Wednesday, July 3, 2024

भारत सरकार और एडीबी ने महामारी के खिलाफ तैयारियों और जवाबी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए 170 मिलियन डॉलर के ऋण पत्र पर हस्ताक्षर किए

 



भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारियों और भविष्य की महामारियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई क्षमता को एकीकृत तथा मजबूत करने के लिए 170 मिलियन डॉलर के नीति-आधारित ऋण पत्र पर हस्ताक्षर किए।

भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एडीबी की ओर से एडीबी के इंडिया रेजिडेंट मिशन की निदेशक सुश्री मियो ओका ने सुदृढ़ और परिवर्तनकारी स्वास्थ्य प्रणाली कार्यक्रम के लिए मजबूत और मापनीय कार्रवाई (उप-कार्यक्रम 1)’ पर हस्ताक्षर किए।

सुश्री मुखर्जी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरानसरकार ने अपनी महामारी के खिलाफ तैयारियों और जवाबी कार्रवाई क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने के लिए कई तौर-तरीकों को अपनाया। उन्होंने कहा कि एडीबी कार्यक्रम रोग निगरानी को और मजबूत करनेस्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जलवायु-सहनीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवा वितरण को बढ़ावा देने में सरकार के चल रहे प्रयासों में मदद करेगा।

सुश्री ओका ने कहा, "यह कार्यक्रम भारत सरकार के साथ एडीबी की साझेदारी पर आधारित हैताकि देश की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जा सके और परिवर्तनकारी समाधान अपनाए जा सकें।" "इस नीति-आधारित ऋण के माध्यम सेएडीबी सरकार को नीतिगतविधायी और संस्थागत शासन और संरचनाओं की कमियों को दूर करने में मदद करेगा और महामारी के खिलाफ तैयारी और जवाबी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करने के भारत के लक्ष्य में योगदान देगा।"

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017; प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम)राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन (एचआरएच) को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों सहित प्रमुख सरकारी योजनाओं और पहलों पर केन्द्रित होगा। कार्यक्रम के माध्यम से लक्षित सुधार क्षेत्रों में शामिल हैं: (i) मजबूत रोग निगरानी और बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई, (ii) स्वास्थ्य के लिए मजबूत मानव संसाधनऔर (iii) विस्तारित जलवायु सहनीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और अभिनव सेवा वितरण।

यह कार्यक्रम राज्यसंघ और महानगर स्तर पर संक्रामक रोग निगरानी के लिए प्रयोगशाला नेटवर्क स्थापित करने तथा गरीबोंमहिलाओं और अन्य कमजोर समूहों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी और समन्वय के संदर्भ में मजबूत डेटा प्रणाली तैयार करके सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए रोग निगरानी प्रणालियों को मजबूत करेगा। यह कार्यक्रम भारत के वन हेल्थ दृष्टिकोण के कार्यान्वयन और उभरते संक्रामक रोगों के लिए इसकी बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई में सुधार करेगा।

एडीबी नीति सुधारों का समर्थन करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि पर्याप्त और सक्षम स्वास्थ्य पेशेवर और कर्मचारी हों। इसमें ऐसे कानून शामिल हैं, जो नर्सोंसहायिकाओंसंबद्ध कर्मचारियों और डॉक्टरों की शिक्षासेवाओं और पेशेवर आचरण के मानकों को विनियमित करेंगे और बनाए रखेंगे।

यह कार्यक्रम संक्रामक रोगों और गंभीर बीमारियों के प्रति सेवाओं में सुधार करने के लिए पांच राज्यों और जिला क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉकों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं का प्रबंधन करने में मदद करेगा। यह हरित और जलवायु-सहनीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की स्थापना में अंतर-क्षेत्रीय शासी निकाय और बहु-क्षेत्रीय टास्क फोर्स की सहायता करेगा। सेवा वितरण के लिए अभिनव समाधानों का भी समर्थन किया जाएगा।

Tuesday, July 2, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि बच्चों में कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जच्चा और बच्चा दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम के माध्यम से गर्भवती माताओं का ट्रेकिंग सिस्टम अपडेट रखा जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि एनीमिया  को दूर करने के लिए महिलाओं को मिलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चत की जाए। इसके साथ ही आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चों और माताओं को दिये जाने वाले पुष्टाहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और पुष्टाहार की आकस्मिक रूप से गुणवत्ता जांच भी की जाए।मुख्यमंत्री ने कुपोषण से मुक्ति, मातृ-शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए राज्य के कुछ गांवों को आकांक्षी गांवों के रूप में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को आपसी समन्वय के साथ संचालित किया जाए।इस दौरान बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री आर मीनाक्षी सुंदरम, श्री चन्द्रेश यादव, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास श्री प्रशांत आर्य उपस्थित रहे।

नेशनल डॉक्टर्स डे: नेशनल मेडिकल फोरम एंड प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में एमएक्यू मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया गया

