की गहराई तक पहुंच सकते हैं। वे उन गहराइयों तक पहुंच सकते हैं जहां डॉक्टर भी नहीं पहुंच सकते।' उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव को एक नए नजरिये से और आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ अलविदा करें।


मंत्री ने इस प्रतिष्ठित माध्यम के जरिये प्रतिभाशाली फिल्म निर्माताओं को प्रोत्‍साहित करने के प्रयासों के लिए भारत सरकार को भी बधाई दी। उन्‍होंने फिल्मों की बदलावकारी ताकत पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'फिल्म समाज का दर्पण है और वह सामाजिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती है। इस क्षेत्र का महज एक संवाद भी किसी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है।'


श्री मुनगंटीवार ने फिल्मों की बहुमुखी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, 'फिल्में न केवल मनोरंजन का स्रोत हैं, बल्कि व्यक्तित्व का विकास करने वाली ताकत भी हैं। जब व्यक्तित्व का विकास होता है, तो समाज विकसित होता है और जब समाज विकसित होता है, तो राष्ट्र विकसित होता है।' उन्होंने सभी को फिल्म के जरिये एकजुट होकर हमारे देश के गौरव को दुनिया के हर घर और हर दिल तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी आह्वान के साथ उन्‍होंने अपना वक्‍तव्‍य समाप्‍त किया।


प्रतिस्पर्धी फिल्मों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के विचारों को साझा करते हुए निर्णायक मंडल की अध्यक्ष श्री भरत बाला ने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों की दुनिया भर की कहानियों से प्रेरित हैं। ये कहानियां मानवता और परिवार को हमारे जीवन के केंद्र में रखती हैं और इसलिए आज भी लोगों को बेहतर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा, 'सभी डॉक्‍यूमेंट्री में बुनियादी तौर पर मानवता और उस संस्‍कृति को दर्शाती जाती है जिसमें हम रहते हैं और सांस लेते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हम सब डॉक्‍यूमेंट्री में अधिक से अधिक निवेश करेंगे ताकि मानवता को बढ़ावा मिल सके।'


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव के राष्ट्रीय निर्णायक मंडल की अध्यक्ष भारतीय निर्माता अपूर्वा बख्शी ने कहा कि निर्णायक मंडल को भारत के विभिन्न हिस्सों से उभरने वाली दमदार, गंभीर और मार्मिक कहानियों को देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, 'देखने के अनुभव का मुख्य आकर्षण यह था कि विभिन्न फिल्म निर्माताओं ने किस प्रकार पितृसत्तात्‍म ढांचे को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और पुरुष संबंधों को एक ऐसे मार्मिक नजरिये से चित्रित किया जिसे शायद ही कभी देखा गया हो।'


‘द गोल्डन थ्रेड’ के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार


इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में प्रतिष्ठित गोल्डन कोंच पुरस्कार निष्ठा जैन द्वारा निर्देशित भारतीय फिल्म ‘द गोल्डन थ्रेड’ को दिया गया। कोलकाता में जूट के काम के ताने-बाने को दर्शाती यह फिल्म आर्थिक बदलाव से प्रभावित औद्योगिक क्रांति के अंतिम अवशेषों के प्रति श्रद्धांजलि और अवलोकन दोनों है। निर्णायक मंडल ने कहा कि यह फिल्म मनुष्य और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है। साथ ही यह उस समीकरण पर सवाल उठाती है जिसके तहत पूंजीवाद मनुष्य को केवल उसके श्रम के आधार पर महत्व देता है। इसमें शानदार कल्पना और ध्वनि के साथ एक सुंदर कहानी का तानाबाना बुना गया है जो डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म निर्माण की आकर्षक प्रकृति को रेखांकित करती है। इस पुरस्कार में प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये नकद शामिल है। महोत्सव के समापन फिल्म के रूप में भी ‘द गोल्डन थ्रेड’ दिखाई गई।




(फोटो: ‘द गोल्डन थ्रेड’ की निर्देशक निष्ठा जैन इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार प्राप्त करते हुए)


 


सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय शॉर्ट फिक्‍शन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार वेरा पिरोगोवा द्वारा निर्देशित एस्टोनियाई फिल्म 'सॉर मिल्क' को दिया गया। इस फिल्म में मां और बेटे के बीच के जटिल बंधन को बखूबी दर्शाया गया है, जो उम्मीद और निराशा से भरपूर कहानी का तानाबाना बुनती है। इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र और 5 लाख रुपये नकद शामिल है।


टोमेक पोपाकुल और कासुमी ओजेकी द्वारा निर्देशित पोलैंड की फिल्म 'जिमा' को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार मिला। इसके तहत प्रमाण पत्र और 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।


मैट वाल्डेक द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'लवली जैक्सन' को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में जूरी का स्‍पेशल मेंशन पुरस्‍कार मिला। जूरी यानी निर्णायक मंडल ने इस फिल्म की आध्यात्मिकता और इसकी आकर्षक कहानी को बयां करने के लिए इस्तेमाल की गई रचनात्मक तकनीकों की काफी सराहना की।


सर्वश्रेष्ठ ध्वनि डिजाइन के लिए तकनीकी पुरस्कार नीरज गेरा और अभिजीत सरकार को संयुक्त रूप से 'द गोल्डन थ्रेड' और 'धारा का टेम' (दूध निकालने का समय) फिल्मों में उनकी उत्कृष्टता के लिए दिया गया। मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव में सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार संयुक्त रूप से विग्नेश कुमुलाई को ‘करपारा’ के लिए और आइरीन धर मलिक को ‘फ्रॉम द शैडोज’ के लिए दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी का पुरस्कार बाबिन दुलाल और सूरज ठाकुर को क्रमशः ‘धोरपाटन: नो विंटर हॉलीडेज’ और ‘एंटैंगल्ड’ के लिए दिया गया।


सबसे नवोन्‍मेषी/प्रयोगात्मक फिल्म के लिए प्रमोद पति पुरस्कार लियाम लोपिंटो द्वारा निर्देशित जापानी फिल्म ‘द ओल्ड यंग क्रो’ को दिया गया। यह फिल्म विभिन्‍न द्वंद्वों की कहानी बयां करने की अपनी नई एवं जादुई शैली के लिए सराही गई। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये प्रदान किए गए।


सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए।


इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में प्रतिष्ठित गोल्डन कोंच पुरस्कार निष्ठा जैन द्वारा निर्देशित भारतीय फिल्म ‘द गोल्डन थ्रेड’ को दिया गया। कोलकाता में जूट के काम के ताने-बाने को दर्शाती यह फिल्म आर्थिक बदलाव से प्रभावित औद्योगिक क्रांति के अंतिम अवशेषों के प्रति श्रद्धांजलि और अवलोकन दोनों है। निर्णायक मंडल ने कहा कि यह फिल्म मनुष्य और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है। साथ ही यह उस समीकरण पर सवाल उठाती है जिसके तहत पूंजीवाद मनुष्य को केवल उसके श्रम के आधार पर महत्व देता है। इसमें शानदार कल्पना और ध्वनि के साथ एक सुंदर कहानी का तानाबाना बुना गया है जो डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म निर्माण की आकर्षक प्रकृति को रेखांकित करती है। इस पुरस्कार में प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये नकद शामिल है। महोत्सव के समापन फिल्म के रूप में भी ‘द गोल्डन थ्रेड’ दिखाई गई।

ट्रॉफी और 1 लाख रुपये प्रदान किए गए।

सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए।


(फोटो: ‘6-ए आकाश गंगा’ के निर्देशक निर्मल चंद्र डंडरियाल सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार प्राप्त करते हुए)

 

सर्वश्रेष्ठ भारतीय शॉर्ट फिक्‍शन फिल्म (30 मिनट तक) के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार बरखा प्रशांत नाइक द्वारा निर्देशित 'साल्टको दिया गया। यह फिल्म एक मार्मिक और खूबसूरती से गढ़ी गई पिता-पुत्र की कहानी में कामुकता की समझ में पीढ़ीगत अंतर को बारीकी से दर्शाती है। इस पुरस्कार के तहत 3 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।

गौरव पति द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'निर्जराने सर्वश्रेष्ठ भारतीय एनिमेशन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार जीता। यह फिल्म गंगा के घाटों पर शोकगुल भरे अनुष्ठानों के दौरान दो भाइयों के पुनर्मिलन की कहानी बयां करती है। इस पुरस्‍कार के तहत 3 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।

