Monday, March 24, 2025

उत्तराखंड में **जल जीवन मिशन** को लागू करने में कुछ महत्वपूर्ण **वित्तीय और प्रबंधकीय चुनौतियाँ**

 उत्तराखंड में **जल जीवन मिशन** को लागू करने में कुछ महत्वपूर्ण **वित्तीय और प्रबंधकीय चुनौतियाँ** सामने आई हैं।  


## **1️⃣ वित्तीय चुनौतियाँ:**  

🔸 **बजट संकट:**  

   - राज्य में मिशन के तहत किए गए कार्यों का **4,000 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित** है।  

   - केंद्र सरकार से बजट जारी होने में **देरी के कारण 1,000 से अधिक पेयजल योजनाएँ** प्रभावित हुई हैं।  

   - **31 मार्च 2025** की समय सीमा है, लेकिन वित्तीय संकट के कारण कई परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।  


🔸 **लागत और बजट में अंतर:**  

   - पहाड़ी क्षेत्रों में जल परियोजनाओं की लागत मैदानी इलाकों की तुलना में **कई गुना अधिक होती है**।  

   - ऊँचाई वाले इलाकों में **पाइपलाइन बिछाने, जल पंपिंग और रखरखाव पर ज्यादा खर्च** आता है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।  


🔸 **भुगतान में देरी:**  

   - राज्य सरकार ने **जल जीवन मिशन के ठेकेदारों और कर्मचारियों के भुगतान में देरी** की समस्या स्वीकार की है।  

   - इससे **नए ठेकेदार काम करने से हिचकिचा रहे हैं**, जिससे परियोजनाओं की गति धीमी हो रही है।  


## **2️⃣ प्रबंधकीय (मैनेजमेंट) चुनौतियाँ:**  

🔹 **कार्य की गुणवत्ता और जांच:**  

   - दिसंबर 2024 में, सरकार ने **14.50 लाख जल कनेक्शनों की गहन जाँच** के आदेश दिए।  

   - यह सुनिश्चित करने के लिए कि **जल आपूर्ति वास्तव में हो रही है या नहीं**।  

   - पहले की कई योजनाओं में **कम गुणवत्ता वाली पाइप और अधूरी परियोजनाओं की शिकायतें मिली हैं**।  


🔹 **पारदर्शिता की कमी:**  

   - कुछ स्थानों पर **अनुबंधों में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी** की रिपोर्ट सामने आई है।  

   - टेंडर प्रक्रिया और फंड के वितरण में अधिक निगरानी की आवश्यकता है।  


🔹 **तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएँ:**  

   - पहाड़ी इलाकों में **जल स्रोतों तक पाइपलाइन पहुँचाना कठिन** है।  

   - **भूस्खलन, बर्फबारी और जंगली जानवरों** के कारण पाइपलाइन को बार-बार नुकसान होता है।  

   - दूरस्थ गाँवों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए **सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप** और **स्मार्ट मीटर** जैसी नई तकनीकों की जरूरत है।  


## **समाधान के संभावित तरीके:**  

✔ **केंद्र से अग्रिम बजट जारी कराने की कोशिशें** – वित्तीय संकट को हल करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र पर अधिक दबाव डालना होगा।  

✔ **स्थानीय जल समितियों (VWSC) को सशक्त बनाना** – गाँव स्तर पर जल प्रबंधन को बेहतर बनाने से योजनाओं की सफलता बढ़ सकती है।  

✔ **IoT और स्मार्ट मीटरिंग** – जल आपूर्ति और लीकेज पर निगरानी रखने के लिए नई तकनीक अपनाने की जरूरत है।  

✔ **ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल ट्रैकिंग** – मिशन से जुड़े ठेके और भुगतान प्रक्रिया को **ऑनलाइन सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना** चाहिए।  


### **निष्कर्ष:**  

जल जीवन मिशन उत्तराखंड में **महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज कर रहा है**, लेकिन **वित्तीय संकट, भ्रष्टाचार और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों** के कारण इसके कार्यान्वयन में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि **सही प्रबंधन और नई तकनीकों** का उपयोग किया जाए, तो यह मिशन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। 🚰✨

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