राजस्थान में मेहंदीपुर बालाजी/खाटूश्याम जैसे स्थलों पर बढ़ते अंधविश्वास को रोकने के लिए विशेष कानूनी और नीतिगत कदम उठाये जाएँ।
क्या-क्या किया जा सकता है, किस तरह के कानून मॉडल उपलब्ध हैं, और लागू करने में क्या चुनौतियाँ रहेंगी।
1) क्या राज्य ऐसा कानून ला सकता है? — हाँ, और आधार क्या है
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राज्य विधानमंडल के पास सामाजिक सुधार और लोक-व्यवस्था से संबंधित विषयों पर कानून लाने का अधिकार है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने इसी आधार पर “Anti-superstition / Black-magic” प्रकार के क़ानून बनाए हैं जिनमें धोखा देने, मानव बलि, दुष्प्रथा और हिंसा जैसी प्रथाओं को अपराध कहा गया है। (India Code)
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राजस्थान में पहले से ही “Rajasthan Prevention of Witch-Hunting Act, 2015” जैसी व्यवस्था है जो witch-hunting (डायन-शिकायत, उत्पीड़न) रोकने के लिए मौजूद है — पर यह व्यापक तौर पर हर तरह के 'चमत्कार/झाड़-फूंक/धोखे' को कवर नहीं करता। यदि उद्देश्य मेहंदीपुर बालाजी जैसे धार्मिक/आस्था स्थलों पर व्याप्त शोषण और हिंसा को रोकना है, तो राज्य नया व्यापक कानून या मौजूदा कानूनों का विस्तार कर सकता है। (Integral University)
2) कौन-से मॉडल अपनाये जा सकते हैं (उदाहरण)
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महाराष्ट्र मॉडल (2013) — काफ़ी व्यापक: मानव बलि, inhuman/aghori प्रथाएँ, “चमत्कार” के दावों के जरिए धोखा और प्रचार पर पाबंदी। इसे राज्य स्तर पर लागू किया गया। (India Code)
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कर्नाटक एक्ट (2017) — inhuman practices और black magic को अपराध मानता है; लागू करने और परिभाषा-निर्धारण पर लंबी बहस भी रही। (India Code)
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राजस्थान-विशेष (वर्तमान + विस्तार) — राजस्थान के पास witch-hunting के खिलाफ कानून है; राज्य चाहे तो उसे broaden कर ‘अंधविश्वास निवारण और मानव सुरक्षा अधिनियम’ जैसा रूप दे सकता है (मेहंदीपुर जैसे स्थानों पर सार्वजनिक सुरक्षा और धोखे पर विशेष प्रावधानों के साथ)। (Integral University)
3) कानून में किन बातों को शामिल किया जाए (प्रस्तावित मुख्य प्रावधान)
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परिभाषाएँ स्पष्ट हों — ‘चमत्कार का दावा’, ‘झाड़-फूंक/बाबा-प्रचार’, ‘मानसिक/आर्थिक शोषण’, ‘मानव बलि/हिंसा’ — ताकि धर्म/आस्था के सामान्य अधिकार पर असर न पड़े।
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स्पष्ट अपराध-धाराएँ — चमत्कार के नाम पर धोखा (दंड), शारीरिक/मानसिक उत्पीड़न, बच्चों/कनिष्ठों के साथ अत्याचार, और भौतिक प्रमाण के बिना रोग/उपचार के झूठे दावे कर आर्थिक शोषण पर सजा।
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प्रोसीजर/इन्फोर्समेंट — विशेष पुलिस-कोईलिशन या डायरेक्टर(प्रिवेंशन ऑफ अंधविश्वास) इकाई, तेज़ ट्रायल और पब्लिक-विजिलेंस विंग।
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जनजागरूकता और शिक्षा — मंदिरों/धार्मिक समितियों के साथ संवाद, साधु-संतों को प्रशिक्षित करना, और स्कूलों में वैज्ञानिक शिक्षा/critical thinking कार्यक्रम।
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प्रोटेक्शन-क्लॉज — पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा (गवाहों को धमकाने पर सख्त दंड)।
(इन बिंदुओं का उपयोग आप एक प्रारूप बिल में कर सकते हैं।)
4) मेहंदीपुर बालाजी/खाटूश्याम जैसे स्थानों पर विशेष कदम
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स्थल-विशेष निर्देश: तीव्र भीड़ प्रबंधन, अनिवार्य CCTV, मंदिर प्रबंधन को लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन और उनकी गतिविधियों पर पारदर्शिता, और यदि कोई ‘देवी-प्रेत निकालने’ के दौरान हिंसा होती है तो तीव्र कार्रवाई। (मीडिया रिपोर्टों में मेहंदीपुर के ‘prets’ वाली परंपराओं का ज़िक्र है — जहाँ लोग आत्माओं की पेशी का दावा करते हैं)। (https://rajasthan.ndtv.in/)
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स्थानीय समाज-नेताओं/पंडितों के साथ गठजोड़: धार्मिक नेताओं को साथ लेकर जागरूकता चलाना ताकि वे अंधविश्वास और शोषण के बीच का फर्क लोगों को समझाएँ।
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सख्त दंड और त्वरित कार्रवाई: जहाँ भी वीडियो/सबूत मिलें, तुरन्त प्राथमिकी और पब्लिक-इंगेजमेंट।
5) लागू करने में चुनौतियाँ (हकीकत)
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धार्मिक संवेदनशीलता: कानून को “धर्म-विरोधी” नहीं दिखाना चाहिए; यही सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक जोखिम है।
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पुलिस/एडमिन जागरूकता व प्रशिक्षण का अभाव — कई मामलों में पुलिस कानून की धाराओं से अनभिज्ञ रहती है, इसलिए प्रशिक्षण जरूरी है। (यह चुनौती महाराष्ट्र-कर्नाटक के लागू होने पर भी सामने आई थी)। (The Indian Express)
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गवाहों का डर और दबाव — स्थानीय दबाव से लोग शिकायत करने से डरते हैं; संरक्षण तंत्र आवश्यक है।
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राजनीतिक इच्छाशक्ति — बिना नेतृत्व और संचार-रणनीति के क़ानून केवल कागज़ों पर रह सकते हैं।
6) तुरन्त उठाये जाने योग्य कदम (प्राथमिकता-सूची)
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मौजूदा कानूनों का परीक्षण-अध्ययन (Rajasthan Witch-Hunting Act) — कहाँ कमी है, क्या बढ़ाने की जरूरत। (Integral University)
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कानून-मॉडल चुनना/ड्राफ्ट करना — महाराष्ट्र/कर्नाटक के प्रावधानों से उपयुक्त धाराएँ लेकर राज्य अनुकूल ड्राफ्ट बनाना। (India Code)
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पुलिस/प्रोविन्सियल ट्रेनिंग और स्पेशल यूनिट की स्थापना।
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स्थानीय जागरूकता-अभियान (मंदिर समितियों, NGOs, स्कूल) — “धर्म नहीं — धोखा रोको” जैसा संदेश।
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पायलट-प्रोजेक्ट: मेहंदीपुर/खाटूश्याम जैसे हाई-रिस्क स्थलों पर पायलट लागू कर प्रभाव मापा जाए। (https://rajasthan.ndtv.in/)
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