 





#नेशनल मेडिकल फर्म ने 24/7 चेस्ट पेन ऑटोमोबाइल की शुरुआत की 


# 200 से अधिक ग्रैब ने इस कैंप के माध्यम से अपना मेडिकल चेकअप किया 


नई दिल्ली, 1 जुलाई, 2024


नेशनल डॉक्टर्स डे के क्रशर में नेशनल मेडिकल फ़ोर्म और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (पी सीआई) ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के गुट के लिए लिबरल मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया। संजीवन हॉस्पिटल द्वारा इस कार्यक्रम में 200 से अधिक ग्रैब ने अपना मेडिकल चेकअप लॉज आयोजित किया। 


इस मेडिकल चेकअप कैंप में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, ई-एनटी (कान, नाक और गला), जोड़ों के दर्द और शल्य चिकित्सा चेकअप सहित कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगशालाएं शामिल की गईं। इन चेकअप के अलावा ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन (एचबी), ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम), नेत्र परीक्षण, डेंटल चेकअप जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट भी दिए गए। 


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेशनल मेडिकल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल ने भारत में, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में कोरोनरी धमनी रोग की महामारी से सभी को परिचित कराया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, ''भारत में हृदय रोग से पीड़ित लगभग 25% लोग 40 साल से कम उम्र के हैं और दिल की बीमारी से पीड़ित लगभग 50% लोग 50 साल से कम उम्र के हैं।'गलत निदान और उपचार से दिल के दौरे से अधिक व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है।"  


इस कार्यक्रम के दौरान दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएनसी) के अध्यक्ष डॉ. बबेरियन, लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन पुरी, जापानी प्रो. मेडिसन सफदरजंग अस्पताल डॉ. फ़ेज़जीत ने भी अपने विचार साँझा किये। प्रोग्राम के दौरान हार्ट अटैक के मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए कहा, ''युवाओं में हार्ट अटैक के मामले जो बढ़ रहे हैं उन्हें रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बहुत जरूरत है। इसके लिए सभी को संयुक्त रूप से साथ आना होगा।'' " 


इस समस्या से स्नातक के लिए नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 चेस्ट पेन मोबाइल नंबर 1800-3096096 शुरू किया है। इस यूनिवर्सल प्रबंधन संजीवन अस्पताल के सलाहकारों द्वारा, जो दर्द के प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। दिल्ली में दर्द का अनुभव करने वाला कोई भी रोगी रोगी की शिकायत पर निःशुल्क कॉल कर सकता है, जहां एक विशेषज्ञ सलाहकार रोगी की शिकायत सुनेगा और उपचार के लिए उसे स्वास्थ्य सेवा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मांगेगा।  


इस मेडिकल चेकअप कैंप के समर्थन में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गौतम लहरी ने कहा, "नेशनल मेडिकल फ़ोरम और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के बीच यह सहयोगी प्रयास के स्वास्थ्य को प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमारे समाज में अहम भूमिका निभाई है।"


राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस: नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया।  


# नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 सीने में दर्द की हेल्पलाइन शुरू की 


# इस शिविर के माध्यम से 200 से अधिक पत्रकारों ने अपना मेडिकल चेकअप कराया.


नई दिल्ली, 1 जुलाई 2024


राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के अवसर पर, नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सदस्यों के लिए एक मुफ्त चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया। संजीवन हॉस्पिटल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक पत्रकारों ने अपना मेडिकल चेकअप कराया.


इस चिकित्सा जांच शिविर में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, ईएनटी (कान, नाक और गला), जोड़ों के दर्द और सर्जिकल जांच सहित स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर किया गया। इन जांचों के अलावा, रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन (एचबी), ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम), आंखों की जांच, दंत जांच जैसे नैदानिक ​​​​परीक्षण भी किए गए।


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉनेशनल मेडिकल फोरम के अध्यक्ष प्रेम अग्रवाल ने सभी को भारत में, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में कोरोनरी धमनी रोग की बढ़ती महामारी से परिचित कराया। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ''भारत में हृदय रोग से पीड़ित लगभग 25% लोग 40 वर्ष से कम उम्र के हैं और दिल के दौरे से मरने वाले लगभग 50% लोग 50 वर्ष से कम उम्र के हैं। गलत निदान और उचित उपचार की कमी के कारण अधिकांश मामलों में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाती है।"


कार्यक्रम के दौरान दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएनसी) के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी, लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन पुरी, सफदरजंग अस्पताल के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. चरणजीत ने भी अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम के दौरान हार्ट अटैक के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, 'युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बहुत जरूरत है. इसके लिए सभी को मिलकर एकजुट होना होगा। "


इस समस्या से निपटने के लिए नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 सीने में दर्द की हेल्पलाइन 1800-3096096 शुरू की है। इस हेल्पलाइन का प्रबंधन संजीवन अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकारों द्वारा किया जाएगा, जो सीने में दर्द के उचित प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। दिल्ली में सीने में दर्द का अनुभव करने वाला कोई भी मरीज टोल-फ्री हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है, जहां एक विशेषज्ञ सलाहकार मरीज की शिकायत सुनेगा और उसे उचित उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने में मदद करेगा।


