मुख्य विशेषताएँ:
1. सरल भाषा:
नया विधेयक अधिक स्पष्ट और संक्षिप्त भाषा में लिखा गया है ताकि आम करदाता इसे आसानी से समझ सके और कर मामलों के लिए कानूनी विशेषज्ञों पर निर्भरता कम हो।
2. 'कर वर्ष' की अवधारणा:
'पिछला वर्ष' (Previous Year) की जगह 'कर वर्ष' (Tax Year) शब्द का उपयोग किया जाएगा।
कर वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक रहेगा।
नई व्यवसाय या पेशेवर गतिविधियों के लिए कर वर्ष स्थापना की तारीख से शुरू होकर वित्तीय वर्ष के अंत तक चलेगा।
'निर्धारण वर्ष' (Assessment Year) की अवधारणा समाप्त कर दी गई है।
3. नए कर स्लैब:
प्रस्तावित कर दरें इस प्रकार हैं:
₹4 लाख तक की आय – कोई कर नहीं
₹4 लाख - ₹7 लाख – 5%
₹7 लाख - ₹10 लाख – 10%
₹10 लाख - ₹20 लाख – 15%
₹20 लाख - ₹35 लाख – 25%
₹35 लाख से अधिक – 30%
4. मुकदमों में कमी और कर विवाद समाधान:
सरकार का उद्देश्य करदाताओं और आयकर विभाग के बीच होने वाले विवादों को कम करना और त्वरित समाधान प्रक्रिया विकसित करना है।
5. डिजिटलीकरण और आसान अनुपालन:
ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा।
छोटे और मध्यम करदाताओं को राहत देने के लिए नई सुविधाएं लाई जाएंगी।
यह विधेयक अभी संसद में विचाराधीन है और पारित होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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