यह अधिनियम भारत में पत्रकारों और अन्य समाचारपत्र कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए बनाया गया था। इसका उद्देश्य पत्रकारों को न्यायसंगत वेतन, नौकरी की सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ प्रदान करना है।
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मुख्य प्रावधान:
1. कार्यकारी पत्रकार की परिभाषा
"कार्यकारी पत्रकार" में संपादक, रिपोर्टर, संवाददाता, छायाकार (फोटोग्राफर), समाचार संपादक, कार्टूनिस्ट आदि शामिल हैं, जो प्रिंट मीडिया में कार्यरत हैं।
2. वेतन बोर्ड (Wage Boards)
यह अधिनियम पत्रकारों और समाचारपत्र कर्मचारियों के लिए न्यायसंगत वेतन निर्धारण हेतु वेतन बोर्ड (Wage Boards) के गठन का प्रावधान करता है।
वेतन बोर्ड विभिन्न समाचार पत्रों के आकार और उनकी आय के आधार पर न्यूनतम वेतन की सिफारिश करता है।
3. कार्य के घंटे और अवकाश सुविधाएँ
कार्य के घंटे: किसी भी पत्रकार से निर्धारित घंटों से अधिक कार्य नहीं कराया जा सकता, यदि कराया जाए तो अतिरिक्त भुगतान (Overtime) अनिवार्य है।
अवकाश: पत्रकारों को वार्षिक अवकाश, आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) और चिकित्सा अवकाश (Sick Leave) का अधिकार प्राप्त है।
4. नौकरी की सुरक्षा और सेवा समाप्ति नियम
किसी भी पत्रकार को बिना उचित कारण या पूर्व सूचना के बर्खास्त नहीं किया जा सकता।
अनुचित रूप से बर्खास्त किए गए पत्रकार औद्योगिक न्यायालय (Labour Court) में न्याय की मांग कर सकते हैं।
5. भविष्य निधि (Provident Fund) और ग्रेच्युटी (Gratuity)
पत्रकारों को भविष्य निधि (PF) का लाभ दिया जाता है।
यदि कोई पत्रकार 5 वर्षों तक निरंतर सेवा करता है, तो उसे ग्रेच्युटी (Gratuity) का अधिकार मिलता है।
6. समाचारपत्र प्रतिष्ठानों पर लागू
यह अधिनियम सभी समाचारपत्र प्रतिष्ठानों पर लागू होता है, चाहे वह छोटे हों या बड़े, जिससे सभी पत्रकारों को समान अधिकार मिले।
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संशोधन और वर्तमान प्रासंगिकता
समय-समय पर इस अधिनियम में संशोधन (Amendments) किए गए हैं, ताकि पत्रकारों को अधिक सुरक्षा मिल सके।
डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इस अधिनियम को ऑनलाइन पत्रकारों और नए मीडिया प्लेटफार्मों पर लागू करने की माँग की जा रही है।
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