ड्रामेटिक परफॉर्मेंस एक्ट, 1876 एक औपनिवेशिक कानून था जिसे ब्रिटिश सरकार ने भारतीय थिएटर और नाटकों पर नियंत्रण रखने के लिए लागू किया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रवादी विचारों और ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने वाले नाटकों पर प्रतिबंध लगाना था। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार था कि वह किसी भी नाटक या नाटकीय प्रदर्शन को "आपत्तिजनक, अश्लील, मानहानि करने वाला या राजद्रोही" बताकर उसे रोक सकती थी।
स्वतंत्र भारत में इसका प्रभाव
1956 में इसे असंवैधानिक घोषित किया गया, लेकिन यह औपचारिक रूप से कानून की किताबों में बना रहा।
कई राज्यों में थिएटर और कला पर प्रतिबंध लगाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा।
मोदी सरकार का रुख और निरस्तीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 के बाद से औपनिवेशिक और अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करने का अभियान शुरू किया।
2018 में, सरकार ने "Repealing and Amending (Second) Act, 2017" के तहत इस कानून को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया।
यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और पुराने ब्रिटिश कानूनों से मुक्त भारत बनाने की दिशा में उठाया गया था।
निष्कर्ष
वर्तमान सरकार का यह रुख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करने और भारतीय कानूनी प्रणाली को आधुनिक बनाने की ओर एक सकारात्मक कदम माना जाता है। इससे थिएटर, कला, और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को अधिक स्वतंत्रता मिली है।
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