इस मेडिकल चेकअप कैंप के समर्थन में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, गौतम लाहिड़ी ने कहा, “नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बीच यह सहयोगात्मक प्रयास पत्रकारों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक अभिन्न अंग हैं।” हमारे समाज का. में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।"

Monday, July 1, 2024

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत राज्य नोडल अधिकारियों और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों के लिए एक पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

 पंचायती राज मंत्रालय



श्री विवेक भारद्वाज ने प्रतिभागियों द्वारा समर्पित और गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया

इस पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विकासात्मक और निदानात्मक दृष्टिकोणों के माध्यम से प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ाना, सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और आवश्यक शासन कौशल को और बेहतर बनाना है


पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने आज (1 जुलाई, 2024) भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए)नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत राज्य नोडल अधिकारियों (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों (एसपीएम) के लिए एक पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

श्री भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में प्रतिभागियों से समर्पण और गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी क्षमता को पहचानने, लोगों की आकांक्षाओं को समझने और अपने प्रदर्शन में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आवश्यक अपार मानवीय क्षमतादृढ़ संकल्प और भावावेशपूर्ण आकांक्षा पर रोशनी डाली।

श्री भारद्वाज ने जोर देते हुए कहा, “पंचायतों के पास संसाधनों और धन की कमी नहीं हैक्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) पहलों में महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। वास्तविक जरूरत इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को जमीनी स्तर पर देखने की है। सचिव महोदय ने मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से गुणवत्ता और ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की वकालत की। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि कैसे सकारात्मक मानसिकता के साथ परिवर्तनकारी प्रथाओं, मजबूत और सार्थक संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं, जो आत्मनिर्भर हैं।

श्री भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग से अनुदान के साथ शुरू की गई परियोजनाओं का उद्घाटन या उनका अनावरण न केवल व्यापक मान्यता प्राप्त करेगा, बल्कि अन्य पंचायतों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने आगे कहा, "स्वामित्व योजना को लागू करके और संपत्ति कर संग्रह की प्रक्रिया को स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) पहलों के साथ जोड़करहम पंचायतों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।" श्री भारद्वाज ने प्रतिभागियों को अन्य पंचायतों को प्रेरित करने के लिए उनके सीखने और अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

आईआईपीए के महानिदेशक श्री एस.एन. त्रिपाठीएमओपीआर के अपर सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमारएमओपीआर के संयुक्त सचिव श्री विकास आनंद और आईआईपीए के प्रोफेसर डॉ. वी.एन. आलोक की उपस्थिति ने इस उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई। 1 जुलाई से 5 जुलाई 2024 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आवासीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम में 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 50 से अधिक राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (एसपीएम) भाग ले रहे हैं।

अपने संबोधन मेंश्री एस. एन. त्रिपाठी ने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) की दिशा में पंचायती राज मंत्रालय की अभिनव पहलों की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कार्रवाई में वैश्विक परिप्रेक्ष्य लाते हुए सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण की अवधारणा के माध्यम से गांवों में समावेशीसमग्र और सतत विकास कार्यों को वैश्विक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में एमओपीआर के दूरदर्शी प्रयासों पर रोशनी डाली। महानिदेशक महोदय ने इस बात पर बल दिया कि मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से पंचायतों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सराहनीय कार्यों के लिए मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने, आईआईएम अहमदाबाद में पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की पंचायती राज मंत्रालय की पहल की सराहना करते हुए, इसे नवप्रवर्तनकारी और पथ-प्रदर्शक बताया।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने अपने भाषण में मंत्रालय द्वारा निरंतर संवादसहायता और आउटरीच के साधन के रूप में ऐसे पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सेवा वितरण, पंचायत विकास योजनाओं (पीडीपी) की गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन पर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से डिजिटल शासन के सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया।

श्री विकास आनंद ने इस तरह के पहले पुनश्चर्या प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालाजिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की क्षमताकौशल विकासनेतृत्व क्षमता और उनके प्रदर्शन को बेहतर करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित सशक्तविकसित और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के सपने को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयासों और निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में नेतृत्व कौशलटीमवर्कसंघर्ष प्रबंधनसंचार कौशलमीडिया संबंधसामुदायिक जुड़ावसंकट संचार तथा विभिन्न पहलों जैसे ई-ग्राम स्वराजपीएफएमएसटीएमपीओएसआर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल हैं। प्रशिक्षण में वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारीआरजीएसए के तहत प्रगति की रिपोर्टिंग और ऑडिट ऑनलाइनमेरी पंचायत और पंचायत निर्णय जैसे पोर्टलों का उपयोग भी शामिल है।

पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विकासात्मक और नैदानिक ​​दृष्टिकोणों के माध्यम से प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ानासुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और आवश्यक शासन कौशल को बेहतर बनाना है। प्रशिक्षण पूरा होने परप्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे: (i) अपनी टीमों को उच्च प्रदर्शन और प्रभावशीलता के लिए नेतृत्व प्रदान करें, (ii) स्थानीय शासन में समकालीन नेतृत्व अवधारणाओं की गहन समझ हासिल करें, (iii) महान लोक सेवकों के समान अपने स्वयं के नेतृत्व गुणों की पहचान करें, (iv) अपने पंचायतों के भीतर एक लचीले और चुस्त प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों को रणनीतिक रूप से संरेखित करें और (v) अधिक प्रभावी कामकाज के लिए अपने कौशल सेट्स को बेहतर करें।

पृष्ठभूमि:

पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण परिदृश्य को बदलने के लिए कई पहल की हैंजिसमें पीआरआई के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) का स्थानीयकरणसाक्ष्य-आधारित विषयगत पंचायत विकास योजनाओं (पीडीपी) की तैयारीस्थानिक नियोजन और पंचायत विकास सूचकांक (पीडीआई) का संस्थागतकरण शामिल है। ये पहलें कई पोर्टल और अनुप्रयोग जैसे कि ईग्रामस्वराजपीएफएमएसऑडिट ऑनलाइनप्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल आदि द्वारा समर्थित की जाती हैं।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के सहयोग से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य इन पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित करना और उनका कौशल बढ़ाना है। 2024-25 के दौरान आईआईपीएनई दिल्ली के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से एसएनओएसपीएम और डीपीएम को लक्षित करते हुए बारह आवासीय प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। आईआईपीए अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के साथ 1 से 5 जुलाई, 2024 के दौरान पहले बैच के प्रशिक्षण को संचालित कर रहा है।

उद्देश्य: राज्य नोडल अधिकारियों (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों (एसपीएम) की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ानाप्रतिभागियों को ई-ग्राम स्वराजपंचायत विकास योजनाएंपंचायत विकास सूचकांक (पीडीआई)प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल (टीएमपी), मेरी पंचायत जैसी एमओपीआर पहलों पर नवीनतम अपडेट से लैस करनाइन पहलों के व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित करनाआरजीएसए के तहत पीआरआई को मजबूत करने के लिए नवप्रवर्तनकारी हस्तक्षेपों पर विचार मंथन करना।

डिज़ाइन: कार्यक्रम वयस्क शिक्षा सिद्धांतों का पालन करता है, जो शिक्षा सामग्री की प्रासंगिकतासंबद्धता और अनुप्रयोज्यता सुनिश्चित करता है। इसमें नई पहलों की बेहतर समझ के लिए व्यावहारिक गतिविधियां शामिल हैं। यह कार्यक्रम नेतृत्व कौशलटीमवर्कसंघर्ष प्रबंधन और संचार कौशल पर सत्रों के साथ शुरू होता है।

बीसीसीएल बीएफएसआई कौशल विकास प्रशिक्षण के द्वारा युवाओं को सशक्त बना रहा है

 


भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने अपनी सीएसआर पहल के तहत प्रमिथ फाउंडेशन कोलकाता के सहयोग से कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया, जिससे धनबाद क्षेत्र के 150 युवाओं को लाभ मिला। बीएफएसआई-क्रेडिट प्रोसेसिंग ऑफिसर पर केंद्रित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को बैंकिंग, निवेश, बीमा आदि सहित वित्तीय सेवाओं में आवश्यक कौशल से लैस करना और व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए वित्तीय कल्याण सुनिश्चित करना था।


भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के सीएमडी श्री समीरन दत्ता ने प्रतिभागियों को धनबाद के जुबली हॉल में आयोजित एक समारोह में प्रमाण पत्र और ऑफर लेटर वितरित किए। इस कार्यक्रम में बीसीसीएल के निदेशक (कार्मिक) श्री एमके रामैया, प्रमिथ फाउंडेशन के सलाहकार श्री प्रसेनजीत कुंडू और प्रमिथ फाउंडेशन के निदेशक श्री स्वप्नेंदु विकास मंडल सहित बीसीसीएल के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

आकांक्षी उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए, बीसीसीएल के सीएमडी ने कार्यक्रम के सफल समापन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने भारत के युवाओं के लिए आर्थिक कौशल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के लिए एक प्रमुख आर्थिक कौशल अनिवार्य है और यदि हमारे कार्यबल को उचित रूप से प्रशिक्षित किया जाए, तो हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में नंबर एक बनने की क्षमता रखती है। बीसीसीएल के सीएमडी ने पूरे देश के लिए कोकिंग कोल के उत्पादन में बीसीसीएल की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि बीसीसीएल भविष्य में अपने सीएसआर और सामुदायिक विकास गतिविधियों के तहत कई अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 100 प्रतिशत प्रतिभागियों को प्लेसमेंट मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल प्रशिक्षण और नौकरियों पर ही नहीं बल्कि उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी है।