जोशी बेनेडिक्ट द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'अ कोकोनट ट्रीको प्रवास और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में जूरी का स्‍पेशन मेंशन पुरस्‍कार प्राप्त हुआ।


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव 2024 में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के लिए दादा साहब फाल्के चित्रनगरी पुरस्कार श्रीमोई सिंह को उनकी फिल्म 'टुअर्ड्स हैप्पी एलीज' के लिए दिया गया। इस फिल्‍म ने महोत्‍सव का एफआईपीआरईएससीआई अंतर्राष्ट्रीय क्रिटिक जूरी पुरस्कार भी जीता है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद प्रदान किए जाते हैं।


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव में सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म के लिए आईडीपीए पुरस्कार 'चांचिसोआ (उम्मीद)' को दिया गया, जो एल्वाचिसा संगमा और दीपांकर दास द्वारा निर्देशित एक गारो फिल्म है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद प्रदान किए जाते हैं।


'अमृत काल में भारत' पर सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार एडमंड रैनसन द्वारा निर्देशित 'लाइफ इन लूम' को दिया गया, जो भारत में बुनकर समुदायों के सामने आने वाली सामाजिक-आर्थिक और जलवायु चुनौतियों पर केंद्रित है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और 1 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।




(फोटो: समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का दृश्य)


 


समापन समारोह में अक्षय ओबेरॉय, शीबा चड्ढा, एमी बरुआ, मान्या सिंह, छाया कदम, विशाल मल्होत्रा, चंद्र प्रसाद ठाकुर, साई देवधर, सांविका और दीपक पाराशर जैसी फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। शाम को रंगारंग, जीवंत और विविधतापूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मंच पर धूम मचा दी और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में महोत्सव की तकनीकी समिति और फिल्मी हस्तियों को सम्मानित किया गया। एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक और इस महोत्सव के निदेशक श्री पृथुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



एनीमेशन फिल्म निर्माण से संबंधित समकालीन और नवोन्‍मेषी विषयों पर गहन चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने फिल्म निर्माणप्रचार और वितरण के नए पहलुओं की खोज की। इससे उद्योग में उभरते रुझान के बारे में उनकी समझ बेहतर हुई। इसके अलावावार्नर ब्रदर्स के एक वरिष्ठ एनिमेटर के नेतृत्व में एनीमेशन और वीएफएक्स पाइपलाइन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जो अत्याधुनिक तकनीकों की गहन खोज से प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भारतीय डॉक्यूमेंट्री निर्माता संघ द्वारा आयोजित ओपन फोरम ने डॉक्यूमेंट्री फंडिंगआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के इस दौर में फिल्म निर्माण जैसे महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर आकर्षक और गर्मजोशी से भरी चर्चा आयोजित की। इन मंचों ने पेशेवरों को उद्योग के सामने आने वाली मौजूदा चुनौतियों एवं अवसरों पर चर्चा करने और अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए एक डायनेमिक जगह उपलब्‍ध कराया। मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव 2024 ने वैश्विक सिनेमाई आदान-प्रदानरचनात्मकता को बढ़ावा देनेसहयोग करने और दुनिया भर से कहानी बयां करने की विविध परंपराओं का जश्न मनाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत की है।

_बस्तियों को बचाने एवं मालिकाना हक के सवाल पर , फुटपाथ व्यवसायियों के उत्पीड़न के सवाल पर । एलिवेटेड रोड़ के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन ।


 




27 जून024 को राज्यसचिवालय पर प्रदर्शन 

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देहरादून 22 जून 024,

आज विभिन्न जनसंगठनों तथा राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमन्त्रीजी को ज्ञापन प्रेषित किया गया ।ज्ञापन उपजिलाधिकारी मुख्यालय शालिनी नेगी ने लिया तथा आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया ।इस अवसर पर सीपीएम सचिव अनन्त आकाश ,सीआईटीयू महामंत्री लेखराज ,आयूपी अध्यक्ष नवनीत गुंसाई ,बस्ती बचाओ अभियान के नरेन्द्र सिंह ,राजेन्द्र शर्मा ,भीम आर्मी के आजम खान ,नेताजी संघर्ष समिति के प्रभात डण्डरियाल ,चेतना आन्दोलन के बडोनी ,रधुबीरसिंह ,डिम्पल ,रेणु ,ममता ,जतिनी ,सुनैना ,मनीषा ,मंजू ,रीना ,पिंकी ,प्रेंमफूल ,संगीता, सोनी ,विनोद,हरिओम ,सोनू के अलावा सपा ,महिला समिति ,एस एफआई उपस्थित आदि बड़ी संख्या में प्रभावित उपस्थित थे ।

