Udaen Foundation
दिनांक: 21/11/2025
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Udaen Foundation ने कहा है कि जन्म से छह वर्ष तक की आयु बच्चों के मस्तिष्क विकास का सबसे संवेदनशील और तेज़ चरण होता है। इस अवधि में समय पर की गई जांच, मूल्यांकन और सही हस्तक्षेप बच्चों के जीवन में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
फाउंडेशन के अध्यक्ष दीनेश पाल सिंह गुसाईं ने बताया कि प्रारंभिक जांच न केवल दिव्यांगता के शुरुआती संकेतों की पहचान सुनिश्चित करती है, बल्कि विकास में देरी वाले बच्चों को सही दिशा और सुविधाएँ उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण है। इससे परिवारों को सही मार्गदर्शन मिलता है और वे सरकारी योजनाओं एवं संस्थागत सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक हस्तक्षेप से बच्चों में भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता, मोटर स्किल और सामाजिक-भावनात्मक कौशल जैसे आवश्यक विकासात्मक गुण अधिक प्रभावी ढंग से विकसित होते हैं। यह उन्हें स्कूल और समाज में बेहतर भागीदारी के लिए तैयार करता है।
Udaen Foundation ने राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे प्रमुख संस्थानों—
DDU-NIPPD, NIEPID, SVNIRTAR कट्टक, NIEPVD, AYJNISHD, अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांगजन खेल प्रशिक्षण केंद्र, CRC लखनऊ और CRC गोरखपुर—की सेवाओं की सराहना की। फाउंडेशन ने कहा कि ये संस्थान देशभर में बच्चों की प्रारंभिक पहचान, थेरेपी, पुनर्वास और परामर्श सेवाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अध्यक्ष दीनेश पाल सिंह गुसाईं ने कहा कि “यदि समाज, संस्थान और परिवार मिलकर कार्य करें, तो प्रारंभिक बचपन से ही दिव्यांग बच्चों के जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। हमारा लक्ष्य है—सशक्त दिव्यांगजन, समर्थ भारत।”
मीडिया संपर्क
दिनेश पाल सिंह गुसाईं
अध्यक्ष, Udaen Foundation
मोबाइल: 6395501520
ईमेल: udaenhimalya@gmail.com
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