अनैतिक व्यापार अधिनियम (The Immoral Traffic (Prevention) Act - ITPA), 1956, भारत में वेश्यावृत्ति और उससे संबंधित अनैतिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया एक प्रमुख कानून है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के व्यापार को रोकना और उन्हें शोषण से बचाना है।
मुख्य प्रावधान:
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वेश्यावृत्ति का प्रत्यक्ष अपराध न होना:
- स्वयं की इच्छा से वेश्यावृत्ति करना अपराध नहीं है, लेकिन किसी सार्वजनिक स्थान पर इसे प्रोत्साहित करना या इससे जुड़े कार्य करना दंडनीय है।
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व्यावसायिक रूप से वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देना:
- किसी को जबरन इस व्यवसाय में धकेलना, दलाली करना, या किसी व्यक्ति की कमाई पर निर्भर रहना अपराध है।
- किसी मकान, होटल, लॉज आदि में इस गतिविधि को संचालित करना गैरकानूनी है।
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बाल एवं महिला संरक्षण:
- 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की को वेश्यावृत्ति में धकेलना या उससे लाभ कमाना गंभीर अपराध है।
- इस कानून के तहत पीड़ित महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास की भी व्यवस्था की गई है।
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दंड एवं सजा:
- इस कानून के तहत दोषियों को 1 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है, जो अपराध की गंभीरता पर निर्भर करता है।
संभावित प्रभाव:
- मानव तस्करी पर रोक
- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा
- समाज में नैतिक मूल्यों की रक्षा
यह कानून महिलाओं और बच्चों के शोषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसका प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और वे पुनर्वासित हो सकें।
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