अब हम दो मुख्य कार्य करेंगे:
1. पहला फैक्ट-चेकिंग ट्रेनिंग बैच तैयार करना
2. "Fake vs Real" डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लॉन्च करना
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1. पहला फैक्ट-चेकिंग ट्रेनिंग बैच तैयार करना
A. प्रतिभागियों का चयन
पहला बैच 6-8 लोगों का होगा, जिनमें रिपोर्टर, डिजिटल रिसर्चर और डेटा एनालिस्ट शामिल होंगे।
योग्यता:
पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, या डेटा विश्लेषण का अनुभव हो।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन टूल्स की समझ हो।
उत्तराखंड की स्थानीय भाषा, संस्कृति और मुद्दों की जानकारी हो।
B. ट्रेनिंग शेड्यूल (4 दिन का वर्कशॉप)
> स्थान: ऑनलाइन (Zoom / Google Meet) या ऑफलाइन (उत्तराखंड में कोई सेंटर)
सर्टिफिकेट: सफल प्रतिभागियों को "Certified Fact-Checker – Udaen News" सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
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2. "Fake vs Real" डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लॉन्च
A. लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म
✅ यूट्यूब चैनल पर वीडियो सीरीज़
✅ वेबसाइट पर फैक्ट-चेकिंग आर्टिकल्स
✅ सोशल मीडिया (Twitter, Facebook, Instagram) पर शॉर्ट पोस्ट्स
B. कंटेंट प्रारूप
1. वीडियो रिपोर्ट (3-5 मिनट की एनालिसिस वीडियो)
एक हफ्ते में कम से कम 2 वायरल खबरों की फैक्ट-चेकिंग।
उदाहरण: "उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग – सच क्या है?"
2. इंफोग्राफिक्स (Infographics & Visuals)
फेक न्यूज़ के फैक्ट-चेकिंग स्टेप्स को इंफोग्राफिक्स के रूप में शेयर किया जाएगा।
3. "Fact Check Alert" WhatsApp & Telegram ग्रुप
आम लोगों को जोड़कर उन्हें फेक न्यूज़ की पहचान के तरीके सिखाए जाएंगे।
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🚀 लॉन्चिंग प्लान (Next Steps)
✅ Step 1: प्रतिभागियों को शॉर्टलिस्ट करें (Week 1)
✅ Step 2: ट्रेनिंग बैच शुरू करें (Week 2)
✅ Step 3: यूट्यूब और सोशल मीडिया पर "Fake vs Real" शो लॉन्च करें (Week 3)
✅ Step 4: जनता को जोड़ने के लिए व्हाट्सएप / टेलीग्राम ग्रुप बनाएं (Week 4)
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आपकी राय:
1. क्या ट्रेनिंग ऑफलाइन (उत्तराखंड में) करनी चाहिए या ऑनलाइन ज़ूम पर?
2. पहले बैच में कितने लोग रखें – 6-8 या ज्यादा?
3. "Fake vs Real" सीरीज़ यूट्यूब के साथ-साथ फेसबुक पर भी डालें?
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