Sunday, February 2, 2025

उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2024-25

 उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹3,94,675 करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% की वृद्धि को दर्शाता है। ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


यह अनुमान राज्य की आर्थिक प्रगति के अनुरूप है, क्योंकि पिछले दो दशकों में उत्तराखंड के GSDP में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2000 में, राज्य के गठन के समय GSDP ₹14,501 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर ₹3,46,000 करोड़ हो गया। ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


2023-24 में प्रति व्यक्ति GSDP ₹2,95,751 अनुमानित किया गया था, जो 2017-18 से 7% की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


राज्य की आर्थिक वृद्धि में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान रहा है, जिसमें पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान है। दो साल पहले पर्यटन का GSDP में योगदान 37% था, जो अब बढ़कर 43.7% हो गया है। ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


ये आंकड़े उत्तराखंड की मजबूत आर्थिक विकास यात्रा और राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

The Gross State Domestic Product (GSDP) of Uttarakhand

 The Gross State Domestic Product (GSDP) of Uttarakhand for the fiscal year 2024-25 is projected to be ₹3,94,675 crore, reflecting a 14% growth over the previous year. ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


This projection aligns with the state's economic trajectory, as the GSDP has seen significant growth over the past two decades. In 2000, during its formation, Uttarakhand's GSDP was ₹14,501 crore, which increased to ₹3,46,000 crore by 2023-24. ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


The per capita GSDP in 2023-24 was estimated at ₹2,95,751, marking an annualized increase of 7% since 2017-18. ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


The state's economic growth has been driven by various sectors, with tourism playing a significant role. Two years ago, tourism accounted for 37% of the GSDP, and that contribution has now risen to 43.7%. ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


These figures underscore Uttarakhand's robust economic development and its efforts to enhance various sectors contributing to the state's economy. 

हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड नगर निकाय चुनावों की समीक्षा

हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड नगर निकाय चुनावों में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य की 11 नगर निगम सीटों में से 10 पर भाजपा के मेयर प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। 

मुख्य बिंदु:

भाजपा की बढ़त: देहरादून नगर निगम में, भाजपा के सौरभ थपलियाल ने एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस के वीरेंद्र पोखरियाल दूसरे स्थान पर रहे। 

कांग्रेस का प्रदर्शन: कांग्रेस ने कुछ सीटों पर प्रतिस्पर्धा की, लेकिन अधिकांश नगर निगमों में भाजपा के सामने पीछे रही।

क्षेत्रीय दलों की स्थिति: उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। ये दल न केवल एक भी सीट जीतने में असफल रहे, बल्कि कई स्थानों पर उनकी जमानत भी जब्त हो गई। 

मतदान प्रतिशत: राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार कुल मतदान प्रतिशत 65.41% रहा, जो पिछले निकाय चुनाव (2018) की तुलना में 4.38% कम है। 


कुल मिलाकर, इन चुनावों में भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि कांग्रेस को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। क्षेत्रीय दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का अवसर प्रस्तुत करता है, जिससे वे अपनी राजनीतिक स्थिति को पुनः स्थापित करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर सकें।

38वें राष्ट्रीय खेल 2025 - उत्तराखंड


उत्तराखंड में पहली बार आयोजित हो रहे 38वें राष्ट्रीय खेल 28 जनवरी से शुरू हुए हैं और ये 14 फरवरी 2025 तक चलेंगे। यह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन है जिसमें देशभर के खिलाड़ियों का जमावड़ा लगा है।

मुख्य विशेषताएं:

  1. प्रतिभागिता:

    • 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 11,000 से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।
    • कुल 32 खेल विधाओं और 4 प्रदर्शन खेलों में मुकाबले हो रहे हैं, जिनमें मल्लखंभ, कलरिपयट्टू, राफ्टिंग, और योगासन जैसे पारंपरिक खेल भी शामिल हैं।
  2. प्रमुख स्थल:

    • प्रतियोगिताएं देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, और पिथौरागढ़ जैसे विभिन्न शहरों में आयोजित की जा रही हैं।
  3. पदक तालिका (Medal Tally):

    • सेवा खेल नियंत्रण बोर्ड (SSCB) फिलहाल पदक तालिका में शीर्ष पर है, जिसके खाते में 14 स्वर्ण, 7 रजत, और 5 कांस्य पदक हैं।
    • कर्नाटक दूसरे स्थान पर है।
  4. मास्कॉट और थीम:

