Saturday, June 22, 2024

सीसीआरएएस विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से "पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग्स" पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित करेगा

 


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आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष स्वायत्त संगठनकेंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), 24 जून2024 को "पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग्स" पर इंडिया हैबिटेट सेंटरनई दिल्ली में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन-दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय) और डब्ल्यूएचओ-जीटीएमसी (वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र) के सहयोग से आयोजित होने वाला यह महत्वपूर्ण आयोजनपारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान को वैश्विक मानकों और प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने में एक अग्रणी प्रयास को चिन्हित करता है।

अपनी तरह की यह पहली परामर्श बैठकनीति निर्धारकोंशैक्षिक संस्थानोंशोधकर्ताओंरोगियों और उद्योग हितधारकों सहित भारत में पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर एक साथ लाएगी। इसका उद्देश्य आयुर्वेदसिद्धयूनानी और होम्योपैथी जैसी विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करना और उनको प्राथमिकता देना है। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा में डब्ल्यूएचओ के मैनडेट के अनुसार हैजैसा कि सीसीआरएएस के महानिदेशक वैद्य रबीनारायण आचार्य ने बताया है।

हाल ही मेंहैदराबाद में सीसीआरएस के एक परिधीय संस्थान, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (एनआईआईएमएचको "पारंपरिक चिकित्सा में मौलिक और साहित्यिक अनुसंधान" (डब्ल्यूएचओसीसी इंड-177) के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ सहयोग करने वाले केंद्र के रूप में नामित किया गया है। यह पदनाम आगामी अनुसंधान प्राथमिकता सेटिंग एक्सरसाइज के महत्व को रेखांकित करता हैजो अगले दशक के लिए एक अनुसंधान रोडमैप तैयार करेगा। इसका उद्देश्य धन का प्रभावकारी उपयोग सुनिश्चित करना और पारंपरिक चिकित्सा के अंदर आवश्यकता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करना हैताकि इसकी वैश्विक स्वीकृति और एकीकरण का समर्थन किया जा सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और प्रोफेसर (वैद्य) रबीनारायण आचार्य की अगुवाई मेंसीसीआरएएस ने पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को शुरू किया है। इस बैठक में देश भर के पारंपरिक चिकित्सा प्रतिनिधियों की भागीदारी होगीजिनमें आयुष मंत्रालय के सलाहकार और संयुक्त सचिवनीति आयोग के प्रतिनिधिसभी पांच आयुष अनुसंधान परिषदों के महानिदेशकराष्ट्रीय आयोगों (एनसीआईएसएम और एनसीएच) के अध्यक्ष, आयुष/आयुर्वेद विश्वविद्यालयों के कुलपतिआयुष मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय संस्थानों के निदेशक,  पीएचएफआईआरआईएस-एफआईटीएमसीएसआईआरबीआईएसआईसीएमआरडब्ल्यूएचओआयुष फार्मास्युटिकल उद्योगटीडीयू से एथनोफार्माकोलॉजी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

संबोधित किए जाने वाले प्रमुख विषयों में औषधीय पौधे अनुसंधानगुणवत्तासुरक्षा और प्रभावकारिता अध्ययनपूर्व-नैदानिक ​​​​मान्यताएंपारंपरिक दवाओं का तर्कसंगत उपयोग,  नैदानिक ​​​​परीक्षण निगरानी​​​​चिकित्सा मानव विज्ञान और प्राचीन चिकित्सा साहित्य का डिजिटलीकरण शामिल हैं। आयुष क्षेत्र के लगभग 100 हितधारक/विशेषज्ञ इस बैठक में हिस्सा लेंगे, जो होने वाले संवाद को व्यापक और समावेशी बनाना सुनिश्चित करेगा।

इस एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा में एक दशक लंबी अनुसंधान रणनीति के लिए आरंभिक तैयारी का आधार बनानाहितधारकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने प्रयासों को संरेखित करना है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण से वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की उन्नति और एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा - छोटे किसानों के हित में कार्य करें कृषि वैज्ञानिक



केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में हुआ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) का पूर्व छात्र सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व छात्रों का सम्मेलन आज पूसा, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से अपील की कि वे छोटे और सीमांत किसानों के हित में कार्य करें और भारतीय कृषि में क्रांति लाएं। श्री चौहान ने कहा कि हमारे यहां लगभग 86% किसान स्मॉल- मार्जिनल फार्मर हैं। हमको खेती का मॉडल ऐसा बनाना पड़ेगा कि किसान एक हेक्टेयर तक की खेती में भी अपनी आजीविका ठीक से चला सकें।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम मिलकर कोई ऐसा रोडमैप बना लें, जिस पर चलकर न केवल भारतीय कृषि और किसान का कल्याण हो सके, बल्कि हम भारत को दुनिया का फूड बास्केट बना दें, दुनिया को अन्न खिलाएं, एक्सपोर्ट करें।