इस अवसर पर गरीब बस्तियों को न उखाड़ने ,बस्तियों क नियमतीकरण करने ,फुटपाथ व्यवसायियों का उत्पीड़न रोकने तथा वैन्डरजोन घोषित करने तथा बस्तियों के लिऐ जारी नोटिस निरस्त करने की मांग की गई ।

ज्ञापन निम्नलिखित है ।

सेवा में,


माननीय मुख्यमंत्रीजी 

उत्तराखण्ड सरकार

देहरादून ।

विषय: मज़दूर बस्तियों के लोगों को बेघर करने के विरोध में ज्ञापन प्रेषण ।

द्वारा :- जिलाधिकारी महोदया देहरादून ।

मान्यवर,


राजधानी देहरादूनमें पिछले डेढ़ महीने से गरीबों को बेघर करने के खिलाफ चलाये अभियान के तहत राज्य के ट्रेड यूनियन, जन संगठन और विपक्षी दल लगातार आपके और आपकी सरकार के मंत्रियों के संज्ञान में कुछ गंभीर समस्याओं को लाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि में सोमवार से MDDA 240 से ज्यादा परिवारों को बेघर करने का अभियान शुरू करने वाला है,  जो कि गैर क़ानूनी, अन्यायपूर्ण और जन विरोधी है तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के विपरीत है ।

 मान्यवर ,हम पुनः आपके संज्ञान निम्नलिखित बिन्दुओं रखना चाहते हैं :-- 

(1)अतिक्रमण अभियान या फिर एनजीटी के फैसले के तहत किसी भी बड़े बिल्डर, होटल या सरकारी विभाग पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।  यह एनजीटी के आदेश की सरासर अवहेलना है ,इसी की आढ़ में केवल गरीब बस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है ।

(2) आपकी सरकार ने 2018 में कानून लाकर वायदा किया था कि 2021 तक सभी बस्तियों को मालिकाना हक मिलेगा । 2022 तक हर परिवार को पीएम मोदी का वायदा था कि घर मिलेगा,पुनः नवनिर्वाचित केन्द्र सरकार फिर से 3 करोड़ घर देने का ऐलान का असर हमारे राज्य में उल्टा है । इस स्थिति में मज़दूर वर्ग के परिवार कहाँ रहें ?


(3) कोर्ट में आपके अधिकारी निरन्तर घोर लापरवाही करते रहे हैं। 1 अप्रैल 024 को एक सुनवाई में हाज़िर तक नहीं हुए और फिर हरित प्राधिकरण से ऐसा आदेश आया जिसके बहाने लोगों को उजाड़ने की एकपक्षीय कार्यवाही की जा रही है । 

(4) बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है , लेकिन इस अभियान में कानून को ताक पर रखा गया है ,अनाधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से मानक तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है ? प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है। लोगों की और से दिए गए साक्ष्य को एकतरफा निरस्त कर ध्वस्तीकरण कर उन्हें प्रताड़ित एवं अपमानित कर बेघरबार किया जा रहा है। फिलहाल 2016 से पहले बसे लोग इस कार्यवाही कै शिकंजे में हैं जबकि 2018 में लाया गया आपका कानून सभी बस्तीवासियों को जो सुरक्षा देता है , उसे एक सिरे से खारिज किया जा रहा है ।

(5) बिना क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाये किसी की सम्पति को नुक़सान पहुँचाना क़ानूनी अपराध है।  प्रभावित लोगों में से कई परिवार हैं जो अनुसूचित जाति के हैं , उनको गैर क़ानूनी तरीकों से बेदखल करना SC / ST (Prevention of Atrocities) Act के अंतर्गत संज्ञेय अपराध है।

