Wednesday, November 5, 2025

“राजस्थान अंधविश्वास निवारण एवं मानव सुरक्षा अधिनियम, 2025”


📘 “राजस्थान अंधविश्वास निवारण एवं मानव सुरक्षा अधिनियम, 2025”
(ड्राफ्ट बिल + कार्यान्वयन योजना)

यह प्रस्ताव मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे स्थलों पर बढ़ते अंधविश्वास, शोषण, और हिंसा को रोकने के उद्देश्य से होगा — धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि धोखे, भय और हिंसा के खिलाफ।


I. प्रस्तावना (Preamble)

राजस्थान राज्य की जनता के हित में यह आवश्यक है कि अंधविश्वास, चमत्कारों के झूठे दावों, झाड़-फूंक, मानव बलि, और ऐसी किसी भी अमानवीय प्रथा के माध्यम से नागरिकों के शोषण को रोका जाए तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा दिया जाए।
अतः राजस्थान विधानमंडल यह अधिनियम पारित करता है:


II. नाम और प्रारंभ

इस अधिनियम को कहा जाएगा —
👉 “राजस्थान अंधविश्वास निवारण एवं मानव सुरक्षा अधिनियम, 2025”
यह अधिनियम राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात समूचे राजस्थान राज्य में लागू होगा।


III. उद्देश्य (Objectives)

  1. चमत्कार, तांत्रिक कर्मकांड या झाड़-फूंक के नाम पर नागरिकों को धोखा देने से रोकना।

  2. मानव बलि, पशु बलि, या किसी भी अमानवीय धार्मिक कृत्य को अपराध घोषित करना।

  3. धर्मस्थलों पर होने वाले झूठे “चमत्कार प्रदर्शन” और मानसिक शोषण को रोकना।

  4. जनता में वैज्ञानिक सोच, मानवता और संविधानसम्मत आस्था का प्रसार करना।


IV. परिभाषाएँ (Definitions)

  1. अंधविश्वास — कोई भी ऐसी आस्था या प्रथा जो प्रमाण, तर्क या वैज्ञानिक परीक्षण से परे हो और जिसके कारण शारीरिक, मानसिक या आर्थिक शोषण होता हो।

  2. चमत्कार का दावा — जब कोई व्यक्ति या संस्था यह कहे कि उसके पास अलौकिक या दिव्य शक्ति है जिससे रोग, समस्या या पाप मिट सकते हैं।

  3. मानव बलि/अमानवीय प्रथा — किसी व्यक्ति या पशु को धार्मिक उद्देश्य से हानि पहुँचाना।

  4. झाड़-फूंक या तांत्रिक कर्मकांड — ऐसी गतिविधि जिससे व्यक्ति की स्वतंत्रता, शारीरिक अखंडता या मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचे।


V. दंड (Penalties)

  1. अंधविश्वास के नाम पर धोखा देना: 6 माह से 3 वर्ष तक की कैद या ₹50,000 तक जुर्माना।

  2. मानव या पशु बलि देना: 7 वर्ष तक की सख्त कैद और ₹1 लाख तक जुर्माना।

  3. धोखे से ‘चमत्कार’ का प्रदर्शन या झूठा प्रचार: 1 से 5 वर्ष तक की कैद।

  4. पीड़ित को शारीरिक या मानसिक हानि पहुँचाने पर: गैर-जमानती अपराध, 5 वर्ष तक कैद।

  5. दोहराव की स्थिति में: दोगुना दंड।


VI. लागू करने की व्यवस्था (Implementation Mechanism)

  1. विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell): राज्य स्तर पर “अंधविश्वास निवारण प्रकोष्ठ” का गठन।

  2. पुलिस प्रशिक्षण: प्रत्येक जिला पुलिस में नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो इस अधिनियम की निगरानी करेगा।

  3. मंदिर/धार्मिक स्थलों के लिए निर्देश:

    • मेहंदीपुर बालाजी और खाटू श्यामजी जैसे स्थलों पर CCTV निगरानी अनिवार्य।

    • झाड़-फूंक, भूत-प्रेत निकासी, या मानसिक उत्पीड़न जैसी गतिविधियों पर रोक।

    • केवल पंजीकृत पुजारी/संचालक को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति।

  4. जन-जागरूकता:

    • स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और मीडिया के माध्यम से “धर्म नहीं, धोखा रोको” अभियान।

    • राज्य शिक्षा विभाग द्वारा वैज्ञानिक सोच पर आधारित विशेष कक्षाएँ।


VII. संरक्षण और सहायता (Protection & Support)

  1. पीड़ित व्यक्ति या गवाह को पुलिस सुरक्षा दी जाएगी।

  2. ऐसे मामलों के लिए त्वरित अदालत (Fast Track Court) गठित की जाएगी।

  3. गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को शिकायतों के संकलन और जन-जागरूकता में भागीदारी दी जाएगी।


VIII. विशेष प्रावधान (Special Provisions for Religious Sites)

  1. मेहंदीपुर बालाजी और खाटू श्यामजी जैसे प्रमुख स्थलों पर:

    • भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सहायता केंद्र अनिवार्य।

    • धार्मिक कर्मकांड के दौरान किसी व्यक्ति पर हिंसा, बेहोशी, मारपीट या जंजीरबंदी को अपराध माना जाएगा।

    • जिला प्रशासन द्वारा निगरानी समिति (Collector की अध्यक्षता में) गठित की जाएगी।

  2. मंदिर प्रबंधन को प्रत्येक वर्ष “सुरक्षित आस्था रिपोर्ट” राज्य सरकार को देनी होगी।


IX. सामाजिक जागरूकता योजना (6-महीने की कार्ययोजना)

चरण अवधि प्रमुख गतिविधि जिम्मेदार एजेंसी
1. प्रारंभिक समीक्षा 1 माह मौजूदा कानूनों और घटनाओं का अध्ययन (बालाजी, खाटू) विधि विभाग
2. मसौदा व अनुमोदन 2 माह ड्राफ्ट बिल तैयार कर मंत्रिमंडल में प्रस्तुत करना गृह विभाग
3. पायलट लागू क्षेत्र 3-4 माह दो धार्मिक स्थलों पर पायलट — CCTV, पोस्टर, निगरानी जिला प्रशासन
4. जन-जागरूकता अभियान 4-6 माह मीडिया, स्कूल, सोशल कैंपेन सूचना विभाग + NGOs
5. निगरानी मूल्यांकन 6 माह प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट योजना विभाग

X. निष्कर्ष

“आस्था यदि ज्ञान के साथ है, तो वह शक्ति है;
लेकिन जब वह भय और धोखे में बदल जाए —
तब कानून का हस्तक्षेप ज़रूरी है।”

यह अधिनियम राजस्थान में आस्था की गरिमा को बनाए रखते हुए अंधविश्वास, भय और शोषण को समाप्त करने का उद्देश्य रखता है।


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