अगर भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता को पुनर्जीवित करना है, तो हमें एक ठोस रणनीति अपनानी होगी। इसमें नीतिगत सुधार, स्वतंत्र मीडिया संस्थानों का समर्थन, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग, और जनता की जागरूकता प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
1. मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुधार
- मीडिया स्वामित्व कानूनों में पारदर्शिता:
- कुछ कॉर्पोरेट समूहों का मीडिया पर नियंत्रण है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित होती है।
- एक व्यक्ति या समूह को सीमित मीडिया स्वामित्व देने का नियम बनना चाहिए।
- सरकारी विज्ञापनों पर नियंत्रण:
- सरकारें मीडिया को सरकारी विज्ञापन देकर प्रभावित करती हैं।
- स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से विज्ञापन आवंटित करने की प्रणाली विकसित की जाए।
- निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए कानूनी संरक्षण:
- खोजी पत्रकारों और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को सुरक्षा दी जाए।
- मानहानि और देशद्रोह के कानूनों का दुरुपयोग रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएँ।
2. स्वतंत्र और सब्सक्रिप्शन आधारित मीडिया को बढ़ावा
- विज्ञापन-मुक्त पत्रकारिता का समर्थन:
- जनता को विज्ञापन-आधारित मीडिया की जगह सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल (जैसे The Wire, Scroll, Newslaundry) को आर्थिक रूप से समर्थन देना चाहिए।
- गैर-लाभकारी पत्रकारिता मॉडल:
- "Public Service Journalism" की तर्ज पर गैर-लाभकारी पत्रकारिता संस्थानों को बढ़ावा दिया जाए।
- क्राउडफंडिंग आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म्स विकसित किए जाएँ।
3. फेक न्यूज और भ्रामक पत्रकारिता पर रोक
- फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा:
- Alt News, Boom Live, Factly जैसी संस्थाओं को और अधिक समर्थन मिलना चाहिए।
- न्यूज चैनलों और अखबारों को हर खबर के लिए फैक्ट-चेकिंग की अनिवार्यता अपनानी चाहिए।
- सोशल मीडिया पर नियमन:
- सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान हो।
- YouTube, WhatsApp, Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज डिटेक्शन सिस्टम मजबूत किया जाए।
4. पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता
- पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून:
- भारत में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और धमकियों को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा अधिनियम बनाया जाए।
- स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए सरकारी दबाव से मुक्ति:
- सरकारों को मीडिया पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव डालने से रोकने के लिए सख्त निगरानी होनी चाहिए।
5. जनता की भूमिका: मीडिया साक्षरता और जागरूकता
- मीडिया साक्षरता कार्यक्रम:
- स्कूलों और कॉलेजों में मीडिया साक्षरता (Media Literacy) को एक अनिवार्य विषय बनाया जाए।
- जनता को यह सिखाया जाए कि कैसे फेक न्यूज और पक्षपाती रिपोर्टिंग को पहचाना जाए।
- निष्पक्ष मीडिया को बढ़ावा देने के लिए जन समर्थन:
- जनता निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले मीडिया संस्थानों को सब्सक्रिप्शन देकर समर्थन करे।
- निष्पक्ष और खोजी पत्रकारिता को अधिक देखने-पढ़ने से इनका दायरा बढ़ेगा।
निष्कर्ष
भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता को पुनर्जीवित करना कठिन ज़रूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। इसके लिए नीतिगत सुधार, स्वतंत्र मीडिया संस्थानों का समर्थन, फेक न्यूज पर नियंत्रण, पत्रकारों की सुरक्षा, और जनता की जागरूकता आवश्यक है। अगर इन रणनीतियों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो निष्पक्ष और पारदर्शी पत्रकारिता को फिर से मजबूती दी जा सकती है।
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