Wednesday, February 12, 2025

📌 Udaen Foundation के तहत सतत (Sustainable) गौ पालन पायलट प्रोजेक्ट प्रस्ताव



📍 प्रोजेक्ट का नाम:

"सिद्धपुर सतत डेयरी एवं बायोगैस मॉडल"

🎯 उद्देश्य:

1. सिद्धपुर और आसपास के गांवों को आत्मनिर्भर बनाना – जैविक डेयरी और बायोगैस के माध्यम से।


2. ग्लोबल वार्मिंग को कम करना – कार्बन उत्सर्जन घटाने वाले मॉडल अपनाकर।


3. कृषकों की आय बढ़ाना – दूध, जैविक खाद, पंचगव्य उत्पाद, और कार्बन क्रेडिट के माध्यम से।


4. स्थानीय युवाओं को रोजगार देना – डेयरी, बायोगैस, ऑर्गेनिक फार्मिंग और ईको-टूरिज्म से।




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🛠 चरणबद्ध कार्ययोजना (Phased Action Plan)

🔷 पहला चरण: (0-6 महीने) – प्रारंभिक आधारशिला

✅ जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम

महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, ग्राम पंचायतों और किसानों के साथ कार्यशालाएं।

उत्तराखंड पशुपालन विभाग, कृषि विशेषज्ञों, और बायोगैस टेक्नोलॉजी संस्थानों से सहयोग।


✅ पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयन

5-10 इच्छुक किसान परिवारों का चयन, जो जैविक डेयरी मॉडल अपनाने के लिए तैयार हों।

एक बायोगैस प्लांट स्थापित करना और उससे मिलने वाले ऊर्जा लाभ का अध्ययन करना।


✅ परियोजना के लिए सरकारी और गैर-सरकारी सहयोग

उत्तराखंड नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग से बायोगैस प्लांट के लिए सब्सिडी।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) से ऑर्गेनिक डेयरी के लिए सहायता।



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🔷 दूसरा चरण: (6-12 महीने) – उत्पादन और मार्केटिंग

✅ "बद्री गाय डेयरी फार्म" का विकास

स्थानीय बद्री गायों को अपनाना, जो कम चारा खाकर भी अधिक पौष्टिक दूध देती हैं।

जैविक दूध और घी के लिए ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग शुरू करना।


✅ सामुदायिक बायोगैस यूनिट्स

पहले पायलट बायोगैस प्लांट की सफलता के आधार पर अन्य परिवारों को जोड़ना।

गोबर से जैविक खाद, कंडे, और पंचगव्य उत्पादों का उत्पादन।


✅ हाइड्रोपोनिक और एज़ोला आधारित चारा फार्मिंग

गांव में एक छोटे हाइड्रोपोनिक यूनिट का परीक्षण।

एज़ोला (जल चारा) के माध्यम से गायों को पोषण युक्त आहार।


✅ "हिमालयन सस्टेनेबल डेयरी" ब्रांड लॉन्च

स्थानीय और ऑनलाइन मार्केट में जैविक दूध, घी और पंचगव्य उत्पादों की बिक्री।

ई-कॉमर्स प्लेटफार्म (Amazon, Flipkart, और लोकल आउटलेट्स) पर बिक्री।


✅ कार्बन क्रेडिट प्रोग्राम में पंजीकरण

डेयरी और बायोगैस मॉडल को अंतरराष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट प्रोग्राम से जोड़ना।

किसानों को अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में कार्बन क्रेडिट बेचना।



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🔷 तीसरा चरण: (12-24 महीने) – विस्तार और रोजगार निर्माण

✅ गांव स्तर पर "सिद्धपुर डेयरी को-ऑपरेटिव" की स्थापना

किसानों को सहकारी संगठन के तहत संगठित करना।

गांव की डेयरी उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ना।


✅ गोबर और गौमूत्र आधारित उत्पाद उद्योग

जैविक खाद, कीटनाशक, धूपबत्ती, पंचगव्य औषधि और गोबर के उत्पाद बनाना।

स्थानीय और ऑनलाइन मार्केटिंग से किसानों को अतिरिक्त लाभ।


✅ ईको-टूरिज्म और गौशाला आधारित रोजगार

शहरी लोगों को गौशाला टूरिज्म और जैविक खेती का अनुभव देने का अवसर।

पर्यटकों को गौ-आधारित जीवनशैली, पंचगव्य चिकित्सा और जैविक खेती का प्रशिक्षण देना।


✅ अन्य गांवों तक विस्तार

सिद्धपुर में सफलता के बाद पास के अन्य गांवों में विस्तार।

इस मॉडल को उत्तराखंड में "सस्टेनेबल डेयरी एंड बायोगैस इनिशिएटिव" के रूप में प्रमोट करना।



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📊 प्रोजेक्ट का अनुमानित बजट (संभावित खर्चा) – (10 किसान परिवारों के लिए पायलट प्रोजेक्ट)

📌 नोट:

सरकारी योजनाओं और CSR फंडिंग से **40-50% लागत सब्सिडी के रूप में 

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