श्री चौहान ने भारत को दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हमारे किसानों की आय बढ़ाने और बदलते परिदृश्य के लिए तकनीकी उन्नति को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी कृषि नीति और शोध छोटे और सीमांत किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि के परिदृश्य को पूरी तरह से बदलना मेरी जिद है। मैं किसान और विज्ञान को जोड़ना चाहता हूं। किसान को हमें विज्ञान से जोड़ना है और इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र बहुत उपयोगी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विजन तथा मिशन कृषि के क्षेत्र को आगे बढ़ाना और किसान का कल्याण करना है। मैं जिस दिन से कृषि मंत्री बना हूं, तभी से दिन-रात यही सोच रहा हूं कि किसानों के जीवन को कैसे और बेहतर बनाएं।

इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. आर.एस. परोदा पूर्व महानिदेशक ICAR, डॉ. रमेशचंद सदस्य नीति आयोग और डॉ. हिमांशु पाठक सचिव DARE और महानिदेशक ICAR ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। IARI के निदेशक डा. ए.के. सिंह, DDG डा. आर.सी. अग्रवाल आदि भी उपस्थित थे। इन विशेषज्ञों ने भारतीय कृषि की चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन चर्चा की और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. आर. एस. परोदा ने कहा कि भारतीय कृषि को नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की सहायता से उन्नत करना समय की मांग है। हमें किसानों के साथ मिलकर नई तकनीकों का परीक्षण और कार्यान्वयन करना होगा, जिससे उनकी पैदावार और आय में वृद्धि हो।

डॉ. रमेशचंद ने इस बात पर जोर दिया कि नीति निर्माण में किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनका समाधान ढूंढना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों को छोटे और सीमांत किसानों के अनुकूल बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें सुनिश्चित करना होगा कि वे नवीनतम तकनीकों और संसाधनों का उपयोग कर सकें।

डॉ. हिमांशु पाठक ने कृषि क्षेत्र में उन्नति के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और किसानों के बीच सहयोग से ही हम भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।

सम्मेलन के दौरान, यह निष्कर्ष निकाला गया कि किसानों की आय को बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। प्रतिभागियों ने भारतीय कृषि में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोग का आश्वासन दिया।

सम्मेलन में उपस्थित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए और भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया। उन्होंने कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और किसानों की सहायता के लिए नई योजनाओं और कार्यक्रमों की शुरुआत की बात की।

इस बैठक में उपस्थित सभी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने मिलकर भारतीय कृषि के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार और वैज्ञानिक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश का कर्तव्य है कि वे किसानों की मदद करें और भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएं।

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Friday, June 21, 2024

विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड व क्षेत्रीय विधायक कोटद्वार ने आपदा ग्रसित क्षेत्रों का निरीक्षण कर विभाग को दिए जरूरी निर्देश।

 


*21 जून, 2024 कोटद्वार*


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विधानसभा अध्यक्ष व कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने पिछले वर्षा ऋतु के दौरान आपदा से ग्रसित स्थानों पर पहुंचकर सुरक्षा एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।  


गत वर्ष के त्रासदी से सबक लेकर इस वर्ष  की तैयारी कई महीने पहले से शुरू कर दी है ऋतु खण्डूडी भूषण ने। मालन और सुखरों नदी पर हो रहे चैनेलाइजिंग कार्य का निरीक्षण कर विभाग को कार्य में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया।


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया पिछली वर्षा में भारी बारिश होने के कारण कोटद्वार में कई जगह नुकसान हुआ है। लोगों के घर जमीन इत्यादि बह गए थे, जिनकी सुरक्षा हेतु कई जगह सुरक्षा दीवार बनने का कार्य गतिमान है। अभी भी कई जगह कार्य पूर्ण ना होने के कारण वहां पर नदी को चैनलाइज करना बहुत जरूरी है।

उन्होंने मालन व सुखरो नदी में पोकलैंड, जेसीबी आदि मशीन की संख्या बढ़ा कर कार्य में तेजी लाने के लिए विभाग को निर्देशित किया। 


विधानसभा अध्यक्ष ने मावाकोट से कण्वाश्रम तक बन रही इंटर लॉकिंग रोड का भी निरीक्षण किया और कार्य की गुणवनता का ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द कार्य समाप्त करने के आदेश दिए। 