960 घंटों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को रहने और खाने की सुविधा के साथ व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह पहल सभी छात्रों द्वारा सफलतापूर्वक पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ सम्पन्न हुआ। उल्लेखनीय रूप से, 100 प्रतिशत इच्छुक उम्मीदवारों को झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में विभिन्न कंपनियों में प्लेसमेंट मिला।

बीसीसीएल ने कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते इस पहल के लिए 41.74 लाख रुपए का निवेश किया। बीसीसीएल ने प्रतिभागियों से फीडबैक और अन्य महत्वपूर्ण विवरण प्राप्त करने के लिए एक वेब-पोर्टल विकसित किया है।

बीसीसीएल कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाने में अग्रणी रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, बीसीसीएल ने विभिन्न व्यापारों में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया है, जिससे कई प्रतिभागियों को लाभ हुआ है:

  • प्लास्टिक इंजीनियरिंग (सीआईपीईटी रांची और हाजीपुर): 280 प्रतिभागी
  • जनरल ड्यूटी नर्सिंग सहायक: 240 प्रतिभागी
  • बीएफएसआई: 150 प्रतिभागी
  • आईडीटीआर: 30 प्रतिभागी
  • फैशनप्रेन्योर्स: 60 प्रतिभागी

बीसीसीएल सामाजिक प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी अपने प्रयासों को जारी रखने की योजना बना रहा है। आगामी सीएसआर पाठ्यक्रमों में शामिल हैं:

  • प्लास्टिक इंजीनियरिंग (सीआईपीईटी): 200 प्रतिभागी
  • चिकित्सा उपकरण: 150 प्रतिभागी
  • रेडियोलॉजी तकनीशियन: 50 प्रतिभागी
  • एमएसएमई: 75 प्रतिभागी
  • एनएसडीसी: 660 प्रतिभागी

केन्द्रीय गृह एव सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देश भर में आज से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानूनों को दंड की जगह न्याय देने वाला और पीड़ित-केन्द्रित बताया

 



नए कानूनों को हर पहलू पर 4 वर्षों तक विस्तार से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करके लाया गया है, आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है

नए कानूनों में सबसे पहली प्राथमिकता महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को दी गई है। बच्चों व महिलाओं के प्रति अपराध पर नया अध्याय जोड़कर इसे और भी संवेदनशील बनाया गया है

तीनों नए कानून पूरी तरह से लागू होने के बाद सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली का सृजन करेंगे

तीनों नए कानूनों में तकनीक को न केवल अपनाया गया है, बल्कि इस तरह का प्रावधान भी किया गया है कि अगले 50 सालों में आने वाली सभी तकनीकें इसमें समाहित हो सके

तीनों कानून देश की 8वीं अनुसूची की सभी भाषाओं में उपलब्ध होंगे और केस भी उन्हीं भाषाओं में चलेंगे

नए कानूनों में आज के समय के हिसाब से धाराएँ जोड़ी गयी हैं और कई ऐसी धाराएँ हटाई भी गयी हैं, जिससे देशवासियों को परेशानी थी

नए कानूनों में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता मिलेगी, देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस मिलेगा और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी

नए कानूनों में सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने की समयसीमा भी तय की गई है, पूरी तरह लागू होने के बाद तारीख पर तारीख से निजात मिलेगी

किसी भी मामले में FIR दर्ज होने से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय मिल सकेगा

नए कानूनों में अंग्रेजों का बनाया राजद्रोह का कानून जड़ से समाप्त कर दिया गया है

कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि नए कानूनों में रिमांड का समय बढ़ गया है, पर सच यह है कि नए कानूनों के तहत भी रिमांड का समय पहले की तरह 15 दिनों का ही है

नए कानूनों में 7 साल या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है, इससे न्याय जल्दी मिलेगा और दोष-सिद्धि दर को 90% तक ले जाने में सहायक होगा

नए कानूनों पर लगभग 22.5 लाख पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए 12000 मास्टर ट्रेनर्स के लक्ष्य से कहीं अधिक 23 हजार से ज्यादा मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षित


केन्द्रीय गृह एव सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देशभर में आज से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानूनों को दंड की जगह न्याय देने वाला और पीड़ित-केन्द्रित बताया। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता मिलेगी, देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस मिलेगा और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के बारे में कई प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता के मन में इन कानूनों के बारे में भ्रम पैदा करना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों को हर पहलू पर 4 वर्षों तक विस्तार से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करके लाया गया है और आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली आज पूर्णतया स्वदेशी हो रही है और यह तीन नए कानून आज से देश के हर पुलिस थाने में लागू हो जाएंगे। श्री शाह ने कहा कि इन कानूनों के आधार में दंड की जगह न्याय, देरी की जगह त्वरित ट्रायल और त्वरित न्याय को रखा गया है। इसके साथ ही पहले के कानूनों में सिर्फ पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी लेकिन इन नए कानूनों में अब पीड़ितों और शिकायतकर्ता के अधिकारों की भी रक्षा करने का प्रावधान है।

