1. भारत में पत्रकारिता का मौजूदा परिदृश्य
भारत में पत्रकारिता का एक समृद्ध इतिहास रहा है—अखबारों ने स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई, आपातकाल (1975) के दौरान सरकार की सेंसरशिप का सामना किया, और कई घोटालों (जैसे 2G, कोयला घोटाला) को उजागर किया। लेकिन वर्तमान में पत्रकारिता पर कई दबाव बढ़ते जा रहे हैं:
- मीडिया का राजनीतिकरण: बड़े मीडिया चैनल या तो सरकार समर्थक हैं या विपक्ष समर्थक, जिससे निष्पक्षता प्रभावित होती है।
- कॉर्पोरेट दबाव: मीडिया हाउस बड़े उद्योगपतियों के स्वामित्व में हैं, जिससे वे अपने व्यापारिक हितों के खिलाफ जाने वाली खबरें नहीं दिखाते।
- फेक न्यूज और ट्रोलिंग: सोशल मीडिया पर झूठी खबरों का प्रसार तेज़ी से होता है, और जो पत्रकार सत्ताधारी या प्रभावशाली लोगों से सवाल पूछते हैं, उन्हें ट्रोल किया जाता है या दबाव में लाया जाता है।
2. क्या भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है?
निष्पक्ष पत्रकारिता कठिन है लेकिन असंभव नहीं। कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान अब भी स्वतंत्र रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए:
- The Wire, Scroll, The Print, Newslaundry जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्ता और कॉर्पोरेट दबाव से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
- रविश कुमार (पूर्व में NDTV), फयज़ल मुस्तफा (The Quint), सिद्धार्थ वरदराजन (The Wire) जैसे पत्रकार सत्ता से सवाल पूछने का साहस दिखाते हैं।
3. क्या करना होगा?
अगर निष्पक्ष पत्रकारिता को जिंदा रखना है, तो:
- जनता को जागरूक होना पड़ेगा – सिर्फ एक पक्षीय मीडिया पर भरोसा करने की बजाय कई स्रोतों से खबरें पढ़नी चाहिए।
- स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को समर्थन देना होगा – सब्सक्रिप्शन आधारित मीडिया (जैसे Newslaundry, Scroll) को बढ़ावा देना चाहिए।
- फैक्ट-चेकिंग को मजबूत करना होगा – Alt News, Boom Live जैसी संस्थाओं की रिपोर्टिंग को महत्व देना चाहिए।
- पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी – निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को धमकी और हिंसा से बचाने के लिए सख्त कानून होने चाहिए।
निष्कर्ष
भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता पर भारी दबाव है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यदि स्वतंत्र मीडिया को समर्थन मिले, जनता सजग रहे और पत्रकारों को खुलकर काम करने दिया जाए, तो निष्पक्ष पत्रकारिता को फिर से मजबूत किया जा सकता है।
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