विधानसभा अध्यक्ष ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख़्त निर्देश दिया है कि सुरक्षा कार्य तय समय से पहले ही पूर्ण किए जाए।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कोटद्वार विधानसभा में आयोजित योग कार्यक्रमों में किया प्रतिभाग।*

 


*21जून 2024 कोटद्वार*



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21 जून, कोटद्वार। विधानसभा अध्यक्ष व विधायक कोटद्वार ऋतु खण्डूडी भूषण ने इस वर्ष अपने कोटद्वार विधानसभा वासियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मालवीय उद्यान कोटद्वार में भारत स्वाभिमान न्यास कोटद्वार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रतिभाग कर योगाभ्यास किया। विधानसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया व सभी प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं दी।


ऋतु खण्डूडी भूषण ने सभी को संबोधित करते हुए बताया की योग का मानव जीवन में बहुत महत्व है। क्योंकि इसका संबंध मनुष्य के शरीर और मन को स्वस्थ रखने से संबंधित है। प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों द्वारा योग किया जाता रहा है। 


ऋतु खण्डूडी ने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्ष 2014 में योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए धन्यवाद व आभार व्यक्त किया। उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव को भी बधाई दी की उनकी इच्छा शक्ति से आज पूरे विश्व में योग का फिर से प्रचार-प्रसार हुआ है। उन्होंने कोटद्वार एवं प्रदेश में संचालित सभी योग शिक्षा केंद्र को बधाई देते हुए कहा की आपके माध्यम से लोगों को एक नई ऊर्जा मिलती है।


साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने कैम्प कार्यालय पीडब्ल्यूडी में महिला मोर्चा भाजपा कोटद्वार द्वारा आयोजित योग शिविर में भी पहुंचकर योगाभ्यास किया ।


इस अवसर पर अध्यक्ष गौ सेवा आयोग राजेंद्र अंथवाल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य भगवती प्रसाद जुयाल, जिला प्रभारी दिनेश चंद्र, योग शिक्षक ममता भंडारी, नगर अध्यक्ष भाजपा पंकज भाटिया, सुनीता कोटनाला, हरी सिंह पुंडीर, सिमरन बिष्ट, नीरू बाला खंतवाल, रामेश्वरी देवी, नीना बेंजवाल, विजय लखेड़ा आदि लोग उपस्थित रहे।

Thursday, June 20, 2024

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने "नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लिविंग विद नेचर: सॉइल, वाटर, और सोसाइटी इन इकोसिस्टम कंजर्वेशन (LNSWSEC-2024)" हिमालयन कल्चरल सेंटर, देहरादून में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।



20 जून, 2024 – विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने "नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लिविंग विद नेचर: सॉइल, वाटर, और सोसाइटी इन इकोसिस्टम कंजर्वेशन (LNSWSEC-2024)" हिमालयन कल्चरल सेंटर, देहरादून में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।



यह आयोजन भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संघ (IASWC) द्वारा ICAR-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC) के सहयोग से किया जा रहा है। यह सम्मेलन 20-22 जून, 2024 तक चलेगा।


ऋतु खण्डूडी भूषण ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने मुख्य अतिथि के संबोधन में, उन्होंने शोध को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने के महत्व पर जोर दिया, जो किसानों और हितधारकों को लाभान्वित करते हैं, बजाय इसके कि वे केवल शैक्षणिक प्रकाशनों और पुरस्कारों तक सीमित रहें। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों और किसानों की सक्रिय प्रकृति को उजागर किया और संसाधनों के संरक्षण और आजीविका को बढ़ाने के लिए स्पष्ट, वैज्ञानिक रूप से समर्थित मार्गदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और बुजुर्गों की बुद्धिमत्ता को आधुनिक संरक्षण प्रथाओं में एकीकृत करने के महत्व पर भी जोर दिया ताकि प्रकृति के साथ सतत जीवन को बढ़ावा दिया जा सके।


कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सम्मेलन में संदेश उपस्थित लोगों को सुनाया गया जिसमे उन्होंने कार्यक्रम की सफलता की कामना की।


इस सम्मेलन में ICAR संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे NBA और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे INBAR से लगभग 350 वैज्ञानिक और विद्वान, साथ ही राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से 150 प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। वे वैज्ञानिकों के साथ बातचीत कर रहे हैं और नई ज्ञान और तकनीकों को प्राप्त करने के लिए प्रदर्शनी स्टालों का अन्वेषण कर रहे हैं।