श्री अमित शाह ने कहा कि कल मध्यरात्रि से देशभर में प्रभाव में आए इन तीन नए कानूनों के लागू होने से हमारे देश की पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली में भारतीय आत्मा दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि इन कानूनों में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनसे देश के नागरिकों को कई प्रकार के फायदे होंगे। उन्होंने कहा कि इन कानूनों में अंग्रेजों के समय विवाद में रहे कई प्रावधानों को हटाकर आज के समय के अनुकूल धाराएं जोड़ी गई हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इन कानूनों में भारतीय संविधान की स्पिरिट के अनुरूप धाराओं ओर अध्यायों की प्राथमिकता तय की गई है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में सबसे पहली प्राथमिकता महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को दी गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों व महिलाओं के प्रति अपराध पर नया अध्याय, जिसमें 35 धाराएं और 13 प्रावधान हैं, जोड़कर इसे और भी संवेदनशील बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए पहले के कानून में कोई प्रावधान नहीं था लेकिन इन कानूनों में पहली बार बार मॉब लिंचिंग को परिभाषित और इसके लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है। श्री शाह ने कहा कि नए कानूनों में अंग्रेजों का बनाया राजद्रोह का कानून जड़ से समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए कानून में देशविरोधी गतिविधियों के लिए नई धारा जोड़ी गई है जिसके तहत भारत की एकता और अखंडता को क्षति पहुंचाने वालों को कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

श्री अमित शाह ने कहा कि तीनों नए कानून पूरी तरह से लागू होने के बाद सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली का सृजन करेंगे। इन कानूनों के देशभर में पूरी तरह लागू होने के बाद भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली दुनिया की सबसे आधुनिकतम न्याय प्रणाली बन जाएगी। उन्होंने कहा कि तीनों नए कानूनों में तकनीक को न केवल अपनाया गया है, बल्कि इस तरह का प्रावधान भी किया गया है कि अगले 50 सालों में आने वाली सभी तकनीकें इसमें समाहित हो सके। उन्होंने कहा कि देशभर के 99.9 प्रतिशत पुलिस थाने कंप्यूटराइज़्ड हो चुके हैं, ई-रिकॉर्ड जनरेट करने की प्रक्रिया भी 2019 से शुरू हो गई थी, जीरो-FIR, E-FIR और चार्जशीट सभी डिजिटल होंगे। श्री शाह ने कहा कि नए कानूनों में सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने की समयसीमा भी तय की गई है, पूरी तरह लागू होने के बाद तारीख पर तारीख से निजात मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले में FIR दर्ज होने से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय मिल सकेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नए कानूनों में 7 साल या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है, इससे न्याय जल्दी मिलेगा और दोष-सिद्धि दर को 90% तक ले जाने में सहायक होगा। श्री शाह ने कहा कि फॉरेन्सिक विजिट को अनिवार्य बनाने में हमने दूरदर्शिता के साथ काम कर 2020 में ही नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी बना दी थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए ट्रेंड मैनपावर की ज़रूरत होगी और तीन साल के बाद देश में हर साल 40000 से ज्यादा ट्रेंड मैनपावर हमारी न्यायिक प्रणाली की सेवा में उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि 9 राज्यों में फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के कैंपस खोले जाएंगे और 6 सेंट्रल फॉरेंसिक लैबोरेट्रीज भी स्थापित की जाएंगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में भी साक्ष्‍य के संबंध में टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्‍य के प्रति विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। अब सर्वर लॉग्स, स्थान संबंधी साक्ष्य और वॉयस मैसेजेज़ की व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि तीनों कानून देश की 8वीं अनुसूची की सभी भाषाओं में उपलब्ध होंगे और केस भी उन्हीं भाषाओं में चलेंगे।  