मान्यवर ,इन सारे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए हम फिर से आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि सरकार अपने ही वादों के अनुसार इस अभियान पर रोक लगाकर कानून तुरन्त लाये कि  किसी को बेघर नहीं किया जायेगा। बस्तियों का मालिकाना हक नियमितीकरण या पुनर्वास कै लिऐ युद्धस्तर पर कदम उठाना सरकार अपनी प्राथमिकता बनाये तथा पर्यावरण और उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए बड़े बिल्डरों एवं सरकारी विभागों पर शक्ति सै कार्यवाही की जाये औ रिस्पना ,विन्दाल एलिवेटेड रोड जैसे बेज़रूरत, जन विरोधी एवं पर्यावरण विरोधी परियोजनाओं पर तुरंत रोक लगायी जाये। 

अन्त मेंं फुटपाथ लधु व्यवसायियों को आयेदिन पुलिसिया उत्पीड़न राजधानी देहरादून तथा राज्य प्रमुख महागरों तथा कस्बों देख


जारीकर्ता

अनन्त आकाश

सचिव ,सीपीआई (एम)

सीसीआरएएस विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से "पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग्स" पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित करेगा

 


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आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष स्वायत्त संगठनकेंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), 24 जून2024 को "पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग्स" पर इंडिया हैबिटेट सेंटरनई दिल्ली में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन-दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय) और डब्ल्यूएचओ-जीटीएमसी (वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र) के सहयोग से आयोजित होने वाला यह महत्वपूर्ण आयोजनपारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान को वैश्विक मानकों और प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने में एक अग्रणी प्रयास को चिन्हित करता है।

अपनी तरह की यह पहली परामर्श बैठकनीति निर्धारकोंशैक्षिक संस्थानोंशोधकर्ताओंरोगियों और उद्योग हितधारकों सहित भारत में पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर एक साथ लाएगी। इसका उद्देश्य आयुर्वेदसिद्धयूनानी और होम्योपैथी जैसी विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करना और उनको प्राथमिकता देना है। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा में डब्ल्यूएचओ के मैनडेट के अनुसार हैजैसा कि सीसीआरएएस के महानिदेशक वैद्य रबीनारायण आचार्य ने बताया है।

हाल ही मेंहैदराबाद में सीसीआरएस के एक परिधीय संस्थान, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (एनआईआईएमएचको "पारंपरिक चिकित्सा में मौलिक और साहित्यिक अनुसंधान" (डब्ल्यूएचओसीसी इंड-177) के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ सहयोग करने वाले केंद्र के रूप में नामित किया गया है। यह पदनाम आगामी अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग एक्सरसाइज के महत्व को रेखांकित करता हैजो अगले दशक के लिए एक अनुसंधान रोडमैप तैयार करेगा। इसका उद्देश्य धन का प्रभावकारी उपयोग सुनिश्चित करना और पारंपरिक चिकित्सा के अंदर आवश्यकता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करना हैताकि इसकी वैश्विक स्वीकृति और एकीकरण का समर्थन किया जा सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और प्रोफेसर (वैद्य) रबीनारायण आचार्य की अगुवाई मेंसीसीआरएएस ने पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को शुरू किया है। इस बैठक में देश भर के पारंपरिक चिकित्सा प्रतिनिधियों की भागीदारी होगीजिनमें आयुष मंत्रालय के सलाहकार और संयुक्त सचिवनीति आयोग के प्रतिनिधिसभी पांच आयुष अनुसंधान परिषदों के महानिदेशकराष्ट्रीय आयोगों (एनसीआईएसएम और एनसीएच) के अध्यक्ष, आयुष/आयुर्वेद विश्वविद्यालयों के कुलपतिआयुष मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय संस्थानों के निदेशक,  पीएचएफआईआरआईएस-एफआईटीएमसीएसआईआरबीआईएसआईसीएमआरडब्ल्यूएचओआयुष फार्मास्युटिकल उद्योगटीडीयू से एथनोफार्माकोलॉजी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

