Thursday, March 13, 2025

भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता: एक गहन विश्लेषण


भारत में पत्रकारिता एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के उदाहरण देखने को मिलते हैं, तो दूसरी ओर मीडिया का राजनीतिकरण और व्यावसायीकरण भी स्पष्ट रूप से दिखता है।


1. निष्पक्ष पत्रकारिता की परिभाषा और मानदंड

निष्पक्ष पत्रकारिता का अर्थ है—

  • तथ्यों की सटीक और संतुलित प्रस्तुति
  • किसी भी पूर्वाग्रह (Bias) से मुक्त समाचार
  • सत्ता, कॉर्पोरेट और अन्य प्रभावशाली समूहों से स्वतंत्र रहना
  • जनता के वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित रिपोर्टिंग

2. भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता के सामने चुनौतियाँ

(i) मीडिया का राजनीतिकरण (Political Bias in Media)

  • कई बड़े समाचार चैनल या तो सरकार समर्थक माने जाते हैं या फिर विपक्ष समर्थक।
  • राजनीतिक दल और सरकारें मीडिया हाउस को विज्ञापनों और अन्य तरीकों से प्रभावित करने की कोशिश करती हैं।
  • कुछ उदाहरण:
    • सरकार समर्थक माने जाने वाले चैनल: Republic TV, Zee News, Times Now
    • विपक्ष समर्थक माने जाने वाले प्लेटफॉर्म: The Wire, Scroll, The Print

(ii) कॉर्पोरेट स्वामित्व और विज्ञापन दबाव

  • भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा कुछ बड़े कॉर्पोरेट समूहों के स्वामित्व में है।
  • कंपनियाँ अपने विज्ञापनों के जरिए मीडिया को प्रभावित कर सकती हैं।
  • उदाहरण: कुछ चैनल बड़े उद्योगपतियों के स्वामित्व में हैं, जो उनके व्यावसायिक हितों के खिलाफ खबरें नहीं दिखाते।

(iii) खोजी पत्रकारिता पर खतरा (Threat to Investigative Journalism)

  • पत्रकारों पर कानूनी मुकदमे (SLAPP Cases), धमकियाँ और हमले बढ़ गए हैं।
  • कुछ खोजी पत्रकारों की हत्या तक कर दी गई (जैसे गौरी लंकेश)।
  • खोजी रिपोर्टिंग करने वाले संस्थानों की फंडिंग पर भी दबाव डाला जाता है।

(iv) सोशल मीडिया और फेक न्यूज (Misinformation & Fake News)

  • सोशल मीडिया के कारण फेक न्यूज का प्रसार तेज़ी से होता है।
  • व्हाट्सएप, ट्विटर और फेसबुक पर बिना तथ्य जांचे खबरें वायरल हो जाती हैं।
  • कई बार राजनीतिक दल संगठित रूप से "आईटी सेल" के माध्यम से झूठी खबरें फैलाते हैं।

(v) पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर सवाल

  • कई पत्रकारों को सत्ताधारी और विपक्षी दलों की आलोचना के कारण "देशद्रोह" या "मानहानि" के मुकदमों का सामना करना पड़ता है।
  • रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में भारत की स्थिति लगातार गिर रही है।

3. भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता के उदाहरण

(i) सकारात्मक पहल और स्वतंत्र मीडिया संस्थान

  • कुछ डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी निष्पक्ष पत्रकारिता की कोशिश कर रहे हैं:
    • The Wire, The Quint, Scroll, Newslaundry
    • ये संस्थान विज्ञापन पर निर्भर नहीं हैं और सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल अपना रहे हैं।
  • फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म जैसे Alt News, Boom Live, Factly गलत सूचनाओं को उजागर करने का काम कर रहे हैं।

(ii) खोजी पत्रकारिता के उल्लेखनीय उदाहरण

  • Cobra Post और Tehelka ने कई स्टिंग ऑपरेशन करके भ्रष्टाचार उजागर किए।
  • NDTV की खोजी रिपोर्टिंग ने कई घोटालों पर प्रकाश डाला (हालांकि चैनल की निष्पक्षता पर भी सवाल उठे हैं)।
  • बर्नस्टीन और वुडवर्ड (अमेरिका) की तरह कुछ भारतीय पत्रकारों ने भी घोटाले उजागर किए, लेकिन उन्हें भारी दबाव का सामना करना पड़ा।

4. समाधान और भविष्य की राह

भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है, लेकिन इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:

(i) मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना

  • सरकार को मीडिया संस्थानों पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए।
  • मीडिया स्वामित्व के नियमों को पारदर्शी बनाया जाए ताकि कुछ कॉर्पोरेट समूहों का पूर्ण नियंत्रण न हो।

(ii) पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून

  • खोजी पत्रकारिता करने वालों को कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
  • पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करना मुश्किल बनाया जाए।

(iii) स्वतंत्र और सब्सक्रिप्शन आधारित मीडिया को बढ़ावा

  • जनता को निष्पक्ष मीडिया संस्थानों को आर्थिक रूप से समर्थन देना चाहिए।
  • स्वतंत्र पत्रकारिता को भीड़-भाड़ वाली "Breaking News" पत्रकारिता से अलग स्थान मिलना चाहिए।

(iv) फेक न्यूज पर नियंत्रण और मीडिया साक्षरता

  • सोशल मीडिया पर झूठी खबरों को रोकने के लिए तकनीकी समाधान विकसित किए जाएँ।
  • लोगों को मीडिया साक्षरता (Media Literacy) के बारे में शिक्षित किया जाए ताकि वे सच और झूठ में अंतर कर सकें।

5. निष्कर्ष: क्या भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है?

निष्पक्ष पत्रकारिता मुश्किल ज़रूर है, लेकिन असंभव नहीं। कुछ स्वतंत्र पत्रकार और मीडिया संस्थान अब भी सच्चाई को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, जब तक राजनीतिक दबाव, कॉर्पोरेट नियंत्रण, फेक न्यूज, और पत्रकारों की असुरक्षा जैसी समस्याएँ बनी रहेंगी, तब तक निष्पक्ष पत्रकारिता पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाएगी।

आशा की किरण: अगर जनता निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करे, मीडिया की जवाबदेही तय करे, और पत्रकारों को सुरक्षित माहौल मिले, तो भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता को फिर से मजबूत किया जा सकता है।


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