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इन कानूनों को अमली जामा पहनाने के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय, हर राज्य के गृह विभाग और न्याय मंत्रालय ने बहुत प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में आज के समय के हिसाब से धाराएँ जोड़ी गयी हैं और कई ऐसी धाराएँ हटाई भी गयी हैं, जिससे देशवासियों को परेशानी थी। श्री शाह ने कहा कि नए कानूनों पर लगभग 22.5 लाख पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए 12000 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य था, हालांकि कई इंस्टीट्यूशंस को अधिकृत किया करके 23 हजार से अधिक मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशरी में 21000 सबोर्डिनेट ज्यूडिशरी की ट्रेनिंग हो चुकी है, साथ ही 20 हजार पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को ट्रेंड किया गया है। श्री शाह ने बताया कि इन कानूनों पर लोकसभा में कुल 9 घंटे 29 मिनट चर्चा हुई जिसमें 34 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जबकि राज्यसभा में 6 घंटे 17 मिनट चर्चा हुई और उसमें 40 सदस्यों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा भी झूठ फैलाया जा रहा है कि संसद सदस्यों को बाहर निकालने के बाद यह कानून पारित किए गए। उन्होंने कहा कि निष्कासित सदस्यों के पास फिर भी एक विकल्प था कि वे सदन में आकर चर्चा में शामिल होकर अपना मत रख सकते थे, लेकिन एक भी सदस्य ने ऐसा नहीं किया।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2020 में उन्होंने सभी सांसदों, मुख्यमंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को पत्र लिखकर उनके सुझाव मांगे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय गृह सचिव ने देश के सभी आईपीएस अधिकारियों और ज़िलाधिकारियों से इस संबंध में सुझाव मांगे थे। श्री शाह ने बताया कि उन्होंने स्वयं 158 बार इन कानूनों की समीक्षा बैठक की। इसके बाद इन कानूनों को गृह मंत्रालय की समिति के पास भेजा गया जहां ढाई- तीन महीने इन पर गहन चर्चा हुई और सभी दलों के सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया और अपने सुझाव दिए। श्री शाह ने कहा कि कुछ राजनीतिक सुझावों को छोड़कर हर सुझाव को समाहित कर कुल 93 बदलावों के साथ इस बिल को फिर से कैबिनेट ने पारित किया और फिर इसे संसद में रखा गया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े सुधार को पॉलिटिकल कलर देना ठीक नहीं है और यह कानून देश के 140 करोड़ नागरिकों को संविधान की स्प्रिट के अनिसार समय पर न्याय और आत्मसम्मान दिलाने की एक प्रक्रिया है।  उन्होंने कहा कि भारत के आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है। गृह मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इन कानूनों का समर्थन करें और जनता के हित में अपने सुझावों पर चर्चा करें।  

 

प्रेस वार्ता के दौरान 15 दिनों की पुलिस रिमांड पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि नए कानूनों में रिमांड का समय बढ़ गया है, पर सच यह है कि नए कानूनों के तहत भी रिमांड का समय पहले की तरह 15 दिनों का ही है। इस बारे में भ्रांति फैलाई गई है कि रिमांड का समय बढ़ाया गया है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि इन कानूनों में 60 दिनों के अंदर कुल 15 दिनों की रिमांड का प्रावधान किया गया है। श्री शाह ने कहा कि 15 दिन की रिमांड की लिमिट को नहीं बढ़ाया गया है और इस बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है। श्री शाह ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि नए कानून के तहत पहला मामला दिल्ली के स्ट्रीट वेंडर के खिलाफ नहीं दर्ज हुआ बल्कि ग्वालियर के पुलिस थाने में एक चोरी के मामले में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वेंडर के खिलाफ जो मामला रजिस्टर हुआ है वो पुराने प्रावधान के तहत हुआ था जिसे पुलिस ने रिव्यू के प्रावधान का उपयोग कर खारिज कर दिया है। श्री शाह ने ये भी कहा कि देश की हर क्षेत्रीय भाषा में इन कानूनों को उपलब्ध कराया जाएगा और अगर फिर भी किसी के मन में कोई शंका है तो वे उनसे मिल सकते हैं और अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनों का बहिष्कार करने की बजाय मिलकर बात करने का रास्ता अपनाना चाहिए।


Secretary, Shri Vivek Bharadwaj inaugurates Five-Day Refresher Training Program for State Nodal Officers and State Program Managers under Rashtriya Gram Swaraj Abhiyan today at New Delhi

 


Shri Vivek Bharadwaj emphasizes the need for participants to bring positive change to rural lives through dedicated and quality work

Five-Day Refresher Training Program aims to enhance participants’ leadership capabilities through developmental and diagnostic approaches, identifying areas for improvement and refining necessary governance skills


Secretary, Ministry of Panchayati Raj Shri Vivek Bharadwaj inaugurated a five-day refresher training program for State Nodal Officers (SNOs) and State Program Managers (SPMs) under the Rashtriya Gram Swaraj Abhiyan (RGSA) today at Indian Institute of Public Administration (IIPA), New Delhi.

 

 

Secretary, Shri Vivek Bharadwaj in his keynote address, emphasized the need for participants to bring positive change to rural lives through dedication and quality work. He urged participants to recognize their potential, understand the aspirations of the people, and strive for excellence in their performance. He highlighted the immense human potential, determination, and passionate aspiration required to bring about positive change at the grassroots level in rural areas across the country.

 

 

 “Panchayats, do not lack resources and funds; significant investments are being made in Capacity Building and Training (CBT) initiatives. The real need is to see the positive outcomes of these efforts on the ground,” emphasized Shri Bharadwaj. He advocated for a comprehensive approach, ensuring quality and tangible outcomes through a positive change in mindset. He illustrated how transformative practices, set with a positive mindset, can establish strong and meaningful institutions that are self-sustaining.

