देहरादून: इतिहास की परतों में बसा दून का दिल
उत्तराखंड की राजधानी केवल प्राकृतिक सौंदर्य और शिक्षा संस्थानों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने समृद्ध और रोचक इतिहास के लिए भी जानी जाती है। दून घाटी का यह शहर समय-समय पर विभिन्न शासकों, संस्कृतियों और प्रशासनिक बदलावों का साक्षी रहा है। प्रस्तुत है देहरादून के इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण और दिलचस्प झलकियाँ—एक क्रमबद्ध आलेख के रूप में।
प्रारंभिक दौर: पृथ्वीपुर से देहरादून तक
1674 ई. से पहले देहरादून को पृथ्वीपुर के नाम से जाना जाता था। 1676 ई. में मुगल सम्राट ने यह क्षेत्र गुरु राम राय को दे दिया। गुरु राम राय ने यहाँ अपना “डेरा” स्थापित किया, जिससे आगे चलकर यह स्थान “देहरा-दून” कहलाया।
संघर्ष और सत्ता परिवर्तन
18वीं और 19वीं शताब्दी में देहरादून कई राजनीतिक उठापटक का केंद्र रहा—
- 1757 में नजीबुद्दौला ने टिहरी नरेश को हराकर इस क्षेत्र पर अधिकार किया।
- 1803 में गोरखाओं ने देहरादून पर कब्जा कर लिया।
- 14 मई 1803 को खुड़बुड़ा (वर्तमान देहरादून) में गोरखाओं से युद्ध करते हुए गढ़वाल नरेश प्रद्युम्न शाह वीरगति को प्राप्त हुए।
- 1815 में अंग्रेजों ने गोरखाओं को पराजित कर देहरादून अपने अधीन कर लिया।
ब्रिटिश शासन के साथ यहाँ प्रशासनिक और आधारभूत संरचनाओं का विकास प्रारंभ हुआ।
ब्रिटिश काल: विकास की नींव
अंग्रेजी शासन में देहरादून का योजनाबद्ध विकास हुआ—
- 1823 में पलटन बाजार की स्थापना हुई, जहाँ दोनों ओर सैनिक पलटनें रहती थीं।
- 1840 में यहाँ चीन से लाया गया लीची का पौधा लगाया गया—जो आज दून की पहचान बन चुका है।
- 1842 में डाक सेवा आरंभ हुई।
- 1854 में मिशन स्कूल की स्थापना हुई।
- 1867 में नगर पालिका का गठन हुआ।
- 1871 में देहरादून को जिला घोषित किया गया।
- 1889 में नालापानी से जलापूर्ति शुरू हुई।
1901 में दून में रेल सेवा शुरू हुई, जिसने इसे देश के अन्य भागों से जोड़ा।
शिक्षा और सांस्कृतिक उन्नति
20वीं सदी की शुरुआत में देहरादून शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बनने लगा—
- 1902 में महादेवी कन्या पाठशाला और 1904 में डीएवी कॉलेज की स्थापना हुई।
- 1916 में विद्युत आपूर्ति प्रारंभ हुई।
- 1918 में ओलम्पिया और ओरिएंट सिनेमा घर खुले।
- 1920 में यहाँ पहली बार कार देखी गई—और 1939 तक पूरे दून में केवल दो कारें थीं।
आधुनिक देहरादून की ओर
- 1930 में मसूरी मोटर मार्ग बना, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला।
- 1944 में लाला मनशाराम ने 58 बीघा भूमि पर कनॉट प्लेस का निर्माण कराया।
- 1948 में प्रेमनगर और क्लेमनटाउन के लिए सिटी बस सेवा शुरू हुई।
- 1948 से 1953 के बीच घण्टाघर का निर्माण हुआ, जो आज दून की पहचान है।
- 1978 में वायु सेवा प्रारंभ हुई, जिससे देहरादून राष्ट्रीय स्तर पर और सुलभ हो गया।
निष्कर्ष
देहरादून का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि संघर्ष, विकास, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा है। पृथ्वीपुर से राजधानी तक का यह सफर कई शासकों, युद्धों, सामाजिक परिवर्तनों और आधुनिक विकास की कहानी कहता है।
आज का देहरादून जहाँ एक ओर प्राकृतिक सौंदर्य और शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी ओर यह अपने गौरवशाली अतीत की जीवित विरासत भी संजोए हुए है। दून की हर सड़क, हर बाजार और हर ऐतिहासिक इमारत अपने भीतर एक कहानी समेटे हुए है—जिसे जानना और सहेजना हमारी जिम्मेदारी है।
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