गढ़वाली लोक गीत
सोरा मा डाली घुघुती,
पानी मा छाली झील,
घाम लागुं ऊँच पहाड़ा,
छाँव मा बैठूं मैं दिल।
बुरांश फुल्यूं लाल-लाल,
न्यौली गाऊं मीठो गान,
त्यूं देखूं छबीलो मुंहड़ो,
मोरी सास ल्यूं मुस्कान।
घुघूती बासूती ऐली,
ले आयो सुखद संदेस,
मेरो पहाड़, मेरो मन,
जोड़ू दिल से हर एक बंधेस।
यह गीत पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, बुरांश के फूलों, और वहां की सादगी भरी जीवनशैली को दर्शाता है।
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