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🔹 ग्राम सभा क्या है?
ग्राम सभा उस गांव की सभी वयस्क जनता (18 वर्ष से ऊपर) का एक समूह है जो उस ग्राम पंचायत क्षेत्र में निवास करती है।
यह संविधान के अनुच्छेद 243(b) और 73वें संविधान संशोधन (1992) के तहत गठित होती है।
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🔹 ग्राम सभा की ताकत और अधिकार
1. नियोजन (Planning) की शक्ति:
ग्राम सभा गांव के विकास के लिए योजनाएं बना सकती है जैसे सड़क, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं आदि।
MGNREGA (मनरेगा) जैसी योजनाओं में मजदूरी और काम के चयन का निर्णय लेती है।
2. पारदर्शिता और निगरानी:
ग्राम पंचायत द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा (Audit) कर सकती है।
भ्रष्टाचार, अनियमितताओं पर प्रश्न उठा सकती है।
वित्तीय खर्चों का सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कर सकती है।
3. विकास निधियों पर निर्णय:
सरकार से आने वाली योजनाओं की राशि का उपयोग किस कार्य में होगा, यह ग्राम सभा तय कर सकती है।
4. प्राकृतिक संसाधनों का नियंत्रण:
गांव की जमीन, जंगल, पानी आदि पर ग्राम सभा का सामूहिक नियंत्रण हो सकता है (PESA कानून के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में यह विशेष रूप से लागू होता है)।
5. स्थानीय विवादों का समाधान:
छोटे-मोटे झगड़ों और सामाजिक मामलों को ग्राम सभा बैठकर हल कर सकती है।
6. जन हित में प्रस्ताव पारित करना:
शराब बिक्री के खिलाफ, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सकती है।
7. ग्राम पंचायत को जवाबदेह बनाना:
ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को रिपोर्ट देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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🔹 ग्राम सभा की शक्ति को मजबूत कैसे करें?
1. नियमित बैठकें होनी चाहिए (हर तीन महीने में कम से कम 1):
ताकि सभी लोग भाग लें और निर्णयों में पारदर्शिता हो।
2. जन भागीदारी:
महिलाएं, युवा, किसान, मजदूर सभी वर्ग सक्रिय रूप से हिस्सा लें।
3. सूचना का अधिकार (RTI) का प्रयोग:
पंचायत के कार्यों और खर्चों की जानकारी मांगने के लिए।
4. शिक्षा और जागरूकता:
लोगों को उनके अधिकारों और कानूनों की जानकारी देना।
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🔹 एक नारा जो ग्राम सभा को दर्शाता है:
> "गांव का राज गांव के लोग चलाएंगे, गांव की योजना गांव में ही बनाएंगे।"
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