Sunday, June 22, 2025

**"Doctrine of Public Trust"** के अनुसार सरकार **प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल, जंगल, ज़मीन, नदियाँ, पहाड़, समुद्र तट आदि)** की **मालिक नहीं**, बल्कि **"जनता की ओर से ट्रस्टी"** होती है।


**"Doctrine of Public Trust"** के अनुसार सरकार **प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल, जंगल, ज़मीन, नदियाँ, पहाड़, समुद्र तट आदि)** की **मालिक नहीं**, बल्कि **"जनता की ओर से ट्रस्टी"** होती है।


इस सिद्धांत का मूल भाव यही है कि —


> 🌿 **“सरकारी सत्ता इन संसाधनों को बेच नहीं सकती, लूट नहीं सकती, बल्कि इन्हें जनता की आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना उसका नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।”**


---


## 🔹 Doctrine of Public Trust क्या है?


**Public Trust Doctrine** एक **कानूनी सिद्धांत** है, जो कहता है कि:


* कुछ संसाधन इतने महत्वपूर्ण होते हैं कि वे किसी **निजी स्वामित्व** में नहीं जा सकते।

* **सरकार इन संसाधनों की केवल "प्रबंधक" (Trustee)** होती है।

* इनका **व्यावसायीकरण, निजीकरण, या दोहन** करके सरकार अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं कर सकती।

* यह सिद्धांत पर्यावरणीय न्याय का आधार है।


---


## 🔹 भारत में Public Trust Doctrine को मान्यता कब और कैसे मिली?


इस सिद्धांत को **भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में** एक ऐतिहासिक फैसले में **स्वीकृत किया:**


📌 **Case: M.C. Mehta v. Kamal Nath (1997)**


> इस केस में अदालत ने कहा:

>

> **“State is the trustee of all natural resources. It has a legal duty to protect them.”**


इसके बाद यह सिद्धांत कई अन्य फैसलों में लागू हुआ — जैसे:


* **Fomento Resorts v. Minguel Martins (2009)** – समुद्र तट सार्वजनिक संपत्ति है

* **Hinch Lal Tiwari v. Kamala Devi (2001)** – जल स्रोतों (तालाबों, नदियों) को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया


---


## 🔹 Public Trust Doctrine की 5 मुख्य बातें:


| क्रम | सिद्धांत                    | विवरण                                                                           |

| ---- | --------------------------- | ------------------------------------------------------------------------------- |

| 1    | **सरकार ट्रस्टी है**        | सरकार प्राकृतिक संसाधनों की मालिक नहीं, केवल जनता की ओर से संरक्षक है           |

| 2    | **जनहित सर्वोपरि**          | इन संसाधनों का उपयोग केवल जनता की भलाई और पर्यावरण की रक्षा के लिए होना चाहिए   |

| 3    | **निजीकरण पर रोक**          | नदियों, पहाड़ों, जंगलों को बेचने या निजी हाथों में सौंपने का अधिकार नहीं        |

| 4    | **न्यायपालिका की भूमिका**   | यदि सरकार दायित्व नहीं निभाती तो जनता न्यायालय में चुनौती दे सकती है            |

| 5    | **अंतर-पीढ़ी उत्तरदायित्व** | इन संसाधनों को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सरकार की नैतिक ज़िम्मेदारी है |


---


## 🔹 उत्तराखंड में Public Trust Doctrine क्यों ज़रूरी है?


* जल स्रोतों का **बॉटलिंग कंपनियों को सौंपा जाना**

* **हाइड्रो प्रोजेक्ट्स** द्वारा नदियों की दिशा मोड़ना

* **जंगलों का माफिया व सरकारी गठजोड़ द्वारा कटाव**

* **चारागाह और ग्राम समाज भूमि** का निजीकरण


➡ ये सभी Public Trust Doctrine का उल्लंघन हैं।


---


## 🔹 क्या कर सकते हैं आप?


1. 🔸 **RTI दाखिल कर पूछिए:** किन जल/जंगल क्षेत्रों का निजीकरण हुआ?

2. 🔸 **ग्राम सभा प्रस्ताव पास करें:** यह भूमि/जल ग्रामसभा की सामूहिक संपत्ति है।

3. 🔸 **जनहित याचिका (PIL)** तैयार करें:

   न्यायालय को बताएं कि सरकार Public Trust Doctrine का उल्लंघन कर रही है।

4. 🔸 **जन जागरूकता अभियान:** पोस्टर, वीडियो, नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया


---


## 🔹 निष्कर्ष:


> ✊ **"जल-जंगल-जमीन पर पहला हक़ जनता का है, सरकार सिर्फ ट्रस्टी है!"**

>

> 🌱 *Public Trust Doctrine जनता को शक्ति देती है, कि वो सरकार से जवाब माँग सके — जब नदियाँ बेची जा रही हों, जब जंगल लुटाए जा रहे हों, जब पहाड़ों को उखाड़ा जा रहा हो।*


---



No comments:

Post a Comment

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...