डिजिटल पत्रकारिता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन भारत में डिजिटल पत्रकारों के लिए कोई स्पष्ट सरकारी मान्यता या पंजीकरण प्रक्रिया नहीं है। इससे डिजिटल पत्रकारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे:
1. सरकारी कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग में अनुमति नहीं मिलना।
2. सरकारी विज्ञापन नीति में भागीदारी न मिलना।
3. कानूनी सुरक्षा और श्रम अधिकारों का अभाव।
इसलिए, डिजिटल पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट पंजीकरण प्रक्रिया और सरकारी मान्यता जरूरी है।
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A. वर्तमान स्थिति: डिजिटल पत्रकारों के लिए कोई स्पष्ट पॉलिसी नहीं
1. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और डिजिटल मीडिया
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) सिर्फ प्रिंट मीडिया को मान्यता देता है।
डिजिटल पत्रकारों को PCI के तहत कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलता।
2. PIB मान्यता और डिजिटल मीडिया
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) से मान्यता पाने के लिए अखबार, टीवी या रेडियो से जुड़े पत्रकार ही पात्र होते हैं।
डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
3. आईटी एक्ट (IT Act, 2000) का प्रभाव
डिजिटल मीडिया आईटी एक्ट (2000) के तहत संचालित होता है, लेकिन इसमें पत्रकारों के लिए कोई विशेष सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं।
डिजिटल पत्रकारों पर आईटी एक्ट की धारा 66A (अब हटाई जा चुकी), मानहानि और साइबर अपराध के झूठे मामले लगाए जा सकते हैं।
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B. डिजिटल पत्रकारों के लिए सरकारी मान्यता और पंजीकरण क्यों जरूरी है?
1. सरकारी विज्ञापन नीति में भागीदारी
अगर डिजिटल पत्रकारों और न्यूज पोर्टलों को सरकारी मान्यता मिले, तो वे सरकारी विज्ञापनों के पात्र बन सकते हैं।
अभी सरकारी विज्ञापन नीति सिर्फ प्रिंट और टीवी मीडिया तक सीमित है।
2. सरकारी कार्यक्रमों में भागीदारी
PIB और राज्य सरकारों के सूचना विभागों से मान्यता मिलने पर डिजिटल पत्रकार भी सरकारी कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग कर सकेंगे।
अभी कई सरकारी आयोजनों में डिजिटल पत्रकारों को कवरेज की अनुमति नहीं दी जाती।
3. कानूनी सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता
सरकारी मान्यता मिलने से डिजिटल पत्रकारों को आईटी एक्ट और अन्य कानूनी मामलों में सुरक्षा मिलेगी।
डिजिटल मीडिया को भी प्रिंट और टीवी मीडिया की तरह "प्रेस की स्वतंत्रता" का कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
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C. डिजिटल पत्रकारों के लिए सरकारी मान्यता और पंजीकरण कैसे हो सकता है?
1. "डिजिटल मीडिया प्रेस काउंसिल" की स्थापना
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की तरह डिजिटल पत्रकारों के लिए एक अलग निकाय बने।
इसे "डिजिटल मीडिया प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया" (DMPCI) कहा जा सकता है।
यह निकाय डिजिटल पत्रकारों और न्यूज पोर्टलों को आधिकारिक प्रमाणपत्र और प्रेस कार्ड जारी करे।
2. PIB और राज्य सूचना विभागों में डिजिटल पत्रकारों के लिए अलग श्रेणी
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और राज्य सरकारों के सूचना विभागों में डिजिटल मीडिया के लिए अलग से मान्यता श्रेणी बनाई जाए।
डिजिटल पत्रकारों को प्रेस पास और सरकारी कार्यक्रमों की कवरेज की अनुमति दी जाए।
3. डिजिटल न्यूज पोर्टलों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया
डिजिटल न्यूज पोर्टलों के लिए सरकारी पंजीकरण प्रक्रिया बनाई जाए।
न्यूनतम मानदंड तय किए जाएँ, जैसे:
न्यूज पोर्टल का नियमित अपडेट होना।
लेखकों और संपादकों की स्पष्ट जानकारी हो।
स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता का पालन किया जाए।
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