Thursday, February 6, 2025

फैक्ट-चेकिंग सिस्टम को लागू करने की योजना

फैक्ट-चेकिंग सिस्टम को लागू करने की योजना

हम इसे तीन चरणों में लागू करेंगे:

1. बेसिक ट्रेनिंग और टीम गठन (Week 1-2)


2. फैक्ट-चेकिंग प्रोटोकॉल और टूल्स डेवलपमेंट (Week 3-4)


3. पायलट प्रोजेक्ट और निगरानी (Week 5-6)




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चरण 1: बेसिक ट्रेनिंग और टीम गठन (Week 1-2)

पहला कदम एक मजबूत फैक्ट-चेकिंग टीम बनाना और उसकी ट्रेनिंग देना है।

A. टीम में कौन-कौन होगा?

1. मुख्य फैक्ट-चेकर (Lead Fact-Checker) – 1 व्यक्ति

यह व्यक्ति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगा।



2. डेटा विश्लेषक (Data Analyst) – 1-2 लोग

न्यूज़ में दिए गए आँकड़ों (statistics) की सत्यता की जांच करेंगे।



3. ग्राउंड रिपोर्टर (Ground Reporters) – 2-3 लोग

फील्ड में जाकर खबरों की वास्तविकता की पुष्टि करेंगे।



4. डिजिटल रिसर्चर (Digital Researchers) – 2 लोग

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों की सत्यता जांचेंगे।



5. वीडियो एडिटर (For Fact-Checking Videos) – 1 व्यक्ति

फैक्ट-चेकिंग रिपोर्ट को वीडियो फॉर्मेट में पेश करने के लिए।




B. ट्रेनिंग प्रोग्राम (2 Weeks)

ट्रेनिंग का उद्देश्य टीम को फेक न्यूज़ पहचानने और उसे वेरिफाई करने के टूल्स और तरीकों से परिचित कराना होगा।

1️⃣ फेक न्यूज़ पहचानने की ट्रेनिंग

खबरों में मिसइन्फॉर्मेशन (गलत सूचना) और डिसइन्फॉर्मेशन (जानबूझकर फैलाई गई झूठी खबर) की पहचान कैसे करें?

फेक फोटो/वीडियो की जांच कैसे करें?


2️⃣ फैक्ट-चेकिंग टूल्स की ट्रेनिंग

प्रशिक्षण में निम्नलिखित टूल्स सिखाए जाएंगे:

Google Reverse Image Search (फेक इमेज की जांच के लिए)

InVID (वीडियो फेक है या नहीं, जांचने के लिए)

Datawrapper & OpenStreetMap (डेटा को ग्राफिक्स में बदलने के लिए)

Alt News & Boom Live जैसे फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग


3️⃣ RTI और स्वतंत्र स्रोतों का उपयोग

यदि कोई सरकारी दावा है, तो RTI के माध्यम से सही जानकारी निकालना।

स्थानीय लोगों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं से जमीनी हकीकत समझना।



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चरण 2: फैक्ट-चेकिंग प्रोटोकॉल और टूल्स डेवलपमेंट (Week 3-4)

A. फैक्ट-चेकिंग प्रोटोकॉल (Verification System)

हर खबर को जांचने के लिए चार-स्तरीय प्रणाली होगी:

1. स्रोत जांचें (Source Verification)

खबर का स्रोत कौन है? क्या यह विश्वसनीय है?

क्या यह खबर सरकारी वेबसाइट या आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज है?

क्या यह खबर कम से कम दो स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट होती है?



2. तस्वीर/वीडियो की जांच करें (Image/Video Verification)

क्या तस्वीर Adobe Photoshop से मॉडिफाई की गई है?

Google Reverse Image Search का उपयोग करके जांचें।

वीडियो फेक तो नहीं? इसके लिए InVID टूल का इस्तेमाल करें।



3. डेटा और आँकड़ों की पुष्टि करें (Data Verification)

सरकारी आँकड़े सही हैं या छेड़छाड़ किए गए हैं?

क्या कोई दावा किया गया आँकड़ा विश्वसनीय रिपोर्ट्स में मौजूद है?



4. फील्ड रिपोर्टिंग (On-Ground Verification)

यदि खबर स्थानीय घटना से संबंधित है, तो ग्राउंड रिपोर्टर से पुष्टि कराएं।

स्थानीय लोगों, प्रशासन और स्वतंत्र विशेषज्ञों से बात करें।





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चरण 3: पायलट प्रोजेक्ट और निगरानी (Week 5-6)

A. पायलट प्रोजेक्ट – “Fake vs Real” सीरीज़ शुरू करें

हर हफ्ते सोशल मीडिया और न्यूज़ वेबसाइट पर 1-2 वायरल खबरों की सत्यता जांचने का अभियान चलाया जाएगा।

फेक न्यूज़ का पर्दाफाश करने के लिए वीडियो रिपोर्ट्स बनाई जाएंगी।

हर खबर को ग्राउंड रिपोर्टिंग से क्रॉस-चेक किया जाएगा।


B. फीडबैक और सुधार (Monitoring & Feedback)

6 हफ्ते पूरे होने के बाद रिपोर्ट तैयार करें – किस प्रकार की फेक न्यूज़ सबसे अधिक सामने आई?

जनता और विशेषज्ञों से फीडबैक लेकर सुधार किया जाएगा।



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निष्कर्ष और अगले कदम

✅ फैक्ट-चेकिंग टीम और ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार
✅ प्रोटोकॉल और टूल्स स्थापित
✅ पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च – "Fake vs Real"
✅ सतत निगरानी और फीडबैक सिस्टम लागू




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