Thursday, July 31, 2025

त्रिस्तरीय चुनाव में बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों की हार: क्या ये कांग्रेस की वापसी के संकेत हैं?



त्रिस्तरीय चुनाव में बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों की हार: क्या ये कांग्रेस की वापसी के संकेत हैं?

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव या नगर निकाय चुनावों में जनता का जो मूड सामने आता है, वह अक्सर आने वाले विधानसभा चुनावों का ट्रेंड सेट करता है, पर यह सीधा और स्पष्ट संकेत नहीं होता, बल्कि नीति, स्थानीय नेतृत्व, और जनसरोकारों के प्रति एक जनमत होता है।

1. भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार: कारण

स्थानीय मुद्दों की अनदेखी (सड़क, पानी, रोजगार, पलायन)

ग्राम पंचायत और नगर निकायों में बढ़ती असंतोषजनक कार्यप्रणाली

महंगाई और बेरोजगारी का असर

जनप्रतिनिधियों की पहुंच से बाहर होती कार्यशैली

चुनाव में स्थानीय चेहरों को ज्यादा प्राथमिकता देने की मांग


2. क्या ये कांग्रेस की वापसी है?

सावधानीपूर्वक हां और नहीं।

कांग्रेस को इससे निश्चित रूप से मनोबल और राजनीतिक ऊर्जा मिलती है।

लेकिन ये जीतें कांग्रेस के प्रति मोह से अधिक भाजपा के प्रति असंतोष को दर्शा रही हैं।

कांग्रेस को यदि इसका लाभ 2027 में चाहिए, तो उसे:

मजबूत संगठन खड़ा करना होगा

स्थानीय कार्यकर्ताओं को निर्णयकारी भूमिका देनी होगी

लगातार जनता के बीच रहकर, वैकल्पिक विकास मॉडल प्रस्तुत करना होगा




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क्या अब जीते हुए प्रत्याशियों पर जिम्मेदारी है कि वे इस विजय को 2027 में दोहराएं?

बिल्कुल!
यह जीत किसी पार्टी की जीत नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की जीत है। अब इन प्रतिनिधियों पर निम्नलिखित ज़िम्मेदारियाँ हैं:

✅ ग्राम और वार्ड स्तर पर पारदर्शिता और सहभागिता लाना

योजनाओं में लोगों की भागीदारी बढ़ाना

ग्रामसभा को सशक्त बनाना


✅ स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा पर प्राथमिकता देना

✅ भ्रष्टाचार से दूरी और जवाबदेही की नीति अपनाना

✅ राजनीतिक गठजोड़ों से ऊपर उठकर, जनहित में कार्य करना

अगर ये निर्वाचित प्रतिनिधि सच्चे जनप्रतिनिधि की तरह काम करते हैं, तो न सिर्फ वे 2027 की आधारशिला रखेंगे, बल्कि राजनीतिक शुचिता की नई परंपरा भी स्थापित करेंगे।


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निष्कर्ष:

त्रिस्तरीय चुनाव के नतीजे निश्चित रूप से भाजपा के लिए चेतावनी और कांग्रेस के लिए अवसर हैं। पर यह मौका तभी कांग्रेस भुना सकती है जब वह संगठन, दृष्टिकोण और कार्यशैली में ग्रामीण जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बदलाव लाए। वहीं जीते हुए प्रत्याशी अगर जनहित में काम करते हैं, तो वे 2027 के चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


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