"ब्याह रै रीती रिवाज" (गढ़वाली लोकगीत)
बोल:
ब्याह रै रीती रिवाज,
गाँव रै चल्या प्रीत का राज।
पढो बंधन, पहनो साड़ी,
संग हंसी के सपने साड़ी।
गडम रौं पूजा, हलवाई रौं गीत,
न्यौली के संग गाओ गीत।
फूलों की महक, घुघूती रै गान,
प्यार के रंग में बसा हर ध्यान।
माँ का आशीर्वाद, बाप रौ स्नेह,
सास की ममता, ससुर का प्रेम।
गाँव का रंग, रीत-रिवाज,
हसीन शादी, बेशुमार राज।
ब्याह के दिन, चाँद की रात,
गीतों में रंगीनी, दिलों में बात।
गांव की गलियाँ, खुशियों से भरी,
सपनों का सच, अब हो गई सवारी।
अर्थ:
यह गीत गढ़वाली शादी के पारंपरिक रीत-रिवाजों, खुशियों और समाज की एकजुटता को दर्शाता है। गीत में शादी के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है—प्यार, आशीर्वाद, पूजा, हलवाई की मिठाइयाँ, और सास-बहू के रिश्ते। गढ़वाली संस्कृति में शादी का बहुत महत्व है, और यह गीत उस समृद्ध परंपरा और सौहार्द का प्रतीक है।
No comments:
Post a Comment