"ठंडी ठंडी हवाएं" (गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत)
बोल:
ठंडी ठंडी हवाएं,
घामूं छौं ऊँच पहाड़ा,
पानी की छन छन धारों,
मन में जागौं मीठो प्यार।
झीलों मां चमकदूं पाणी,
घुघुती गाऊं मीठो गीत,
बुरांश के फुल्यां रंग मा,
रंगीन छौं मेरा गढ़वाल प्रीत।
नदी-गदेरा, पंछी रौं संग,
हरे-भरे वन छांऊ मा ढंग,
मेरु पहाड़, मेरु अभिमान,
गढ़वाल मेरो सच्चो जान।
अर्थ:
इस गीत में गढ़वाल के ठंडी हवाओं, ऊँचे पहाड़ों, स्वच्छ पानी की धाराओं और बुरांश के फूलों का सुंदर वर्णन है। यह गीत प्रकृति के साथ गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है और गढ़वाल के प्राकृतिक सौंदर्य को एक मधुर लोकधुन के साथ जीवंत करता है।
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