Tuesday, March 4, 2025

यदि चिकित्सक रोगियो के पर्चे पर जैनेरिक दवायें लिखें तो मंहगी दवा खरदने में असमर्थ रोगियो की क्या जान बचाई जा सकती है ?

 

हाँ, यदि चिकित्सक रोगियों के पर्चे पर जेनरिक दवाएँ लिखें तो इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बहुत लाभ हो सकता है। जेनरिक दवाएँ ब्रांडेड दवाओं के समान ही प्रभावी होती हैं लेकिन उनकी कीमत काफी कम होती है क्योंकि इन पर मार्केटिंग और ब्रांडिंग का अतिरिक्त खर्च नहीं होता।

जेनरिक दवाएँ लिखने के फायदे:

  1. सस्ती और किफायती – ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं।
  2. समान गुणवत्ता और प्रभाव – ये FDA और भारत के ड्रग कंट्रोलर द्वारा अनुमोदित होती हैं।
  3. स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ेगी – गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय मरीजों को भी इलाज मिल सकेगा।
  4. मरीजों की जान बच सकती है – कई मरीज महंगी दवाएँ नहीं खरीद पाते और इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। जेनरिक दवाओं से यह समस्या दूर होगी।
  5. सरकार की 'जनऔषधि योजना' को बढ़ावा – सरकारी 'प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना' जैसी योजनाओं का अधिक लाभ मिलेगा।

चुनौती और समाधान:

  • कई डॉक्टर ब्रांडेड दवाएँ लिखने को प्राथमिकता देते हैं – इसके पीछे फार्मा कंपनियों का दबाव और कमीशन सिस्टम भी हो सकता है।
    समाधान: सरकार को जेनरिक दवाएँ लिखना अनिवार्य करने के सख्त नियम लागू करने चाहिए।

  • मरीजों में जागरूकता की कमी – कई लोग जेनरिक दवाओं को कम प्रभावी मानते हैं।
    समाधान: डॉक्टर, फार्मासिस्ट और सरकार को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।

निष्कर्ष:

अगर चिकित्सक हर मरीज को जेनरिक दवाएँ लिखने लगें तो लाखों गरीब मरीजों को जीवनरक्षक इलाज मिल सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनेंगी

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