Tuesday, November 4, 2025

भ्रष्टाचार पर पहली चोट — जागता उत्तराखंड, गैरसैंण की पुकार और ‘आधे सच’ की गूँज



✍️ संपादकीय लेख : दिनेश गुसाईं


कभी-कभी विधानसभा के भीतर उठी एक आवाज़ पूरे राज्य के नैतिक तंत्र को हिला देती है।
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के उपनेता भुवन कापड़ी का यह कहना —
“भ्रष्टाचार की शुरुआत हमसे होती है, विधायक निधि से 15% कमीशन काट लिया जाता है” —
सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि व्यवस्था की आत्मा पर पड़ी पहली चोट है।

कापड़ी का यह वक्तव्य उस सच्चाई की झलक है,
जिसे जनता वर्षों से महसूस कर रही थी लेकिन कोई कह नहीं रहा था।
उन्होंने सदन में कहा कि विधायक विकास निधि से नौकरशाहों द्वारा 15% कमीशन लिया जाता है।
लेकिन यह कहानी का केवल आधा सच है।

सच यह है कि इसके अलावा भी विधायक के क्षेत्र में काम करवाने के लिए स्वयं विधायक को 7% रिश्वत देनी पड़ती है।
जेई (J.E.), एक्सईएन (XEN), एकाउंटेंट से लेकर उच्च स्तर तक,
कई बार विकास कार्यों की कुल रकम का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा कमीशनखोरी में चला जाता है।
यह वह सड़ांध है जिसने उत्तराखंड के विकास की जड़ों को खोखला कर दिया है।

इस कड़वे सच को स्वीकार करने का साहस ही असली शुरुआत है।
भुवन कापड़ी ने सदन में जो कहा, वह राजनीतिक बयान नहीं —
एक आत्मस्वीकृति थी, एक पुकार थी कि अब बदलाव भीतर से शुरू हो।

और इसी आत्मजागरण के बीच फिर एक पुरानी आवाज़ गूँज रही है —
स्थायी राजधानी गैरसैंण की माँग।
यह सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि जनभावना और न्याय का प्रश्न है।
गैरसैंण को राजधानी बनाना,
उत्तराखंड की जनता को शासन के और करीब लाना है।
यह भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के उस फासले को खत्म करने की शुरुआत होगी,
जो देहरादून की ऊँची दीवारों ने पैदा कर दिया है।

आज जरूरत है कि यह “भ्रष्टाचार पर पहली चोट”
एक नई राजनीति का सूत्रपात बने —
जहाँ सत्ता का केंद्र जनता की संवेदना में हो,
और उत्तराखंड का दिल गैरसैंण में धड़के।

अगर सदन में 15% कमीशन पर माननीयों की आत्मा जागी है,
तो समझिए — यह सिर्फ भ्रष्टाचार पर नहीं,
अन्याय और दूरी पर भी पहली चोट है।
उत्तराखंड अब वाकई जाग रहा है —
अपने सच के साथ, अपने स्वाभिमान और अपनी राजधानी गैरसैंण के साथ।

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