संविधान में "विकास" शब्द को जोड़ने की प्रक्रिया संविधान संशोधन के माध्यम से संभव हो सकती है। इसके लिए संसद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन करना होगा।
संविधान में "विकास" जोड़ने के संभावित तरीके:
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संविधान की प्रस्तावना में "विकास" जोड़ना:
- वर्तमान में प्रस्तावना में "समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य" जैसे शब्द हैं।
- इसमें "विकासशील" या "समावेशी विकास" जोड़ने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
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मौलिक अधिकारों (भाग 3) में विकास से जुड़ा अधिकार:
- जैसे "समानता", "स्वतंत्रता" और "संजीवनीय जीवन का अधिकार" हैं, वैसे ही "विकास का अधिकार" जोड़ा जा सकता है।
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नीति निदेशक तत्वों (भाग 4) में विकास को प्राथमिकता देना:
- नीति निदेशक तत्व पहले से ही विकास से जुड़े हैं, लेकिन इसे स्पष्ट करने के लिए संशोधन किया जा सकता है।
संविधान संशोधन की प्रक्रिया:
- संसद में विधेयक पेश करना – लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्ताव रखा जाएगा।
- विशेष बहुमत से पारित करना – संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक होगा।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति – राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह संविधान का हिस्सा बन जाएगा।
संभावित चुनौतियाँ:
- संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) से छेड़छाड़ न हो।
- सभी राजनीतिक दलों और जनता की सहमति बनाना।
- विकास की स्पष्ट परिभाषा तय करना।
निष्कर्ष:
संविधान में "विकास" शब्द जोड़ने का प्रस्ताव लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत चर्चा, कानूनी मूल्यांकन और राजनीतिक सहमति की जरूरत होगी।
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