Thursday, February 6, 2025

मुखबिर पत्रकारिता और निष्पक्षता का ह्रास: एक विश्लेषण



आज की पत्रकारिता में दो महत्वपूर्ण प्रवृत्तियाँ देखने को मिल रही हैं—एक ओर पारंपरिक खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) और दूसरी ओर मुखबिर पत्रकारिता (Informer Journalism)। यहाँ "मुखबिर पत्रकार" से आशय उन पत्रकारों से है जो निष्पक्षता छोड़कर किसी विशेष एजेंडे, सत्ता, या व्यावसायिक समूह के पक्ष में काम करते हैं।

मुखबिर पत्रकारिता के कारण

1. व्यावसायिक दबाव – बड़े मीडिया हाउस अब अधिकतर कॉरपोरेट्स या राजनीतिक दलों से वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित होती है।


2. सरकारी नियंत्रण – सरकारी विज्ञापनों और अनुदानों पर निर्भरता के कारण कई पत्रकार सत्ता के खिलाफ खुलकर बोलने से बचते हैं।


3. प्रोपेगेंडा पत्रकारिता – कुछ पत्रकार केवल खास विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करते हैं, जिससे सत्य के कई पहलू दब जाते हैं।


4. डिजिटल मीडिया और टीआरपी दबाव – सोशल मीडिया और 24x7 न्यूज़ चैनलों की होड़ में सनसनीखेज़ और पक्षपातपूर्ण खबरें अधिक दिखाई जाती हैं।


5. पत्रकारिता में पेशेवर नैतिकता की कमी – कुछ पत्रकार सिर्फ व्यक्तिगत लाभ, प्रसिद्धि, या पैसे के लिए काम करते हैं, न कि सच्चाई के लिए।



इसका समाज पर प्रभाव

जनता का विश्वास कम होना – जब खबरें निष्पक्ष न होकर एजेंडावादी लगती हैं, तो लोग मीडिया पर भरोसा करना छोड़ देते हैं।

फेक न्यूज़ और अफवाहें – मुखबिर पत्रकारिता के कारण फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं, जिससे समाज में अस्थिरता आती है।

न्यायपालिका और प्रशासन पर प्रभाव – जब मीडिया किसी केस को अपनी सुविधा अनुसार दिखाती है, तो न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।


समाधान क्या हो सकता है?

1. स्वतंत्र पत्रकारिता को बढ़ावा देना – गैर-लाभकारी और पाठक-वित्त पोषित (reader-funded) मीडिया को बढ़ावा देने की जरूरत है।


2. फैक्ट-चेकिंग और पारदर्शिता – खबरों को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है।


3. पत्रकारिता में नैतिकता की वापसी – मीडिया संस्थानों को व्यावसायिक लाभ से अधिक नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।


4. स्थानीय मीडिया को मजबूत करना – छोटे और स्वतंत्र पत्रकारों का समर्थन किया जाए, ताकि वे बिना दबाव के सच्चाई सामने ला सकें।



निष्कर्ष

मुखबिर पत्रकारिता का बढ़ता चलन लोकतंत्र और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए एक गंभीर खतरा है। अगर पत्रकारिता को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है, तो इसे व्यावसायिक और राजनीतिक प्रभावों से मुक्त करने के प्रयास करने होंगे। वरना, जैसा कि आपने कहा—लाला के बाजार में पत्रकार मुखबिर ही बने रहेंगे।

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