Tuesday, June 18, 2024

आवंटित बजट समय पर खर्च करें अधिकारी डॉ. धन सिंह रावत






*समीक्षा बैठक में बजट खर्च की धीमी गति पर जताई नाराजगी*


*कहा बजट खर्च का आगामी सौ दिनों का रोडमैप तैयार करें विभाग*


देहरादून, 18 जून 2024


वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु समस्त संबंधित विभागों को आवंटित बजट समय पर खर्च करने के निर्देश दे दिये गये हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों को बजट खर्च का योजनावार आगाती सौ दिनों का रोडमैप तैयार करने को भी कहा गया है ताकि सरकार द्वारा आवंटित बजट समय पर खर्च करने के साथ ही आय-व्यय में पादर्शिता भी बनी रहे।


सूबे के कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास पर अपने विभागों को वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु आवंटित बजट की समीक्षा की। जिसमें उन्होंने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विद्यालयी शिक्षा संस्कृत शिक्षा उच्च शिक्षा समग्र शिक्षा एनएचएम आदि विभागों के योजनावार प्राप्त कुल बजट के सापेक्ष खर्च का ब्योरा तलब किया। वार्षिक आय-व्यय की विभागीय समीक्षा के दौरान डा. रावल ने बजट खर्च की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों से नाराजगी जताते हुये बजट खर्च की गति बढ़ाने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने इस संबंध में विभागाध्यक्षों का स्पष्टीकरण मांगने के भी निर्देश दिये। डा. रावत ने कहा कि सरकार के पास जनकल्याण की योजनाओं के लिये बजट की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद कई विभागीय अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन व बजट खर्च करने में फिसड्‌डी साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो विभाग समय पर बजट खर्च नहीं करेगा उनके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जायेगी। डा. रावत ने विभागों में समय पर बजट खर्च करने के लिये आगामी सौ दिन का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिये।


बैठक में महानिदेशक स्वास्थ्य डा. विनीता शाह निदेशक वित्त स्वास्थ्य विभाग एवं अपर सचिव वित्त अमिता जोशी वित्त नियंत्रक संस्कृत शिक्षा लखेन्द्र गोथियाल, वित्त नियंत्रक विद्यालयी शिक्षा हेमेन्द्र गंगवार वित्त नियंत्रक चिकित्सा शिक्षा बी.एन. पाण्डेय, वित्त नियंत्रक एनएचएम दिपाली भरने सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे

मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने आज सचिवालय में खनन विभाग की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में प्रतिभाग किया।



इस दौरान सीएस ने राज्य में अवैध खनन पर सख्त निगरानी तथा वैध खनन से राजस्व बढ़ाने के लिए एमडीटीएसएस (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एण्ड सर्विलेन्स सिस्टम ) को देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व उधमसिंह नगर के 40 चेक गेट पर लगाने हेतु लगभग 93 करोड़ रूपये के प्रस्ताव पर सहमति दी। एमडीटीएसएस के तहत खनन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी हेतु एएनपीआर कैमरा, बुलेट कैमरा, आरएफआईडी राडार, एलईडी फलड लाइट जैसी अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ ही देहरादून में माइनिंग स्टेट कन्ट्रोल सेन्टर (एमएससीसी) स्थापित किया जाएगा।  इसके साथ ही देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल तथा उधमसिंह नगर के जिला मुख्यालयों में मिनी कमान्ड सेन्टर स्थापित किए जाएंगे।  

मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने कहा कि एमडीटीएसएस के माध्यम से खनिजों ( Mineral ) के गैर कानूनी तथा अनाधिकृत परिवहन, खनिजों के अत्यधिक खनन या निष्कासन, खनिजों को ले जाने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग, ट्रांजिट पास में दी गई डिलीवरी लोकेशन के विपरीत डिलीवरी, अवैध खनन व अन्य कारणों से राजस्व हानि आदि पर निरन्तर निगरानी सुनिश्चित होगी। मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में खनन से जुड़े सभी हितधारकों से प्रभावी समन्वय कर उनका सहयोग लेने तथा जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।  सीएस ने खनन क्षेत्रों में कार्य करने वाले श्रमिकों के कल्याण एवं विकास तथा उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने हेतु कार्ययोजना बनाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने राज्य में ईंट के भट्टों में कार्य करने वाले मजदूरों के विकास एवं कल्याण हेतु भी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खनन क्षेत्रों एवं ईट के भट्टों में कार्य करने वाले मजदूरों के लिए मेडिकल एवं बीमा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सचिव श्री बृजेश कुमार सन्त, अपर सचिव डा. अहमद इकबाल सहित खनन एवं वित्त विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व

✍️ संपादकीय विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा केवल कानू...