जो बांटता है, वह सचमुच दूसरों के जीवन में अच्छाई और प्रेम का दीपक जलाता है, और इसी कारण उसे भगवान जैसा माना जाता है। वहीं जो चुपचाप अपना काम करता है, बिना किसी दिखावे के, वह इंसानियत की सच्ची मिसाल बनता है। उसकी अच्छाई और कर्तव्यपरायणता से ही समाज में सच्ची इंसानियत की भावना पैदा होती है। दोनों ही तरह के लोग हमारे समाज के लिए अनमोल होते हैं, क्योंकि ये दोनों अपने तरीके से दुनिया को बेहतर बनाते हैं।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
न्यूज़ विचार और व्यव्हार
जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी
जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...
-
**मिशन लाइफ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment)** भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक वैश्विक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य **व्यक्तिगत और...
-
उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹3,94,675 करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% की वृद्ध...
-
कृषि व्यवसाय और ग्रामीण उद्यमिता विकास कई विकासशील देश और अर्थव्यवस्थाएं संक्रमण में , विशेष रूप से बड़े ग्रामीण समुदायों के साथ , भोजन...
No comments:
Post a Comment