यह स्थिति आमतौर पर उन विभागों में देखी जाती है जहां कर्मचारियों की संख्या अधिक होती है और कार्यों की प्रकृति ऐसी होती है कि अन्य व्यय (जैसे परियोजना विकास या इंफ्रास्ट्रक्चर) की तुलना में वेतन का हिस्सा भारी होता है। नीचे कुछ ऐसे प्रमुख विभागों का उल्लेख किया गया है:
### 1. **शिक्षा विभाग (School Education Department)**
- **प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग** उत्तराखंड में सबसे बड़ा नियोक्ता है। राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों और अन्य शैक्षिक स्टाफ की तैनाती होती है। शिक्षा विभाग के बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है।
- शिक्षा विभाग में आधारभूत ढांचे के निर्माण और शैक्षिक सुधारों के लिए योजनाएँ तो चलती हैं, लेकिन तनख्वाह का हिस्सा भारी होता है।
### 2. **स्वास्थ्य विभाग (Health Department)**
- उत्तराखंड का **स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग** भी एक बड़े कर्मचारियों वाला विभाग है। इसमें डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, और प्रशासनिक कर्मचारियों की बड़ी संख्या होती है।
- राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की जाती है, जिससे विभाग के बजट का बड़ा हिस्सा वेतन में चला जाता है।
### 3. **पुलिस विभाग (Police Department)**
- **उत्तराखंड पुलिस विभाग** के बजट का अधिकांश हिस्सा पुलिसकर्मियों के वेतन पर खर्च होता है। पुलिसकर्मियों की संख्या को बनाए रखना और उनकी तैनाती राज्य के सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
- इसके अलावा, पुलिस विभाग में अन्य खर्चों की तुलना में वेतन और पेंशन जैसे स्थाई खर्चों का हिस्सा भारी होता है।
### 4. **वन विभाग (Forest Department)**
- उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है, और इस कारण **वन विभाग** में भी कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है। वन संरक्षक, वनरक्षक, और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन पर विभाग का बजट खर्च होता है।
- वन विभाग में वन सुरक्षा और वन संरक्षण के कार्यों में लगे कर्मचारियों की संख्या अधिक होती है, जिससे वेतन का बजट हिस्सा भी बढ़ता है।
### 5. **राजस्व विभाग (Revenue Department)**
- **राजस्व विभाग** का बजट भी मुख्य रूप से कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। इसमें पटवारी, तहसीलदार, और अन्य प्रशासनिक कर्मचारी शामिल होते हैं, जो राज्य के राजस्व कार्यों का प्रबंधन करते हैं।
- विभागीय कार्यों में व्यावसायिक खर्च की तुलना में वेतन खर्च अधिक होता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
### 6. **सिंचाई और लोक निर्माण विभाग (Irrigation & PWD)**
- **लोक निर्माण विभाग (PWD)** और **सिंचाई विभाग** में बड़ी संख्या में इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और मजदूरों की तैनाती होती है। विभागों के बजट का बड़ा हिस्सा तनख्वाह और मजदूरी पर खर्च होता है, विशेषकर उन परियोजनाओं में जहां मानव संसाधन का ज्यादा इस्तेमाल होता है।
### 7. **स्थानीय प्रशासन (Urban Development Department)**
- **शहरी विकास और नगर पालिका विभाग** के अंतर्गत आने वाले स्थानीय प्रशासनिक निकायों (जैसे नगर निगम, नगर पालिका) में भी कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है। नगरपालिकाओं में सफाई कर्मचारी, क्लर्क, इंजीनियर, और अन्य अधिकारी तैनात होते हैं, जिनकी तनख्वाह पर बजट का अधिकांश हिस्सा खर्च होता है।
### निष्कर्ष:
उत्तराखंड के इन विभागों में कर्मचारियों की बड़ी संख्या और उनके कार्य की व्यापकता के कारण बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन और भत्तों पर खर्च होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सरकारी सेवाएँ सुचारू रूप से चलती रहें, कर्मचारियों के वेतन का प्रावधान आवश्यक है, लेकिन यह स्थिति कभी-कभी विकास और बुनियादी ढांचे के लिए कम बजट छोड़ देती है।
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