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दीपावली की रात उल्लूओं की रखवाली में वन विभाग मुस्तैद रहा, अंधविश्वास के शिकार से बचाने की पूरी तैयारी तेज हुई
🌙 दीपावली की रात उल्लूओं की रखवाली में वन विभाग मुस्तैद रहा, अंधविश्वास के शिकार से बचाने की पूरी तैयारी तेज हुई
रिपोर्ट: Udaen News Network | कोटद्वार
दीपावली की रोशनी के साथ जब लोग खुशियों में डूबे होते हैं, उसी समय जंगलों में एक सन्नाटा और खतरा दोनों मंडराने लगते हैं। यह खतरा है उल्लुओं के अवैध शिकार का, जो हर साल दीपावली के मौके पर बढ़ जाता है।
अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ी मान्यताओं के चलते कई लोग उल्लू की बलि को शुभ लाभ का प्रतीक मानते हैं, जबकि वास्तव में यह एक दंडनीय अपराध है।
इसी पृष्ठभूमि में कोटद्वार वन प्रभाग ने इस वर्ष दीपावली पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। विभाग के सभी वनकर्मी पूरी रात गश्त पर रहेंगे ताकि उल्लुओं सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
🦉 अंधविश्वास पर रोक और संरक्षण का संकल्प
वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष पहले से ही कई गश्ती दल बनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, मंदिर परिसरों और घने वन इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि “दीपावली के दौरान उल्लुओं के अवैध व्यापार और शिकार को रोकना हमारी प्राथमिकता है। स्थानीय नागरिकों की मदद से हम इस बार और अधिक सतर्क रहेंगे।”
🌿 उल्लू का पर्यावरणीय महत्व
उल्लू प्रकृति का रात्रि प्रहरी है — यह खेतों में चूहों और कीटों को नियंत्रित करता है, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उल्लू का शिकार तीन साल की सजा या जुर्माने योग्य अपराध है।
✋ सामाजिक संगठनों की पहल
Udaen Foundation और स्थानीय वन पंचायतों ने भी इस दिशा में जनजागरूकता अभियान शुरू किया है।
“दीप जलाओ, उल्लू बचाओ” और “प्रकृति ही असली लक्ष्मी है” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि उल्लू की बलि से न तो धन की प्राप्ति होती है और न ही सौभाग्य।
🚨 जनता से अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि अगर कहीं उल्लू या किसी अन्य वन्यजीव के शिकार की गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत नज़दीकी वन चौकी या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
Udaen News Network की ओर से संदेश:
इस दीपावली पर आइए
“दीप जलाएँ — जीवन नहीं बुझाएँ।”
प्रकृति की रक्षा ही सबसे बड़ा त्योहार है। 🌏✨
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