संबोधित किए जाने वाले प्रमुख विषयों में औषधीय पौधे अनुसंधानगुणवत्तासुरक्षा और प्रभावकारिता अध्ययनपूर्व-नैदानिक ​​​​मान्यताएंपारंपरिक दवाओं का तर्कसंगत उपयोग,  नैदानिक ​​​​परीक्षण निगरानी​​​​चिकित्सा मानव विज्ञान और प्राचीन चिकित्सा साहित्य का डिजिटलीकरण शामिल हैं। आयुष क्षेत्र के लगभग 100 हितधारक/विशेषज्ञ इस बैठक में हिस्सा लेंगे, जो होने वाले संवाद को व्यापक और समावेशी बनाना सुनिश्चित करेगा।

इस एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा में एक दशक लंबी अनुसंधान रणनीति के लिए आरंभिक तैयारी का आधार बनानाहितधारकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने प्रयासों को संरेखित करना है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण से वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की उन्नति और एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा - छोटे किसानों के हित में कार्य करें कृषि वैज्ञानिक



केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में हुआ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) का पूर्व छात्र सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व छात्रों का सम्मेलन आज पूसा, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से अपील की कि वे छोटे और सीमांत किसानों के हित में कार्य करें और भारतीय कृषि में क्रांति लाएं। श्री चौहान ने कहा कि हमारे यहां लगभग 86% किसान स्मॉल- मार्जिनल फार्मर हैं। हमको खेती का मॉडल ऐसा बनाना पड़ेगा कि किसान एक हेक्टेयर तक की खेती में भी अपनी आजीविका ठीक से चला सकें।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम मिलकर कोई ऐसा रोडमैप बना लें, जिस पर चलकर न केवल भारतीय कृषि और किसान का कल्याण हो सके, बल्कि हम भारत को दुनिया का फूड बास्केट बना दें, दुनिया को अन्न खिलाएं, एक्सपोर्ट करें।

श्री चौहान ने भारत को दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हमारे किसानों की आय बढ़ाने और बदलते परिदृश्य के लिए तकनीकी उन्नति को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी कृषि नीति और शोध छोटे और सीमांत किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि के परिदृश्य को पूरी तरह से बदलना मेरी जिद है। मैं किसान और विज्ञान को जोड़ना चाहता हूं। किसान को हमें विज्ञान से जोड़ना है और इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र बहुत उपयोगी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विजन तथा मिशन कृषि के क्षेत्र को आगे बढ़ाना और किसान का कल्याण करना है। मैं जिस दिन से कृषि मंत्री बना हूं, तभी से दिन-रात यही सोच रहा हूं कि किसानों के जीवन को कैसे और बेहतर बनाएं।

इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. आर.एस. परोदा पूर्व महानिदेशक ICAR, डॉ. रमेशचंद सदस्य नीति आयोग और डॉ. हिमांशु पाठक सचिव DARE और महानिदेशक ICAR ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। IARI के निदेशक डा. ए.के. सिंह, DDG डा. आर.सी. अग्रवाल आदि भी उपस्थित थे। इन विशेषज्ञों ने भारतीय कृषि की चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन चर्चा की और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. आर. एस. परोदा ने कहा कि भारतीय कृषि को नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की सहायता से उन्नत करना समय की मांग है। हमें किसानों के साथ मिलकर नई तकनीकों का परीक्षण और कार्यान्वयन करना होगा, जिससे उनकी पैदावार और आय में वृद्धि हो।

डॉ. रमेशचंद ने इस बात पर जोर दिया कि नीति निर्माण में किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनका समाधान ढूंढना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों को छोटे और सीमांत किसानों के अनुकूल बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें सुनिश्चित करना होगा कि वे नवीनतम तकनीकों और संसाधनों का उपयोग कर सकें।

डॉ. हिमांशु पाठक ने कृषि क्षेत्र में उन्नति के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और किसानों के बीच सहयोग से ही हम भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।

सम्मेलन के दौरान, यह निष्कर्ष निकाला गया कि किसानों की आय को बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। प्रतिभागियों ने भारतीय कृषि में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोग का आश्वासन दिया।

सम्मेलन में उपस्थित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए और भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया। उन्होंने कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और किसानों की सहायता के लिए नई योजनाओं और कार्यक्रमों की शुरुआत की बात की।