 

 

Shri Vivek Bharadwaj stressed that inaugurating or unveiling projects initiated with grants from the Central Finance Commission would not only earn wide recognition but also inspire other Panchayats. “By implementing the SVAMITVA scheme and aligning the process of property tax collection with Own Source Revenue (OSR) initiatives, we can pave the way for increasing the income of the Panchayats,” he added. Shri Bharadwaj encouraged participants to share their learning and experiences to inspire other Panchayats.

 

The inaugural session was graced by the presence of Shri S. N. Tripathi, Director General, IIPA, Dr. Chandra Shekhar Kumar, Additional Secretary, MoPR, Shri Vikas Anand, Joint Secretary, MoPR, and Dr. V. N. Alok, Professor, IIPA. More than 50 State Nodal Officers (SNOs) and State Program Managers (SPMs) from 27 States/ UTs are participating in this five-day residential refresher training program from 1st July to 5th July 2024.

 

In his address, Shri S. N. Tripathi commended the innovative initiatives of the Ministry of Panchayati Raj in the direction of Capacity Building and Training (CBT). He highlighted the MoPR’s visionary efforts in aligning inclusive, holistic and sustainable development works in villages with global goals through the concept of Localization of Sustainable Development Goals (LSDGs), bringing a global perspective to local action. Shri Tripathi emphasized that the Ministry’s continuous efforts have enabled Panchayats to gain recognition for their commendable work, both nationally and internationally. He commended the initiative of Ministry of Panchayati Raj to provide training to Panchayat representatives at IIM Ahmedabad as innovative and pioneering.

 

 

Dr. Chandra Shekhar Kumar in his speech underlined the importance of such refresher courses as a means of continuous dialogue, handholding, and outreach by the Ministry. He mentioned the positive impacts of digital governance on service delivery, quality of Panchayat Development Plans (PDP), and financial management through the Public Financial Management System (PFMS).

 

 

Shri Vikas Anand highlighted the significance of this first-of-its-kind refresher training, aimed at enhancing capacity, skill development, leadership ability, and performance of the participants. He stressed the need for coordinated efforts and continuous handholding to achieve the vision of an empowered, developed, and self-reliant rural India, as envisioned by the Prime Minister Shri Narendra Modi.

 

 

The five-day training program includes sessions on leadership skills, teamwork, conflict management, communication skills, media relations, community engagement, crisis communication, and practical training on various initiatives like e-GramSwaraj, PFMS, TMP, OSR, and others. The training also covers the preparation of Annual Action Plans, reporting of progress under RGSA, and the use of portals like Audit Online, Meri Panchayat, and Panchayat NIRNAY.

 

The Five-Day Refresher Training Program aims to enhance participants’ leadership capabilities through developmental and diagnostic approaches, identifying areas for improvement and refining necessary governance skills. Upon completion, participants are expected to: (i) lead their teams to higher performance and effectiveness, (ii) gain a thorough understanding of contemporary leadership concepts in local governance, (iii) identify their own leadership qualities akin to those of great public servants, (iv) strategically align resources to foster a resilient and agile administration within their Panchayats, and (v) enhance their skill sets for more effective functioning.

 

 

Background:

 

The Ministry of Panchayati Raj has undertaken various initiatives to transform the rural landscape, including the localization of Sustainable Development Goals (LSDGs) through PRIs, preparation of evidence-based thematic Panchayat Development Plans (PDPs), spatial planning, and institutionalization of the Panchayat Development Index (PDI). These initiatives are supported by several portals and applications like eGramSwaraj, PFMS, Audit Online, Training Management Portal, and more.

 

The training program, in collaboration with the Indian Institute of Public Administration (IIPA), aims to upskill and train officials for the effective implementation of these initiatives. Twelve residential training workshops will be organized during 2024–25, targeting SNOs, SPMs, and DPMs in a phased manner through IIPA, New Delhi. The IIPA, with its extensive experience and expertise, is conducting the first batch of training during 1st – 5th July, 2024.

 

Objectives: Enhance leadership capabilities of State Nodal Officers (SNOs) and State Program Managers (SPMs); Equip participants with the latest updates on MoPR initiatives like e-GramSwaraj, Panchayat Development Plans, Panchayat Development Index (PDI), Training Management Portal (TMP), Meri Panchayat, and more; Conduct hands-on training sessions for practical application of these initiatives; Brainstorm innovative interventions for strengthening PRIs under RGSA.

 

Design: The program follows adult learning principles, ensuring relevance, relatedness, and applicability of the content. It includes hands-on activities for a better understanding of new initiatives. The program begins with sessions on leadership skills, teamwork, conflict management, and communication skills.


न्यूज़ विचार और व्यव्हार

विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व

✍️ संपादकीय विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधित्व: संसदीय परंपरा बनाम व्यवहारिक राजनीति का द्वंद्व लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा केवल कानू...