Saturday, June 28, 2025

वीडियो स्क्रीनप्ले + वॉइस ओवर स्क्रिप्ट 🎞️ **शीर्षक: कैदी जो आज़ाद हो सकते थे**


🎥 **“कैदी जो आज़ाद हो सकते थे”** डॉक्यूमेंट्री का

✅ **वीडियो स्क्रीनप्ले (Scene-by-Scene Visual Plan)**

✅ **वॉइस ओवर स्क्रिप्ट** (Voice Over Script)


यह डॉक्यूमेंट्री सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और सिस्टम की संवेदनहीनता पर आधारित है।


---


## 🎬 वीडियो स्क्रीनप्ले + वॉइस ओवर स्क्रिप्ट


🎞️ **शीर्षक: कैदी जो आज़ाद हो सकते थे**

📽️ **अवधि:** 12-15 मिनट

🗣️ **भाषा:** हिंदी

📺 **फॉर्मेट:** डॉक्यूमेंट्री (OTT/YouTube/NGO मंच)


---


### 🎬 **Scene 1: \[Opening | Black Screen + Title Reveal]**


**वीडियो:**


* काली स्क्रीन

* टाइटल टेक्स्ट उभरता है:

  *“कैदी जो आज़ाद हो सकते थे”*

* धीमी, रहस्यमयी पृष्ठभूमि ध्वनि


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “कल्पना कीजिए… आपने अपनी सजा पूरी कर ली है…

> लेकिन फिर भी आप जेल में हैं।

> क्यों?

> क्योंकि सिस्टम ने आपको **भूल** दिया है।”


---


### 🎬 **Scene 2: \[Drone Shot | जेल परिसर, ऊँची दीवारें, बंद गेट]**


**वीडियो:**


* नैनीताल/हरिद्वार/हल्द्वानी जेलों के ऊपर से ड्रोन व्यू

* जेल के भारी दरवाज़े, ताले, सुरक्षा कैमरे


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “उत्तराखंड की जेलों में ऐसे 140 कैदी हैं…

> जो सालों पहले रिहा किए जाने के योग्य थे…

> लेकिन अब भी बंद हैं।

> 2019 से 2025 — सिर्फ इंतज़ार, और इंतज़ार…”


---


### 🎬 **Scene 3: \[Inside Jail | खाली बैरक, खामोशी, पुरानी फाइलें]**


**वीडियो:**


* धूल भरी रजिस्टर-बुक, पुरानी फाइलें

* जेल के गलियारे में एक अकेला वृद्ध कैदी


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “इनकी सजा पूरी हो चुकी है।

> लेकिन Sentence Review Board की बैठकें टलती रहीं।

> और ये कैदी — ताले के पीछे, सड़ते रहे।”


---


### 🎬 **Scene 4: \[Newspaper Clips + कोर्ट ऑर्डर स्लाइड्स]**


**वीडियो:**


* स्क्रीन पर चलते हुए अखबारों की सुर्खियाँ

* कोर्ट की टिप्पणियाँ: “प्रशासनिक उदासीनता”, “मानवाधिकार का उल्लंघन”


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई।

> आदेश दिया — दो हफ्तों में बोर्ड बनाओ,

> और रिहाई की प्रक्रिया शुरू करो।”


---


### 🎬 **Scene 5: \[Testimony | पूर्व कैदी की रीकंस्ट्रक्टेड क्लिप]**


**वीडियो:**


* एक 60 वर्षीय व्यक्ति (ध्यान से फिल्माया गया)

* कमजोर, आंखों में थकावट


**🎙️ पात्र संवाद:**


> “मेरी रिहाई की तारीख थी 2020…

> पर मैं निकला 2024 में।

> चार साल… बिना वजह… बंद था।”


---


### 🎬 **Scene 6: \[Statistical Graphics | Jail Data on Screen]**


**वीडियो:**


* एनीमेटेड ग्राफिक्स

* कैपेसिटी: 3000

* वर्तमान कैदी: 4600

* रिहाई योग्य: 140+


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “जेल पहले ही अपनी क्षमता से 50% ज्यादा भरी हैं।

> फिर भी, जिन्हें छोड़ा जा सकता था…

> उन्हें सिस्टम ने रोक रखा है।”


---


### 🎬 **Scene 7: \[Human Rights Activists | इंटरव्यू क्लिप्स]**


**वीडियो:**


* NGO प्रतिनिधि, विधिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता


**🎙️ वॉइस ओवर (बैकग्राउंड):**


> “हमने बार-बार कहा… Sentence Review Board की नियमित बैठकें होनी चाहिए।

> लेकिन हर बार, फाइलें धूल खाती रहीं…”


---


### 🎬 **Scene 8: \[Court Sketch Animation | निर्णय की पुनरावृत्ति]**


**वीडियो:**


* एनिमेटेड कोर्टरूम विज़ुअल

* स्क्रॉलिंग कोर्ट ऑर्डर टेक्स्ट


**🎙️ कोर्ट संवाद (रिकॉर्डेड वॉइस):**


> “यह न्याय का मज़ाक है।

> पात्र कैदियों को अब और एक दिन भी जेल में नहीं रहना चाहिए।”


---


### 🎬 **Scene 9: \[Hope Visuals | खुले जेल गेट, बुजुर्ग का चेहरा ऊपर उठना]**


**वीडियो:**


* जेल का गेट खुलता है

* धूप अंदर आती है

* बुजुर्ग कैदी बाहर देखता है, आंखें नम


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “उन्हें चाहिए

> सिर्फ आज़ादी नहीं…

> एक नया जीवन।

> एक सम्मान, एक पुनर्वास…

> और समाज से फिर जुड़ने का हक़।”


---


### 🎬 **Scene 10: \[Udaen Foundation Logo | संपर्क स्लाइड]**


**वीडियो:**


* Udaen Foundation का लोगो

* ईमेल, वेबसाइट, हेल्पलाइन


**🎙️ वॉइस ओवर:**


> “Udaen Foundation मांग करता है —

> हर पात्र कैदी को न्याय मिले।

> क्योंकि…

> **‘न्याय में देरी, अन्याय है।’**”


---


## 🎬 *अंतिम टेक्स्ट ऑन स्क्रीन:*


**"कैदी जो आज़ाद हो सकते थे..."**

*डॉक्यूमेंट्री प्रजेंटेड बाय – Udaen News Network / Udaen Foundation*

📞 *Contact: [info@udaen.org](mailto:info@udaen.org) | [www.udaen.org](http://www.udaen.org)*


---





No comments:

Post a Comment

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...