"झुम्याली" (गढ़वाली लोकगीत)
बोल:
झुम्याली, झुम्याली, पाणी रौ घाटी,
घुघूती बासूती, गाएँ गीत प्यारी।
धन्य छौं तुम, धन्य छौं हम,
गढ़वाल रौ सूरज, रौ चाँद।
हरी-भरी घाटी में बुरांश का रंग,
न्यौली की आवाज़, गूंजे गगन।
घाघरा लहरायो, पाजेब की छमक,
खुशियाँ हों पूरे गाँव, संग-संग।
माटी रै खनक, रांधन रौ सुवास,
काँठी का सौगंध, मन रौ विश्वास।
गढ़वाल की धरती, मातृभूमि प्यारी,
हम सबकी धड़कन, हमारी सवारी।
नदी की लहरें, संग गाओ गीत,
सपने हकीकत में हो, सच में मीत।
झुम्याली गाओ, गाओ मन से प्यार,
गढ़वाल रौ दिल है, मेरा संसार।
अर्थ:
यह गीत गढ़वाल की माटी, उसके लोगों और प्रकृति के प्रेम का गहरा चित्रण करता है। इसमें गढ़वाल की घाटियों की हरियाली, बुरांश के फूलों, न्यौली के गीत और गाँव की खुशियों का वर्णन है। गीत में गढ़वाल के प्रति प्रेम और उसका गर्व दर्शाया गया है। यह गीत गढ़वाली संस्कृति की गहरी जड़ों को सम्मानित करता है।
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