Sunday, June 22, 2025

**पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule)**

 **पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule)** भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो **आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन और उनके अधिकारों की रक्षा** से संबंधित है। इसका उद्देश्य भारत के **मूल निवासी आदिवासी समुदायों (Scheduled Tribes)** को उनकी **भूमि, संसाधनों, संस्कृति और स्वशासन के अधिकारों** की रक्षा प्रदान करना है।


उत्तराखंड के कुछ इलाकों (विशेषकर गढ़वाल और कुमाऊं के सीमांत क्षेत्र और जनजातीय बहुल इलाकों जैसे जौनसार-बावर, भोटिया क्षेत्र, आदि) में भी **ऐसे समुदाय हैं जो सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से मूल निवासी माने जाते हैं**, लेकिन उन्हें अभी तक 5वीं अनुसूची के तहत **संवैधानिक संरक्षण नहीं मिला है।**


---


## 🔹 पाँचवीं अनुसूची क्या है?


**संविधान का अनुच्छेद 244 (Article 244)** कहता है कि अनुसूचित जनजातियों के लिए बनाए गए विशेष क्षेत्रों का प्रशासन पाँचवीं अनुसूची के अनुसार किया जाएगा। यह अनुसूची भारत के **अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas)** और उनमें निवास करने वाले जनजातीय समुदायों से संबंधित है।


---


## 🔹 5वीं अनुसूची के प्रमुख प्रावधान:


1. **अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas) की घोषणा:**


   * राष्ट्रपति इन क्षेत्रों को घोषित कर सकता है जहाँ अनुसूचित जनजातियों की आबादी अधिक हो।


2. **गवर्नर की शक्तियाँ:**


   * राज्यपाल को अधिकार होता है कि वह ऐसे क्षेत्रों के प्रशासन के लिए नियम बनाए।

   * वह राज्य विधानसभा के सामान्य कानूनों को इन क्षेत्रों में आंशिक या पूर्ण रूप से लागू होने से रोक सकता है।


3. **Tribes Advisory Council (TAC):**


   * प्रत्येक 5वीं अनुसूची क्षेत्र में एक जनजातीय सलाहकार परिषद होती है, जो सरकार को आदिवासी कल्याण संबंधी मामलों में सलाह देती है।


4. **भूमि की रक्षा:**


   * आदिवासी लोगों की भूमि को गैर-आदिवासियों को बेचना, स्थानांतरित करना या हड़पना प्रतिबंधित होता है।


5. **स्थानीय स्वशासन (Self Governance):**


   * पंचायत (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 (PESA Act) के तहत जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा को शक्तियाँ मिलती हैं।


---


## 🔹 उत्तराखंड के संदर्भ में 5वीं अनुसूची क्यों ज़रूरी?


उत्तराखंड में कुछ क्षेत्र जैसे:


* **जौनसार-बावर (देहरादून)**

* **धारचूला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)**

* **जोशीमठ के निकट भोटिया और रणपछी जनजातियाँ**


…इन सबकी सांस्कृतिक पहचान, जीवनशैली, परंपराएं और भूमि-संपत्ति संबंधी व्यवहार **जनजातीय और मूलनिवासी चरित्र** दर्शाते हैं।


लेकिन इन क्षेत्रों को अभी तक संविधान की **पाँचवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है**, जिससे:


* इनकी भूमि और संसाधनों की रक्षा नहीं हो पाती।

* बड़ी परियोजनाओं में इनकी राय के बिना विस्थापन होता है।

* इनकी भाषा-संस्कृति लुप्त हो रही है।

* खनन, टूरिज्म और सड़क निर्माण में आदिवासी हितों की अनदेखी हो रही है।


---


## 🔹 अगर उत्तराखंड के मूल निवासी क्षेत्रों को 5वीं अनुसूची में शामिल किया जाए तो लाभ:


| **विषय**             | **लाभ**                                                     |

| -------------------- | ----------------------------------------------------------- |

| भूमि अधिकार          | आदिवासियों की भूमि की सुरक्षा, गैर-आदिवासी खरीद नहीं सकेंगे |

| संसाधनों पर हक       | जंगल, जल, जमीन पर समुदाय आधारित हक                          |

| स्वशासन              | ग्राम सभा को निर्णय लेने की ताकत (PESA कानून)               |

| विकास योजनाएँ        | उनकी जरूरतों और परंपराओं के अनुरूप योजनाएँ                  |

| विस्थापन और पुनर्वास | समुदाय की सहमति के बिना कोई प्रोजेक्ट नहीं                  |


---


## 🔹 उत्तराखंड में क्या होना चाहिए?


1. **राज्य सरकार को प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेजना चाहिए** कि कुछ क्षेत्र 5वीं अनुसूची में शामिल किए जाएं।

2. **जन आंदोलनों, जनजातीय संगठनों और ग्राम सभाओं** को इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।

3. **TAC (Tribal Advisory Council)** की स्थापना होनी चाहिए।


---


## 🔹 निष्कर्ष:


**पाँचवीं अनुसूची** सिर्फ एक संवैधानिक व्यवस्था नहीं, बल्कि **एक ढाल है जो आदिवासी और मूल निवासी समुदायों को बाज़ारवाद, विस्थापन और सांस्कृतिक विलोपन** से बचाती है। उत्तराखंड के ऐसे क्षेत्रों में जहाँ मूल निवासी समुदाय रहते हैं, वहाँ 5वीं अनुसूची लागू कराना समय की मांग है।


---




No comments:

Post a Comment

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

फिल्म या शॉर्ट फिल्म एआई की मदद से

 फिल्म या शॉर्ट फिल्म एआई की मदद से  1. विषय और कहानी तय करें सबसे पहले फिल्म का विषय, शैली (ड्रामा, थ्रिलर, डॉक्यूमेंट्री, साइंस फिक्शन आदि...