7. डिजिटल मीडिया और सेंसरशिप: स्वतंत्रता बनाम नियंत्रण
डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन इसके साथ सेंसरशिप (नियंत्रण) और स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ प्रेस) के बीच एक संघर्ष भी शुरू हो गया है।
- एक तरफ, डिजिटल मीडिया ने आम नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का मंच दिया है।
- दूसरी तरफ, सरकारें और टेक कंपनियाँ "फेक न्यूज" और "राष्ट्रीय सुरक्षा" के नाम पर डिजिटल कंटेंट को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं।
इसलिए, सवाल यह है कि डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता को कैसे बनाए रखा जाए और कैसे यह सुनिश्चित किया जाए कि यह जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो?
A. डिजिटल मीडिया में सेंसरशिप के कारण
1. सरकारों द्वारा सेंसरशिप
- कई बार सरकारें राष्ट्रीय सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और फेक न्यूज के नाम पर डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं।
- आईटी एक्ट (2000) और डिजिटल मीडिया गाइडलाइंस (2021) के तहत सरकार के पास किसी भी डिजिटल कंटेंट को हटाने का अधिकार है।
2. टेक कंपनियों द्वारा सेंसरशिप
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Facebook, YouTube, Twitter) अपने कम्युनिटी गाइडलाइंस के आधार पर कई बार कंटेंट हटा देते हैं।
- "फेक न्यूज" या "हेट स्पीच" के नाम पर डिजिटल पत्रकारों की रिपोर्ट्स ब्लॉक कर दी जाती हैं।
3. आर्थिक और राजनीतिक दबाव
- कई मीडिया हाउस सरकार या कॉरपोरेट्स के दबाव में डिजिटल कंटेंट को सेंसर कर देते हैं।
- डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को विज्ञापनदाताओं और सरकार से मिलने वाले फंडिंग का डर रहता है।
B. भारत में डिजिटल मीडिया सेंसरशिप के प्रमुख मामले
1. इंटरनेट शटडाउन (Internet Shutdowns)
- भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन करने वाला देश है।
- जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तर-पूर्वी राज्यों और दिल्ली में कई बार डिजिटल मीडिया को ब्लॉक किया गया।
2. पत्रकारों पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई
- कई डिजिटल पत्रकारों के खिलाफ आईटी एक्ट (2000) और UAPA जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया।
- "फेक न्यूज" के नाम पर कई स्वतंत्र पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स सस्पेंड कर दिए गए।
3. OTT और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी नियंत्रण
- डिजिटल मीडिया गाइडलाइंस (2021) के तहत सरकार को OTT प्लेटफॉर्म (Netflix, Prime Video) और डिजिटल न्यूज वेबसाइट्स को रेगुलेट करने का अधिकार मिला।
C. डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित हो?
1. "डिजिटल मीडिया फ्रीडम एक्ट" का प्रस्ताव
- अमेरिका और यूरोप की तरह भारत में भी डिजिटल पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए एक विशेष कानून बनाया जाए।
- इस कानून में सरकार और टेक कंपनियों द्वारा किसी भी डिजिटल कंटेंट को हटाने की एक पारदर्शी प्रक्रिया हो।
2. डिजिटल मीडिया के लिए स्वतंत्र नियामक निकाय
- "डिजिटल मीडिया प्रेस काउंसिल" नाम से एक स्वतंत्र संस्था बनाई जाए।
- यह संस्था सरकार, टेक कंपनियों और मीडिया हाउसों से स्वतंत्र हो और डिजिटल पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करे।
3. इंटरनेट शटडाउन और डिजिटल सेंसरशिप के खिलाफ नियम
- इंटरनेट शटडाउन केवल कोर्ट के आदेश से ही किया जाए।
- सरकार और सोशल मीडिया कंपनियाँ बिना उचित कारण के किसी भी पत्रकार का अकाउंट ब्लॉक न कर सकें।
D. अन्य देशों में डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता के लिए कानून
भारत में भी इसी तरह "डिजिटल मीडिया फ्रीडम एक्ट" बनाया जा सकता है।
E. निष्कर्ष
डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप को सीमित करने, टेक कंपनियों की सेंसरशिप को पारदर्शी बनाने और डिजिटल पत्रकारों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा देने की जरूरत है।
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