    • आधिकारिक मास्कॉट है "मौली" (Monal पक्षी), जो उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है।
    • खेलों की थीम है "संकल्प से शिखर तक", जो दृढ़ निश्चय और उत्कृष्टता को दर्शाती है।
  5. प्रसारण और कवरेज:

    • राष्ट्रीय खेलों की लाइव कवरेज विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
    • आप यहाँ क्लिक करके तैराकी (Aquatics) के फाइनल्स को लाइव देख सकते हैं।

The 38th National Games are currently underway in Uttarakhand,

The 38th National Games are currently underway in Uttarakhand, having commenced on January 28 and scheduled to conclude on February 14, 2025. This marks the first time Uttarakhand is hosting this prestigious multi-sport event.

Key Highlights:

  • Participation: Over 11,000 athletes from 37 states and union territories are competing in 32 sports disciplines and 4 demonstration events, including traditional sports like Mallakhamb, Kalarippayattu, Rafting, and Yogasana.

  • Venues: Competitions are being held across multiple cities in Uttarakhand, including Dehradun, Haridwar, Rishikesh, and Pithoragarh.

  • Medal Tally: As of now, the Services Sports Control Board (SSCB) leads the medal tally with 14 gold, 7 silver, and 5 bronze medals. Karnataka follows in second place.

  • Mascot and Theme: The official mascot is "Mouli," the Monal, symbolizing the state's natural beauty. The theme "Sankalp Se Shikhar Tak" reflects determination and excellence.


भारत का केंद्रीय बजट 2025-26: मुख्य बिंदु


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को संसद में केंद्रीय बजट 2025-26 पेश किया। इस बजट में आर्थिक विकास को गति देने और मध्यम वर्ग को राहत प्रदान करने के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं।

मुख्य विशेषताएं:

  1. आयकर में बड़े बदलाव:

    • व्यक्तिगत आयकर में कटौती की गई है ताकि घरेलू मांग को बढ़ावा दिया जा सके।
    • कर मुक्त आय सीमा (Tax Exemption Limit) बढ़ा दी गई है।
    • उच्च आय वर्ग के लिए टैक्स दरों में कमी की गई है, जिससे बचत और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
  2. कृषि क्षेत्र के लिए पहल:

    • दालों और कपास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 6 वर्षीय योजना शुरू की गई है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
    • राज्य एजेंसियों द्वारा दालों की खरीद गारंटीड मूल्य पर की जाएगी, जिससे किसानों को समर्थन मिलेगा।
  3. बुनियादी ढांचे में निवेश:

    • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में मामूली वृद्धि की गई है ताकि टैक्स कटौती से होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई की जा सके।
    • हालांकि, इस कदम से इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयर बाजार में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
  4. सामाजिक कल्याण योजनाएं:

    • गरीबों, युवाओं, किसानों, और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शुरू की गई हैं।
    • उच्च उपज वाली फसलों को बढ़ावा देने, निर्यात को बढ़ाने, और बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के उपाय किए गए हैं।
  5. आर्थिक विकास पर दृष्टिकोण:

    • बजट में रोजगार सृजन और वेतन वृद्धि के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं होने पर कुछ विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है।
    • बजट को अल्पकालिक आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाला माना जा रहा है, लेकिन दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान कम है।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, बजट 2025-26 सरकार के तत्काल आर्थिक विकास और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। इसमें कर राहत, कृषि समर्थन, और बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रमुखता दी गई है।

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Saturday, February 1, 2025

पेड़ गांव रह जाते हैं और फल शहर आ जाते हैं"

"पेड़ गांव रह जाते हैं और फल शहर आ जाते हैं" एक गहरी और अर्थपूर्ण कहावत है, जो समाज, अर्थव्यवस्था, और विकास के असंतुलन को दर्शाती है। इसका भावार्थ यह है कि:

  • प्राकृतिक संसाधन और उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं, लेकिन उनका लाभ शहरी क्षेत्रों को मिलता है।
  • मेहनत करने वाले किसान और ग्रामीण लोग पेड़ों की तरह अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, पर उनकी मेहनत के फल का असली फायदा व्यापारी, उद्योगपति या शहरी बाजार उठा लेते हैं।
  • यह कहावत ग्रामीण-शहरी असमानता और आर्थिक विसंगति को भी दर्शाती है, जहाँ गाँव उत्पादन केंद्र होते हैं, पर समृद्धि और सुविधाएं शहरों में केंद्रित रहती हैं।


न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...