इस बैठक में उपस्थित सभी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने मिलकर भारतीय कृषि के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार और वैज्ञानिक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश का कर्तव्य है कि वे किसानों की मदद करें और भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएं।

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Friday, June 21, 2024

विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड व क्षेत्रीय विधायक कोटद्वार ने आपदा ग्रसित क्षेत्रों का निरीक्षण कर विभाग को दिए जरूरी निर्देश।

 


*21 जून, 2024 कोटद्वार*


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विधानसभा अध्यक्ष व कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने पिछले वर्षा ऋतु के दौरान आपदा से ग्रसित स्थानों पर पहुंचकर सुरक्षा एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।  


गत वर्ष के त्रासदी से सबक लेकर इस वर्ष  की तैयारी कई महीने पहले से शुरू कर दी है ऋतु खण्डूडी भूषण ने। मालन और सुखरों नदी पर हो रहे चैनेलाइजिंग कार्य का निरीक्षण कर विभाग को कार्य में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया।


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया पिछली वर्षा में भारी बारिश होने के कारण कोटद्वार में कई जगह नुकसान हुआ है। लोगों के घर जमीन इत्यादि बह गए थे, जिनकी सुरक्षा हेतु कई जगह सुरक्षा दीवार बनने का कार्य गतिमान है। अभी भी कई जगह कार्य पूर्ण ना होने के कारण वहां पर नदी को चैनलाइज करना बहुत जरूरी है।

उन्होंने मालन व सुखरो नदी में पोकलैंड, जेसीबी आदि मशीन की संख्या बढ़ा कर कार्य में तेजी लाने के लिए विभाग को निर्देशित किया। 


विधानसभा अध्यक्ष ने मावाकोट से कण्वाश्रम तक बन रही इंटर लॉकिंग रोड का भी निरीक्षण किया और कार्य की गुणवनता का ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द कार्य समाप्त करने के आदेश दिए। 


विधानसभा अध्यक्ष ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख़्त निर्देश दिया है कि सुरक्षा कार्य तय समय से पहले ही पूर्ण किए जाए।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कोटद्वार विधानसभा में आयोजित योग कार्यक्रमों में किया प्रतिभाग।*

 


*21जून 2024 कोटद्वार*



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21 जून, कोटद्वार। विधानसभा अध्यक्ष व विधायक कोटद्वार ऋतु खण्डूडी भूषण ने इस वर्ष अपने कोटद्वार विधानसभा वासियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मालवीय उद्यान कोटद्वार में भारत स्वाभिमान न्यास कोटद्वार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रतिभाग कर योगाभ्यास किया। विधानसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया व सभी प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं दी।


ऋतु खण्डूडी भूषण ने सभी को संबोधित करते हुए बताया की योग का मानव जीवन में बहुत महत्व है। क्योंकि इसका संबंध मनुष्य के शरीर और मन को स्वस्थ रखने से संबंधित है। प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों द्वारा योग किया जाता रहा है। 


ऋतु खण्डूडी ने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्ष 2014 में योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए धन्यवाद व आभार व्यक्त किया। उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव को भी बधाई दी की उनकी इच्छा शक्ति से आज पूरे विश्व में योग का फिर से प्रचार-प्रसार हुआ है। उन्होंने कोटद्वार एवं प्रदेश में संचालित सभी योग शिक्षा केंद्र को बधाई देते हुए कहा की आपके माध्यम से लोगों को एक नई ऊर्जा मिलती है।


साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने कैम्प कार्यालय पीडब्ल्यूडी में महिला मोर्चा भाजपा कोटद्वार द्वारा आयोजित योग शिविर में भी पहुंचकर योगाभ्यास किया ।


इस अवसर पर अध्यक्ष गौ सेवा आयोग राजेंद्र अंथवाल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य भगवती प्रसाद जुयाल, जिला प्रभारी दिनेश चंद्र, योग शिक्षक ममता भंडारी, नगर अध्यक्ष भाजपा पंकज भाटिया, सुनीता कोटनाला, हरी सिंह पुंडीर, सिमरन बिष्ट, नीरू बाला खंतवाल, रामेश्वरी देवी, नीना बेंजवाल, विजय लखेड़ा आदि लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व

✍️ संपादकीय विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा केवल कानू...